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 नजरिया

 
जम्हूरियत में अराजकता की इजाजत नहीं

लोकतंत्र ऐसी शासन प्रणाली है जिसमें जनता को सबसे ऊपर रखा गया है। इसी तरह तमाम शासन प्रणालियों की तुलना में लोकतंत्र के आकषर्ण को सर्वोपरि माना गया है। ....

चुनौतियों से गुजर रहा है गणतंत्र

आज यह बात साफ तौर पर सामने आ रही है कि नागरिकता कानून के खिलाफ जो माहौल बनाया गया है, उसके केंद्र में यह डर है कि संशोधित कानून भारत के मुसलमानों के खिलाफ है। एनआरसी से जोड़कर भेदभाव के इस डर को दोगुना कर दिया गया ह ....

मोदी-विरोध को देश-विरोध न बनाए विपक्ष

हमने अपने देश में शासन के लिए संसदीय व्यवस्था को चुना है। इस व्यवस्था में बहुमत के पास सरकार चलाने का जनादेश होता है और अल्पमत के पास रचनात्मक विरोध की जिम्मेदारी। ....

शांति का विश्वदूत बने भारत

सवा सौ साल पहले दुनिया में अमन-चैन की दुआ भारत की जमीन से ही निकली थी। उस दौर में स्वामी विवेकानंद ने दुनिया को शांति का संदेश दिया था। दोबारा सत्ता में लौटने के बाद पिछले साल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक ....

भारत पर भी दंगल टालने का दारोमदार

बड़ी ताकत बड़ी जिम्मेदारी लाती है। कहने को ये कहावत भले ही एक कॉमिक सीरीज स्पाइडर मैन से लोकप्रिय हुई है, लेकिन पूरी दुनिया इस बात की गंभीरता को मानती है। ....

नौबत ही न आने दें ‘प्रेशर कुकर’ फटने की

लोकतंत्र की सरलतम पहचान ऐसी शासन व्यवस्था से परिभाषित होती है, जिसमें रहने वाले लोगों को अपनी बात कहने की पूर्ण आजादी और व्यवस्था के विरोध का पूरा अधिकार होता है। जनता द्वारा, जनता के लिए, जनता का शासन इसकी लोकप् ....

कब पूरा होगा संवेदनहीनता का ‘कोटा’ ?

राजस्थान में हुआ खिलवाड़ इसी बेशर्म सिलसिले की नई कड़ी लगती है। कोटा के जेके लोन अस्पताल में 34 दिन में 106 शिशुओं की मौत शर्म से सिर झुका देने वाली घटना नहीं तो फिर क्या है? प्रदेश सरकार ने जो सूचना साझा की है, उसके अ ....

डर के आगे है 2020

आशावादी सोच तो यह है कि आज जब ज्यादातर देशों में जबरदस्त मंदी का ‘परचम’ है, तब भी भारत में इसका असर कम है। बेशक, आर्थिक विकास हिचकोले खा रहा हो, मगर हमारे पास इसे दोबारा पटरी पर लाने का हौसला भी है, और हुनर भी। जरूरत ....

लगाइए नहीं, आग बुझाइए

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) और नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) पर भ्रम, राजनीति और विवाद बढ़ता ही जा रहा है। ....

टूट रहा है बीजेपी का तिलिस्म?

बीजेपी की खुशकिस्मती है कि नरेन्द्र मोदी के प्रति लोगों का भरोसा अभी टूटा नहीं है। इसका असर चुनाव में वोटिंग के ट्रेंड से साफ दिखाई देता है। 2014 के आम चुनाव के बाद हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी के वोट घटे थे, लेक ....

नजरिया : राष्ट्रवाद का ’ट्रंप‘ कार्ड!

लोकतंत्र की ताकत अवाम को मिली अभिव्यक्ति की आजादी और शासन से सवाल पूछने के अधिकार की व्यवस्था में निहित होती है। ....

‘अपनों’ से कैसा बैर?

कथित धार्मिंक भेदभाव नागरिकता संशोधन कानून पर बवाल की सबसे बड़ी वजह बन गया है। देश के मुसलमानों में यही डर भरा जा रहा है कि यह कानून उनसे ‘नागरिकता छीनने’ के लिए लाया गया है। दुष्प्रचार किया जा रहा है कि सरकार एन ....

भारतवंशियों के आए अच्छे दिन!

भारत में लोग भले ही अच्छे दिन का इंतजार कर रहे हों, लेकिन दुनिया के बाकी हिस्सों में पिछले कुछ वर्षों से भारतवंशियों के दिन जरूर अच्छे चल रहे हैं। ....

सबके साथ से लौटेगा अर्थव्यवस्था में विश्वास

जीडीपी ग्रोथ रेट 15 साल के न्यूनतम स्तर पर है तो बेरोजगारी 45 साल के उच्चतम स्तर पर। पिछले 40 साल में पहली बार उपभोक्ता खर्च कम हुआ है। इसके बावजूद सरकार मंदी को नकार रही है। लेकिन जब आम आदमी की थाली से खाना ही गायब हो ....

सोच बदलने से बदलेगी सूरत

भारत के प्राचीन ग्रंथों से लेकर आधुनिक विमर्श तक जहां भी देवी का वर्णन है, वहां शक्ति उसके पर्याय स्वरूप में उपस्थित है। ....

समस्या न बन जाए सवाल का समाधान

सबसे बड़ा सवाल तो समाधान को लेकर ही है। एनआरसी की पूरी प्रक्रिया के बाद जो घुसपैठिये चिह्नित होकर सामने आएंगे उनका क्या होगा? उनके साथ क्या सलूक किया जाएगा? अगर वे घुसपैठिये बांग्लादेशी हैं, तो क्या बांग्लादेश ....

दिल्ली में किसका सजेगा दरबार!

किसी भी देश में चुनाव अगर लोकतंत्र की आत्मा है, तो मतदाता उसके भाग्यविधाता। चुनाव के ‘जनपथ’ पर चल कर मतदाता ही सत्ता के ‘राजपथ’ का फैसला करते हैं। ....

नये बदलाव से लौटेगा पुराना भरोसा

विनिवेश के अलावा सरकार क्या कर रही है। विदेशी निवेश और निर्यात के साथ-साथ घरेलू बाजार में उपभोग और मांग बढ़ाने की सरकार की कोशिशें जारी हैं। आर्थिक नीतियों की भी समीक्षा हो रही है। हालांकि कोशिशों को और धार देन ....

त्वरित टिप्पणी : शिवसेना के सियासी सपनों पर सर्जिकल स्ट्राइक!

सही अर्थों में बड़ा नेतृत्व देने वाला व्यक्ति वही होता है जो अपने नीचे छोटे-छोटे लीडर्स की पहचान करके उन्हें अगली कतार में लाकर खड़ा करता है। ....

विरोध से क्यों भर गया यह ‘रजिस्टर’?

हिन्दुस्तान ऐसा देश है, जहां शहरी जीवन अलग है, ग्रामीण परिवेश अलग है, कस्बाई इलाकों की मिश्रित जीवन शैली अलग है। ....

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