जम्मू-कश्मीर में घाटी के कश्मीरी पंडितों ने 35 साल बाद गणेश चतुर्थी समारोह के मौके पर ‘रथ यात्रा’ निकाली।
घाटी में 35 साल पहले आतंकवाद के उभार के कारण रथयात्रा बंद हो गयी थी। शहर के हब्बा कदल इलाके स्थित गणपतियार मंदिर से यह यात्रा शुरू हुई।
पंडित समुदाय के सदस्यों ने झेलम में भगवान गणपति की प्रतिमा का विसर्जन किया।
सामाजिक कार्यकर्ता संजय टिक्कू ने ‘पीटीआई-वीडियो’ को बताया, “गणपतियार मंदिर से रथ यात्रा निकाली गई और गणेश जी की प्रतिमा को झेलम में विसर्जित किया गया।”
उन्होंने कहा कि घाटी में ‘आतंकवाद के उभार के बाद’ यह यात्रा पहली बार निकाली गयी।
टिक्कू ने कहा, “हमने प्राकृतिक आपदाओं के रुकने और सभी लोगों (उनकी जाति, पंथ या धर्म से परे) के प्रेमपूर्वक एक साथ रहने की प्रार्थना की। हमने प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रहने के लिए प्रार्थना की।”
कश्मीरी पंडित नेता ने कहा कि समुदाय पिछले तीन वर्षों से घाटी में गणपति विसर्जन का आयोजन करता आ रहा है।
रविवार को संपन्न हुए पांच दिवसीय समारोह को श्रद्धा और उत्सव के साथ मनाया गया।