अयोध्या मामला : मध्यस्थता समिति ने सौंपी रिपोर्ट

Last Updated 02 Aug 2019 05:50:35 AM IST

अयोध्या विवाद मामले में गठित मध्यस्थता समिति ने बृहस्पतिवा को सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में अपनी फाइनल रिपोर्ट पेश की।


सुप्रीम कोर्ट

समझा जाता है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट 2 अगस्त को सुनवाई पर विचार करेगा। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने मध्यस्थता समिति से यह रिपोर्ट मांगी थी।

इससे पहले 18 जुलाई को समिति ने कोर्ट को स्टेटस रिपोर्ट सौंपी थी। तब सीजेआई ने कहा था कि अभी मध्यस्थता की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर नहीं लिया जा रहा, क्योंकि ये गोपनीय है।

पैनल जल्द अंतिम रिपोर्ट सौंप दे। अगर कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला तो हम 2 अगस्त को रोजाना सुनवाई पर विचार करेंगे। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता और जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण व जस्टिस एसए नजीर की सदस्यता वाली संवैधानिक बेंच कर रही है। 

जस्टिस कलीफुल्ला के नेतृत्व में गठित हुई थी मध्यस्थता समिति : सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 8 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एफएम कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की थी, जिसे मामले का सर्वमान्य समाधान निकालना था। मध्यस्थता समिति में आध्यात्मिक गुरु  श्रीश्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पांचू भी शामिल थे। मध्यस्थता पैनल ने संबंधित पक्षों से बंद कमरे में बातचीत की।

हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ 14 अपीलें
इलाहाबाद हाई कोर्ट के 30 सितम्बर 2010 के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में 14 अपीलें दायर की गई हैं। हाई कोर्ट ने विवादित 2.77 एकड़ भूमि को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान के बीच समान रूप से विभाजित करने का आदेश दिया था।

हालांकि, शीर्ष अदालत ने मई 2011 में हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने के साथ ही अयोध्या में विवादित स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।

सहारा न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली


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