मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे ने शुक्रवार को दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में अनशन शुरू किया और कहा कि समुदाय की मांगें पूरी होने तक वे पीछे नहीं हटेंगे।

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सरकार ने कहा कि वह जरांगे की मांगों को लेकर उनसे बातचीत के लिए तैयार है जबकि राज्य के मराठवाड़ा क्षेत्र के सांसदों और विधायकों ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर जरांगे से मुलाकात की।
केसरिया टोपी, स्कार्फ पहने और झंडा थामे जरांगे (43) के हजारों समर्थकों ने सुबह करीब 9:45 बजे आंदोलन स्थल पर उनका जोरदार स्वागत किया।
जरांगे ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, “जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, मैं पीछे नहीं हटूंगा। चाहे मुझे गोली मार दी जाए, मैं पीछे नहीं हटूंगा।”
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से "सहयोग की कमी" ने समुदाय को मुंबई तक मार्च करने के लिए मजबूर किया।
उन्होंने कहा, "अब जब सरकार ने आंदोलन की अनुमति दे दी है, तो हमें पुलिस के साथ सहयोग करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम ऐसा कुछ भी न करें जिससे समुदाय की छवि धूमिल हो।"
पूर्वाह्न 10 बजे से अनशन शुरू करने वाले जरांगे ने अपने समर्थकों से बार-बार शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने और मुंबईवासियों को असुविधा न पहुंचाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने उपद्रव मचाया है और आंदोलनकारी पता लगाएं कि वे कौन हैं और किस जिले से आए हैं।
जरांगे ने कहा, "दो घंटे में सड़कें खाली कराएं और सुनिश्चित करें कि मुंबईवासियों को परेशानी न हो। जो लोग आज शहर से जाना चाहते हैं, वे ऐसा कर सकते हैं।"
उन्होंने आंदोलन के लिए पुलिस की ओर से केवल एक दिन की अनुमति मिलने पर अफसोस जताया।
जरांगे ने कहा, "हमने मुंबई आने का फैसला किया और हम आ गए। हमें उम्मीद है कि सरकार और अदालत हमें आंदोलन जारी रखने की अनुमति देंगे। हम एक और आवेदन प्रस्तुत करेंगे।"
उन्होंने सरकार से विरोध प्रदर्शन के लिए और दिनों का समय देने की भी अपील की।
जरांगे ने कहा, "हम चाहते हैं कि सरकार हमें आरक्षण दे और हमारी सभी मांगें मान ले। मैं मुख्यमंत्री से आग्रह करता हूं कि वह मराठों का आक्रोश न भड़कने दें। आप मुझे गोली मार सकते हैं या जेल में डाल सकते हैं। मैं जेल में सड़ जाऊंगा, लेकिन जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक मैं हिलूंगा नहीं।"
जरांगे ने बुधवार को जालना जिले के अपने गांव अंतरवाली सराटी से यह यात्रा शुरू की थी, जो मुंबई से करीब 400 किलोमीटर दूर है।
जरांगे (43) अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के तहत मराठा समुदाय के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि उनके समर्थक शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करेंगे और गणेश उत्सव में किसी प्रकार का विघ्न नहीं डालेंगे।
जरांगे की मांग है कि सभी मराठों को कुनबी के रूप में मान्यता दी जाए। कुनबी कृषि प्रधान समुदाय है, जो ओबीसी श्रेणी में शामिल है। ओबीसी श्रेणी में शामिल होने से मराठों को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण का लाभ मिलेगा।
इस बीच राज्य के मराठवाड़ा क्षेत्र के कई जन प्रतिनिधियों ने जरांगे से मुलाकात की।
मुलाकात करने वालों में बीड से राकांपा (एसपी) के सांसद बजरंग सोनावणे, उनके सहयोगी और बीड के विधायक संदीप क्षीरसागर, परभणी लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले शिवसेना (उबाठा) नेता संजय जाधव और एसीपी से विधायक प्रकाश सोलंके (मजलगांव) और विजयसिंह पंडित (गेकपोरा पवार) शामिल थे।
महाराष्ट्र के मंत्रियों राधाकृष्ण विखे पाटिल और चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि राज्य सरकार मनोज जरांगे से बातचीत के लिए तैयार है और उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा रहा है।
मराठा आरक्षण उप-समिति के अध्यक्ष विखे पाटिल ने कहा कि उन्हें जरांगे की मांगों का ज्ञापन मिल गया है और इस पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने इन मांगों को नज़अंदाज नहीं किया है।
बावनकुले ने कहा कि सरकार ने समुदाय के हित में कई पहल की हैं, लेकिन मराठों को आरक्षण का लाभ देते समय ओबीसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए, ठीक इसी तरह ओबीसी आरक्षण को लेकर मराठों से नाइंसाफी नहीं होनी चाहिए।
बुधवार को जालना जिले में अपने गांव से मार्च शुरू करने वाले जरांगे सैकड़ों वाहनों के काफिले के साथ सुबह मुंबई पहुंचे और वाशी में समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। इसके बाद वह आजाद मैदान के लिए रवाना हो गए।
जालना पुलिस ने जरांगे और उनके समर्थकों को 40 शर्तों के साथ मार्च की अनुमति दी थी। इन शर्तों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना, यातायात में बाधा न डालना और आपत्तिजनक नारेबाजी नहीं करना शामिल है।
मुंबई पुलिस ने जरांगे को 29 अगस्त को सुबह नौ बजे से शाम छह बजे तक आजाद मैदान में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की अनुमति दी है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि शाम छह बजे के बाद सभी प्रदर्शनकारियों को वहां से जाना होगा।
इसके अलावा, पुलिस ने यह शर्त भी रखी है कि केवल पांच वाहन ही आजाद मैदान में प्रवेश कर सकेंगे और प्रदर्शनकारियों की संख्या 5,000 से अधिक नहीं होनी चाहिए।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि जरांगे के आंदोलन को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुंबई पुलिस के 1,500 से अधिक जवानों को आजाद मैदान में तैनात किया गया है।
रेलवे पुलिस ने बताया कि छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है, जहां महाराष्ट्र के दूरदराज इलाकों से आरक्षण आंदोलन के समर्थक पहुंच रहे हैं।
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