किंग चार्ल्स की हुई ताजपोशी, भारत के लिए गहरा लगाव रखने वाला महाराजा
लंदन में चार्ल्स तृतीय के भव्य राज्याभिषेक समारोह में उनके दृष्टिकोण की व्यापक झलक देखने को मिल रही है, जिसमें अधिक टिकाऊ जीवन-शैली अपनाने की अहमियत, सभी धर्मो का सम्मान और भारत के लिए गहरा प्रेम शामिल है।
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74 वर्षीय चार्ल्स पिछले साल सितंबर में अपनी मां महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के निधन के बाद ही ब्रिटेन के नए महाराजा बन गए थे।
राज्याभिषेक समारोह में सिख समुदाय का प्रतिनिधित्व कर रहे भारतीय मूल के सांसद लॉर्ड इंदरजीत सिंह ने कहा, ‘‘जब चार्ल्स वेल्स के राजकुमार थे, तब मेरी उनसे कई बार मुलाकात हुई थी और हमने कई विषयों पर खुलकर बात की थी।
इस दौरान उन्होंने बार-बार दोहराया कि अलग-अलग धर्म एक ही सीख देते हैं और उनका मकसद समाज को अच्छाई की तरफ ले जाना है।’’ चार्ल्स का सभी धर्मो का सम्मान करने वाला दृष्टिकोण भारत और उसकी सदियों पुरानी योग एवं आयुव्रेद जैसी पद्धतियों के प्रति उनके गहरे लगाव से भी परिलक्षित होता है। प्रिंस ऑफ वेल्स के रूप में चार्ल्स पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों के मुखर समर्थक भी थे। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से होने वाले विनाश के खिलाफ लगातार आवाज उठाई।
चार्ल्स ने वैश्विक जलवायु कार्रवाई लक्ष्यों की प्राप्ति में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी लगातार बात की। चार्ल्स ने 2021 में भारत में कोविड-19 के प्रकोप से निपटने के लिए एक आपातकालीन कोष की शुरुआत करते समय देश के प्रति ‘अपने गहरे लगाव’ का जिक्र किया था।
उन्होंने महामारी के प्रकोप के दौरान भारत के लिए करोड़ों डॉलर का चंदा जुटाने में मदद की थी। चार्ल्स ने तब कहा था, ‘‘कई अन्य लोगों की तरह मेरे मन में भी भारत के लिए बहुत प्यार है और मैंने देश की कई शानदार यात्राओं का भरपूर आनंद लिया है।
इस अत्यंत मुश्किल समय में भारत को अन्य देशों की मदद की जरूरत है। जिस तरह भारत ने दूसरों की मदद की है, उसी तरह अब हमें भारत की मदद करनी चाहिए।’’ कोविड-19 महामारी के दौरान चार्ल्स को योग के चिकित्सकीय और नैदानिक प्रभावों का एहसास हुआ था।
मई 2021 में आयोजित वचरुअल स्वास्थ्य सम्मेलन ‘वेलनेस आफ्टर कोविड’ में उन्होंने योग को एक ऐसा ‘सुलभ अभ्यास’ करार दिया था, जो तनाव से निपटने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने और शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने में खासा मददगार साबित हो सकता है। चौदह नवंबर 1948 को चार्ल्स फिलिप आर्थर जॉर्ज के रूप में जन्मे महाराजा चार्ल्स तृतीय पिछले साल आठ सितंबर को महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के निधन पर ब्रिटिश राजगद्दी पर काबिज होने वाले सबसे उम्रदराज शाही सदस्य बन गए थे।
कई बार भारत आ चुके हैं चार्ल्स
पिछले कुछ दशकों में ब्रिटिश सिंहासन के उत्तराधिकारी के तौर पर चार्ल्स ने भारत की कई यात्राएं कीं। इस दौरान उन्होंने ‘ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट’ के माध्यम से भारत में कई धर्मार्थ कार्य किए। चार्ल्स ने दक्षिण एशिया में गरीबी और अन्य समस्याओं से निपटने के लिए 2007 में ‘ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट’ की स्थापना की थी। चार्ल्स आखिरी बार नवंबर 2019 में भारत आए थे। इस दौरान उन्होंने मुंबई में स्कूली छात्र-छात्राओं के साथ अपना 71वां जन्मदिन मनाया था। इस हफ्ते की शुरुआत में आयोजित राज्याभिषेक पूर्व भोज में चार्ल्स ने भारतीय मूल के सांसद लॉर्ड करण बिलिमोरिया से कहा था कि वह जल्द भारत का आधिकारिक दौरा करने को लेकर उत्सुक हैं।
किंग चार्ल्स ने ली शपथ
► मैं शपथ लेता हूं कि मैं योर मेजेस्टी, उनके उत्तराधिकारी और कानून के प्रति सच्ची निष्ठा रखूंगा।
कैसे हुई चार्ल्स-III की ताजपोशी
- क्वीन कैमिला ने नहीं पहना कोहिनूर जड़ा मुकुट
- ब्रिटेन को 70 साल बाद मिला राजा। किंग जॉर्ज तृतीय और क्वीन कैमिला की ताजपोशी लंदन के शाही गिरजाघर वेस्टमिंस्टर एबे में हुई
- आर्चबिशप ने चार्ल्स तृतीय का किंग के रूप में सबसे कराया परिचय। उसके बाद उन्हें किंग बनाए जाने की घोषणा की। चाल्र्स ने बाइबिल पर हाथ रखकर शपथ ली
- आर्चबिशप ने राजा को पहनाया 360 पुराना साल पुराना ताज
- करीब 80 मिनट चली ताजपोशी की रस्में
- आर्चबिशप ने किंग को न्याय के लिए शॉपी तलवार
- ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने किंग की शपथ के बाद बाइबल का पाठ किया
- नए राजा के सम्मान में अलग-अलग 13 जगहों पर दी गई 21 तोपों की सलामी
- लगभग 200 देशों से आए 2000 अतिथि बने ऐतिहासिक पल के गवाह
- भारत की ओर से नुमाइंदगी की उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने
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