मप्र सरकार ने की महिला हॉकी खिलाड़ियों की म&#

Last Updated 22 Jan 2010 09:03:50 AM IST


नयी दिल्ली/भोपाल। वेतन और बकाया राशि के भुगतान के लिए राष्ट्रीय पुरुष हॉकी खिलाड़ियों के बाद अब महिला हॉकी टीम की खिलाड़ियों ने भी हॉकी इंडिया (एचआई) के खिलाफ मुहिम छेड़ दी है। खिलाड़ियों ने एचआई द्वारा प्रति व्यक्ति 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद की पेशकश को भी ठुकरा दिया है। उनका कहना है कि उन्हें तीन लाख रुपये से कम कीमत की कोई पेशकश मंजूर नहीं। इस बीच, मध्य प्रदेश सरकार खिलाड़ियों के हित में आगे आई है। एचआई की कार्यकारी अध्यक्ष विद्या स्टोक्स ने बताया कि एचआई ने खेल मंत्रालय से एशिया कप में रजत पदक जीतने के बदले महिला खिलाड़ियों को प्रति व्यक्ति एक लाख रुपये का पुरस्कार देने का अनुरोध किया है। भोपाल स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र में चल रहे अभ्यास शिविर में हिस्सा ले रही महिला खिलाड़ी एचआई के इस प्रस्ताव से खुश नहीं हैं। खिलाड़ियों ने कहा है कि उन्हें एक तो काफी देरी से पुरस्कार देने की बात की जा रही है और इसकी राशि भी काफी कम है। अपनी मांगें रखने के बाद खिलाड़ियों ने गुरुवार को शिविर में काली पट्टी बांधकर अभ्यास किया। टीम की कप्तान सुरिंदर कौर ने बताया कि हमें 50 हजार रुपये की मदद मंजूर नहीं। पिछले वर्ष हमारा प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा था और हम तीन लाख रुपये से कम कीमत पर हरगिज नहीं मानेंगी। हमने पिछले वर्ष से अब तक एक बार भी कोई भुगतान नहीं हुआ है जबकि पुरुष टीम को पिछले वर्ष के बदले प्रति व्यक्ति 4.5 लाख रुपये दिए जा चुके हैं। सुरिंदर ने कहा कि उनकी साथी अपना शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगी। उन्होंने कहा कि हम अपना शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखेंगी। हम राष्ट्रीय शिविर का बहिष्कार नहीं करेंगी। अपनी मांगों को लेकर हमारा प्रयास और तैयारियां साथ-साथ जारी रहेंगी। पूर्व कप्तान ममता खरब ने कहा कि अगर पुरुष खिलाड़ियों को ग्रेडेड पेमेंट किया जाता है तो महिलाओं को भी इसके तहत भुगतान किया जाना चाहिए। जितनी राशि पुरुष टीम को मिलेगी, हमें भी उतनी ही मिलनी चाहिए। वैसे भी हमारा प्रदर्शन पुरुष टीम से काफी बढ़िया रहा है। पूर्व अध्यक्ष अशोक कुमार मट्टू ने हमें इसका आश्वासन दिया था लेकिन हमें अपना हक नहीं मिला। हमें अपने देश से प्यार है और यही कारण है कि हम शिविर जारी रखते हुए अपना विरोध जता रही हैं। महिला खिलाड़ियों का आरोप है कि पुरुष और महिला खिलाड़ियों के साथ हॉकी इंडिया भेदभाव कर रही है। हड़ताल करने वाले पुरुष खिलाड़ियों को बकाया राशि का भुगतान कर दिया गया है, मगर जब उन्होंने बकाया के भुगतान की मांग की तो हॉकी इंडिया ने अपनी माली हालत का जिक्र कर भुगतान करने में असमर्थता जता दी। इस बीच, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महिला हॉकी टीम के खिलाड़ियों की मदद की पेशकश की है। उन्होंने कहा है कि भारतीय हॉकी का स्तर बनाए रखने के लिए उनकी सरकार हर तरह की मदद देने को तैयार है। चौहान ने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा कि पहले पुरुष हॉकी टीम ने विरोध जताया और अब महिला हॉकी खिलाड़ियों को काली पटटी बांधना पड़ी है, मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि केंद्र सरकार का खेल विभाग और हॉकी इंडिया क्या कर रहा है। हॉकी हमारा राष्ट्रीय खेल है, हमारी शान है। हॉकी इस देश में किसी भी कीमत पर मरने नहीं दी जा सकती। देश की पुरूष अथवा महिला हॉकी टीम हो, हम उसके प्रशिक्षण, वेतन भत्तों अथवा अन्य जरूरतों का पूरा खर्च उठाने को तैयार हैं। उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार के खेल विभाग, ऑलंपिक संघ और हाकी इंडिया को हॉकी जीवित रखने और आगे बढ़ाने के लिए प्रयास करना चाहिए। गौरतलब है कि राष्ट्रमंडल खेल सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्पर्धाओं की तैयारी के लिए साई के भोपाल स्थित केंद्र में महिला टीम का प्रशिक्षण शिविर चल रहा है। इसमें 39 खिलाड़ी भाग ले रही हैं। इन सभी खिलाड़ियों ने गुरुवार से हाथ पर काली पट्टी बांधकर अभ्यास करना आरंभ कर दिया। उनका कहना है कि यह सिलसिला तब तक जारी रहेगा जब तक कि उनका भुगतान नहीं कर दिया जाता।



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