जब तक सरकार मराठा आरक्षण की मांग स्वीकार नहीं करती, तब तक मुंबई नहीं छोड़ेंगे: जरांगे

Last Updated 31 Aug 2025 05:32:19 PM IST

मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने रविवार को कहा कि जब तक मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक वह मुंबई नहीं छोड़ेंगे। उनका अनशन रविवार को तीसरे दिन भी जारी रहा।


जरांगे ने यह भी दावा किया कि उनकी मांग संवैधानिक रूप से वैध है और सरकार के पास ऐसे रिकॉर्ड मौजूद हैं, जो दर्शाते हैं कि कुनबी और मराठा एक ही जाति हैं।

पुलिस के अनुसार, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) पर बड़ी संख्या में आंदोलनकारियों की मौजूदगी के कारण इलाके और आसपास के चौराहों पर यातायात प्रभावित हुआ।

मुंबई यातायात पुलिस ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘आजाद मैदान में आंदोलन अभी जारी है। आंदोलनकारी सीएसएमटी चौराहे पर मौजूद हैं, जिससे इलाके और आसपास के चौराहों पर यातायात प्रभावित हो रहा है। वाहन चालकों को सलाह दी जाती है कि वे इन मार्गों से बचें और अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग अपनाएं।’’

जरांगे ने कहा कि मराठा समुदाय के लोग अपने दिल में बहुत दर्द लेकर आंदोलन में भाग लेने मुंबई आए हैं और उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से आग्रह किया कि उन्हें ‘‘भीड़’’ न समझा जाए।

आरक्षण कार्यकर्ता आरक्षण की मांग को लेकर शुक्रवार से दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन अनशन पर हैं।

जरांगे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत मराठों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि सभी मराठाओं को ओबीसी के अंतर्गत आने वाली कृषि प्रधान जाति ‘‘कुनबी’’ के रूप में मान्यता दी जाए, ताकि समुदाय के लोगों को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण मिल सके।

उन्होंने कहा, ‘‘कल से मैं पानी पीना छोड़ दूंगा, क्योंकि सरकार हमारी मांगें नहीं मान रही है, लेकिन जब तक आरक्षण की मांग पूरी नहीं हो जाती, मैं वापस नहीं जाऊंगा। हम मराठों को ओबीसी श्रेणी में आरक्षण दिलाकर ही रहेंगे, चाहे कुछ भी हो जाए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी मांग संवैधानिक रूप से वैध है। सरकार के पास 58 लाख मराठों के कुनबी होने का रिकॉर्ड है। मराठा, जब भी समय मिलेगा, मुंबई (आंदोलन के लिए) आएंगे।’’

जरांगे ने अपने समर्थकों से आग्रह किया कि वे अपने वाहन निर्धारित पार्किंग स्थलों पर रखें और ट्रेन से आजाद मैदान आएं।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार को उन्हें भीड़ नहीं समझना चाहिए। वे बहुत कष्ट सहकर यहां आए हैं।’’

मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे और सरकार द्वारा नियुक्त प्रतिनिधिमंडल के बीच शनिवार को बातचीत हुई थी, लेकिन यह बेनतीजा रही।

जरांगे ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश संदीप शिंदे को बातचीत के लिए भेजे जाने को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की आलोचना की। न्यायमूर्ति शिंदे मराठा आरक्षण प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित समिति के अध्यक्ष हैं।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उनकी सरकार मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे की मांगों को कानूनी और संवैधानिक ढांचे के भीतर पूरा करने के लिए काम कर रही है।

वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार ने शनिवार को कहा कि इन मुद्दों को हल करने के लिए एक संवैधानिक संशोधन आवश्यक है, क्योंकि कुल आरक्षण की एक सीमा है।

सात बार अनशन कर चुके जरांगे ने कहा कि यह आंदोलन आरक्षण पाने के लिए समुदाय की ‘‘अंतिम लड़ाई’’ है।

भाषा
मुंबई


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