वाराणसी: चन्द्रग्रहण और माघ पूर्णिमा एक साथ, गंगा में उमड़ा आस्था का सैलाब

Last Updated 31 Jan 2018 11:48:03 AM IST

हिन्दू धर्म में माघ पूर्णिमा का विशेष महत्व माना गया है. उत्तर प्रदेश की प्राचीन धार्मिक नगरी वाराणसी में माघ पूर्णिमा पर आज बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं.


फाइल फोटो

साल 2018 में ऐसा पहली बार है जब माघ पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण, सुपर मून और ब्लू मून पड़ रहा है.

हिन्दू पंचांग के अनुसार यह पूर्णिमा चंद्रमास का आखिरी दिन होता है. इस बार माघ पूर्णिमा पर कई विशेष संयोग बन रहा है. साल 2018 में ऐसा पहली बार है जब माघ पूर्णिमा, खग्रास चंद्र ग्रहण, सुपर मून और ब्लू मून पड़ रहा है.

हालांकि, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुबह साढ़े आठ बजे के बाद सूतक काल होने के कारण आज गंगा स्नान करना उचित नहीं माना जाता है. इस दौरान गंगा-घाटों पर सिर्फ पूजा-अर्चना का विधान है, लेकिन जानकारी के अभाव में बहुत से श्रद्धालु सूतक काल में भी गंगा घाटों पर डुबकी लगाते देखे गए. 
     
सूतक काल शुरू होने से पहले विप्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर से चंद कदमों की दूरी पर स्थित ऐतिहासिक दशामेध घाट एवं शीतला घाट के अलावा असि घाट सहित अधिकांश घाटों पर सुबह लगभग चार बजे से भी श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया था. सुबह साढ़े आठ बजे बाद सूतक काल शुरू होने से पहले तक श्रद्धालुओं का सैलाब देखा गया. उसके बाद स्नान करने वालों की संख्या में अपेक्षाकृत कम देखी गई.
 
पुलिस सूत्रों ने बताया कि घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गए जबकि वहां पहुंचने के लिए समुचित यातायात व्यवस्था की गई है. यातायत पुलिस के जवान विशेष निगरानी कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि जल पुलिस को विशेष तौर सतर्कता बरतने के निर्देश दिये गए हैं. 
      
150 साल बाद होने वाले अछ्वूत चंद्र ग्रहण के कारण ऐतिहासिक दशामेध घाट पर शाम को होने वाली विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती आज रात नौ बजे से शुरू होगी और मंदिरों के कपाट भी बंद रहेंगे. 
      
चंद्र ग्रहण आज शाम पांच बजकर 35 मिनट पर शुरू होगा और आठ बजकर 42 मिनट पर समाप्त हो जाएगा. ग्रहण शुरू होने से नौ घंटे पहले सूतक काल शुरू होना माना जाता है. इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद करने की परंपरा है. 

काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एस एन त्रिपाठी ने बताया कि मंदिर अपरान साढ़े तीन बजे से साढ़े पांच घंटे के लिए बंद रहेगा तथा ग्रहण खत्म होने के बाद रात नौ बजे मंदिर फिर से दर्शन-पूजन के लिए खोल दिया जाएगा और अन्य दिनों की तरह सामान्य रुप से पूजा-अर्चना होगी. 

इसी प्रकार से अन्नपूर्णा मंदिर में अपहरान साढ़े तीन बजे से रात साढ़े नौ बजे तक कपाट बंद रहेंगे. संकटमोचन मंदिर एवं अन्य प्रमुख मंदिरों में भी सूतक काल के दौरान पूजा-अर्चना आशिंक रुप से नहीं होगी.
 

समय लाइव डेस्क/वार्ता


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