Delhi : आदेश का क्या, गर्मी से परेशान मजदूर किससे करेंगे शिकायत

Last Updated 30 May 2024 10:55:29 AM IST

दिल्ली के विकास में मजदूरों की अहम भूमिका है। अगर मजदूर न हो तो न ही मेट्रो ट्रेन दौड़ेगी और न ही गगनचुंबी इमारते बनेंगी। इसके बावजूद इन मजूदरों के बारे में सोचने वाला कोई नही है।


दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना

आसमान में बरसते आग के बीच दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने राष्ट्रीय राजधानी में भीषण गर्मी के मद्देनजर बुधवार को निर्माण स्थलों पर कार्यरत मजदूरों को दोपहर 12 बजे से अपराह्न तीन बजे तक वेतन समेत अवकाश देने तथा नारियल पानी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इसके अलावा उपराज्यपाल ने सभी बस स्टैंड में पानी के घड़े रखने के भी निर्देश दिए ताकि यात्रियों को पेयजल की समस्या न हो।

उपराज्यपाल के इस आदेश को लेकर दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत निर्माण मजदूर यूनियनों का ज्वाइंट फोरम निर्माण मजूदर अधिकार अभियान (नमा/यह 40 यूनियनों का संगठन है) के संयोजक थानेर दयाल आदिगौड़ ने बताया कि दिल्ली में 17.5 लाख मजदूरों ने रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है, जिसमें से रजिस्टड्र मजदूरों की संख्या 12 लाख है। इसमें एक लाख मजदूरों का रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण हो रखा है।

ऐसे में देखा जाए तो उपराज्यपाल के आदेश का फायदा एक लाख मजूदरों को ही होगा, लेकिन इसमें सबसे बड़ी कमी यह है कि इसे इम्पलिमेंट कौन करवाएगा। क्योंकि किसी को नोडल अधिकारी नियुक्त नहीं किया गया है और न ही कोई हेल्पलाइन नम्बर ही जारी किया गया है। जिसपर ठेकेदार निर्माण स्थल पर समुचित पानी और नारियल पानी की व्यवस्था नहीं करता है तो वह शिकायत कर सके। एक और समस्या आयेगी कि छोटे ठेकेदार किसी भी कीमत पर तीन घंटे की छूट्टी नहीं देंगे। न ही नारिलय पानी पीने को मजदूरों को देंगे।

उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यदि कोई मजूदर ज्यादा कानून बताएगा तो हो सकता है कि ठेकेदार उसे काम से ही हटा दे। ऐसे में सरकार को चाहिए कि इस आदेश को लागू करवाने के लिए समुचित नोडल अधिकारी को नियुक्त करे और दोपहर 12 से तीन बजे के बीच निर्माण स्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा ले अन्यथा यह आदेश सिर्फ कागजों में रह जाएगा।

उन्होंने बताया कि इससे पहले आठ मई को ही दिल्ली सरकार के श्रम विभाग के अतिरिक्त श्रमायुक्त एससी यादव ने सकरुलर जारी कर कहा था कि निर्माण स्थल पर पानी की व्यस्था करने के अलावा कूलर और पंखे की व्यवस्था होना चाहिए।

इमरेजेंसी किट की व्यस्था करने को कहा गया है, जिसमें बर्फ पैक और ओआरएस होना चाहिए। इसके अलावा सकरुलर में यह भी कहा गया कि किसी भी कर्मचारी को सीधे तेज धूप में काम करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए तथा दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे के बीच के व्यस्ततम समय से बचने के लिए जहां तक संभव हो काम की पाली में परिवर्तन करने की सलाह दी जाती है।

समय लाइव डेस्क
नई दिल्ली


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