सरोकार : शीर्ष पर पहुंच चुकी औरतें रास नहीं आतीं आपको

Last Updated 04 Oct 2020 12:13:42 AM IST

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव सिर पर हैं। ऐसे में महिला नेताओं पर आरोप-प्रत्यारोपों का सिलसिला भी शुरू हो चुका है।


सरोकार : शीर्ष पर पहुंच चुकी औरतें रास नहीं आतीं आपको

कहना गलत होगा कि ट्रंप के दौर में महिला नेताओं पर होने वाले मौखिक हमले नया चलन है। इतिहास साबित करता है कि ऐसा हर दौर में था। शीर्ष पर पहुंचने वाली या पहुंचने की कोशिश करने वाली सभी महिलाओं को इनका सामना करना पड़ता है।
महिला नेताओं का बोलना शायद ही किसी को भाता हो। र्शी चिशॉम से लेकर हिलेरी क्लिंटन और ऑस्ट्रेलिया की प्रधानमंत्री जूलिया गिलॉर्ड और हाल ही में कमला हैरिस और गवर्नर जनरल जूली पायेटे इसकी उदाहरण हैं। ताजा मिसाल कमला हैरिस हैं, जो डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हैं। उनके लिए तो खुद ट्रंप कह चुके हैं कि वह जीत गई तो यह देश का अपमान होगा। ट्रंप की टक्कर जो बिडन से है। ट्रंप का कहना है कि कमला जीत गई तो वही बिडेन की बॉस होंगी।
अक्सर उच्च पद पर बैठी महिलाओं के चरित्र हनन से सारा मामला शुरू होता है। जैसा कि कनाडा में देखा गया। कोविड-19 जैसी महामारी के बीच ब्रिटिश कोलंबिया की चीफ हेल्थ ऑफिसर बोनी हेनरी पर व्यक्तिगत हमले किए गए। उन्हें भद्दी भाषा में पत्र लिखे गए। हत्या की धमकियां दी गई। चूंकि बहुत से लोगों को उनके काम करने का तरीका रास नहीं आ रहा था। जैसा कि एमी अवार्ड जीतने वाली पहली ब्लैक ऐक्ट्रेस वॉयला डेविस ने कहा था, महिलाओं को उच्च शिखर पहुंचने के बहुत नुकसान होते हैं। अमेरिका में विमैन ऑफ कलर को कई तरह के अपमान सहने पड़ते हैं।

यह स्थिति भारत में भी है। बसपा सुप्रीमो मायावती का उदाहरण ले सकते हैं। वह चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। फिर भी भाजपा के दयाशंकर सिंह ने उनके खिलाफ अपमानसूचक टिप्पणी की थी। चरित्र हनन हर उस औरत के होते हैं जो अपनी शतरे पर जीना चाहती है। खास तौर से लाइमलाइट में रहने वाली। इस सिलसिले में हिंदी सिने तारिका रेखा की जिंदगी की परतों को खोला जा सकता है। 1999 में रेखा को बुरी तरह विच हंट किया गया था। उनके पति मुकेश अग्रवाल ने सुसाइड कर लिया था। तब खबर आई थी कि मुकेश ने उनके दुपट्टे से फांसी लगाई है। पर कोई साबित नहीं कर पाया था कि वह रेखा का ही दुपट्टा था। सिने ब्लिट्स पत्रिका में दावा किया गया था कि मुकेश ने सुसाइड इसलिए किया था क्योंकि उन्हें रेखा और उनकी सेक्रेटरी फरजाना खान के संबंधों के बारे में पता चल गया था। इसके बाद शेषनाग फिल्म के पोस्टर में रेखा के चेहरे पर कालिख पोत दी गई थी। रेखा ने इन आरोपों पर कोई जवाब नहीं दिया था। इस बीच यह खबर भी आई थी कि मुकेश क्रॉनिक डिप्रेशन के लिए किसी साइको-एनालिस्ट से इलाज करा रहे थे। सच बात तो यह है कि फिल्म इंडस्ट्री से उन्हें किसी की तरफ से कोई सहारा नहीं मिला था-सिर्फ  शशि कपूर ने उन्हें चिट्ठी लिखकर दुख जताया था। बेशक, आज वह दौर नहीं। आज ट्विटर ट्रोल्स, व्हॉट्सएप मीम्स और न्यूज चैनल पीछा नहीं छोड़ते, लेकिन औरतों को अपनी लड़ाई खुद लड़नी पड़ती है। अमेरिकी सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने कहा था, आपको वह नहीं मिलेगा, जिसके लिए आप संघर्ष नहीं करेंगी। दिलचस्प बात यह है कि ऊपर जिन भी महिलाओं का जिक्र है, वे सभी अपनी-अपनी लड़ाइयां लड़ती रही हैं, आगे भी लड़ती रहेंगी। अपनी पहचान को साबित करने के लिए-हर जगह पर मजबूती से डटे रहने के लिए।

माशा


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