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 धर्म

 

एकाग्रता

जीवन की अन्यान्य बातों की अपेक्षा सोचने की प्रक्रिया पर सामान्यत: कम ध्यान दिया गया है, जबकि मानवी सफलताओं-असफलताओं में उसका महत्त्वपूर्ण योगदान है। ....

सफलता और तनाव

हम जो भी करते हैं, वह किसी न किसी रूप में, दूसरे इंसान के जीवन में योगदान दे रहा है। ....

आत्मा

एक मित्र ने सुबह की चर्चा के बाद पूछा है कि क्या कुछ आत्माएं शरीर छोड़ने के बाद भटकती रह जाती हैं? ....

सजगता

जो होगा सो देखा जाएगा’, किसान यह नीति अपना कर फसलों की देखरेख करना छोड़ दे, निराई-गुड़ाई करने की व्यवस्था न बनाए, खाद-पानी देना बन्द कर दे तो फसल के चौपट होते देर न लगेगी। ....

मृत्यु

जीवन क्या है, मनुष्य इसे भी नहीं जानता है। और जीवन को ही हम न जान सकें, तो मृत्यु को जानने की तो कोई संभावना ही शेष नहीं रह जाती। ....

बुद्धत्व

स्वस्थ व्यक्ति निरन्तर अनुभव नहीं करता कि वह स्वस्थ है, केवल बीमार व्यक्ति स्वास्थ्य में रुचि रखते हैं। ....

आदत

जिन कार्यों या बातों को मनुष्य दुहराता रहता है, वे स्वभाव में सम्मिलित हो जाती हैं, और समय के साथ आदतों के रूप में प्रकट होती हैं। ....

चेष्टा

जो होगा सो देखा जाएगा’, किसान यह नीति अपना कर फसलों की देखरेख करना छोड़ दे, निराई-गुड़ाई करने की व्यवस्था न बनाए, खाद-पानी देना बन्द कर दे तो फसल के चौपट होते देर न लगेगी। ....

मोबाइल और ध्यान

बहुत से साधकों को लगता है कि मोबाइल जैसे साधन उनके ध्यान को भटकाते हैं। क्या आपको भी ऐसा ही लगता है? ....

पूर्णिमा स्नान के लिए 1 लाख से अधिक श्रद्धालु पुरी पहुंचे

स्नान पूर्णिमा के शुभ अवसर पर भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों के दर्शन करने के लिए मंगलवार को एक लाख से अधिक श्रद्धालु पुरी पहुंचे, जिनमें विदेशों से आए कुछ लोग भी शामिल हैं। ....

जागरूकता

आपने अपने जीवन के हर क्षेत्र के लिए निवेश किया है। हमने जीने के लिए निवेश किया है, तो अपनी सहजता के लिए भी निवेश किया है। ....

धर्म अध्ययन

सभी धर्मो का अध्ययन करना जरूरी है, लेकिन चुनाव स्वयं का होना चाहिए, कोई दूसरा चुनाव न करे। अच्छी दुनिया पैदा हो सकती है। ....

अतिरेक

जिस प्रकार आवश्यकता को आविष्कार की जननी कहा जाता है, इसी प्रकार दु:ख को सुख का जनक मान लिया जाए तो अनुचित न होगा। ....

गरीब की मांग

एक बहुत अरबपति महिला ने एक गरीब चित्रकार से अपना चित्र बनवाया, पोट्रेट बनवाया। चित्र बन गया, तो वह अमीर महिला अपना चित्र लेने आई। वह बहुत खुश थी। ....

चिन्ता

जीवन एक लम्बा पथ है, जिसमें कितने ही प्रकार के झंझावात आते रहते हैं। ....

पर्यावरण

एक समय था, जब सारी दुनिया में, जब लोगों के पास कोई काम नहीं होता था तब वे मौसम की चर्चा किया करते थे, लेकिन आजकल कोई मौसम की चर्चा नहीं करता। ....

लोभ

काम क्रोध और लोभ..इन तीनों में लोभ ही है जो मानव का सबसे ज्यादा अनिष्ट करता है। ....

स्व-प्रेरणा

जो होगा सो देखा जाएगा’, किसान यह नीति अपना कर फसलों की देखरेख करना छोड़ दे, निराई-गुड़ाई करने की व्यवस्था न बनाए, खाद-पानी देना बन्द कर दे तो फसल के चौपट होते देर न लगेगी। ....

संकल्प शक्ति

एक आदमी ने तय किया कि आज खाना नहीं खाएंगे। इसका जो मूल्य है, वह खाना नहीं खाने में उतना नहीं है, जितना इसके संकल्प में है, लेकिन उसने अगर मन में भी एक दफा खाना खा लिया, तो बात खतम हो गई, बेकार हो गया सब मामला। ....

विधेयात्मक चिन्तन

जो होगा सो देखा जाएगा’, किसान यह नीति अपना कर फसलों की देखरेख करना छोड़ दे, निराई-गुड़ाई करने की व्यवस्था न बनाए, खाद-पानी देना बंद कर दे तो फसल के चौपट होते देर न लगेगी। ....

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