Monsoon Session: हंगामे के कारण लगातार चौथे दिन नहीं हो सका कामकाज, संसद की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित

Last Updated 24 Jul 2025 03:06:39 PM IST

संसद के मानसून सत्र का आज यानी गुरुवार 24 जुलाई को चौथा दिन है। सत्र का पहला तीन दिन यूं ही बर्बाद हो चुका है। विपक्षी दलों की ओर से विभिन्‍न मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।


विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में कोई कार्यवाही नहीं हो सकी। विपक्षी सांसदों ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वापस लेने की मांग की और "श्रीमान वापस लो" जैसे नारे लगाए ।

लोकसभा में विपक्षी दलों के सदस्यों ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर गुरूवार को हंगामा किया, जिसके कारण सदन की कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।

मानसून सत्र के चौथे दिन सदन की कार्यवाही आरंभ होते ही विपक्षी दलों के सदस्य हंगामा करने लगे। विपक्षी सांसदों ने आसन के निकट पहुंचकर नारेबाजी की और तख्तियां लहराईं, जिन पर एसआईआर विरोधी नारे लिखे हुए थे।

उन्होंने बिहार में एसआईआर की कवायद पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए हंगामा किया। हालांकि, सदन में शोर-शराबे के बीच ही पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने प्रश्नकाल के दौरान कुछ पूरक प्रश्नों के उत्तर दिए।

वहीं, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आसन के समीप शोर-शराबा कर रहे विपक्षी सदस्यों से अपने स्थान पर जाने और सदन चलने देने की अपील की।

उन्होंने कहा, ‘‘आपसे पहले भी कहा गया है कि प्रश्नकाल महत्वपूर्ण समय होता है। इसमें जनता के महत्वपूर्ण सवाल होते हैं और सरकार की जवाबदेही होती है...कई सांसदों ने कहा है कि प्रश्नकाल के दौरान उनके प्रश्न मुश्किल से आ पाते हैं और आप लोग नारेबाजी करते हैं।’’

बिरला ने कांग्रेस का नाम लिए बिना कहा कि इतने पुराने राजनीतिक दल के लोग जिस तरह का व्यवहार कर रहे हैं, इसे पूरा देश देख रहा है।

हंगामा नहीं थमने पर उन्होंने पूर्वाह्न करीब 11 बजकर सात मिनट पर सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे पुन: शुरू होने पर विधि और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विपक्षी सदस्यों से ‘गोवा राज्य विधानसभा के निर्वाचन क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व का समायोजन विधेयक, 2024’ पर चर्चा में भाग लेने की अपील की।

मेघवाल ने कहा, ‘‘यह अनुसूचित जनजाति (एसटी) के हितों से संबंधित विधेयक है। गोवा विधानसभा में एसटी को प्रतिनिधित्व मिले, इसके लिए यह विधेयक लाया गया है। लेकिन विपक्ष साथ नहीं दे रहा और वे शोरगुल कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि विपक्षी सदस्य एसटी के हित में भी साथ नहीं देना चाहते।

सदन में विपक्षी दलों के कुछ सदस्यों के तख्तियां लहराने को लेकर पीठासीन सभापति कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने कहा कि कल (बुधवार को) भी गोवा के एसटी विधेयक को चर्चा के लिए सदन की कार्यसूची में लिया गया था, लेकिन आपने इसे आगे नहीं बढ़ने दिया। उन्होंने कहा, ‘‘जब तक आप तख्तियां दिखाएंगे, सदन की कार्यवाही नहीं चलेगी। इस तरह से तख्तियां दिखाना सदन के नियमों के विरूद्ध है।’’

पीठासीन सभापति ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और आप सदन में ऐसा कर उदाहरण स्थापित कर रहे हैं।

तेन्नेटी ने यह भी कहा, ‘‘कुछ विषयों पर कार्य स्थगन प्रस्ताव की सूचना प्राप्त हुई है। लोकसभा अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव की किसी भी सूचना के लिए अनुमति प्रदान नहीं की है। हालांकि, जो अनुरोध पहले प्राप्त हुए थे उन पर विचार किया गया है और यह कहा जा चुका है उन पर उपयुक्त समय पर चर्चा होगी।’’

हंगामा नहीं थमने पर उन्होंने कुछ मिनट बाद ही सदन की कार्यवाही शुक्रवार पूर्वाह्न 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
 

विपक्ष के हंगामे के कारण नहीं चल पायी राज्यसभा की बैठक, लगातार चार दिन से गतिरोध कायम
राज्यसभा में बृहस्पतिवार को बिहार में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) किए जाने के मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के कारण बैठक लगातार चौथे दिन बाधित रही और एक बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजकर पंद्रह मिनट पर कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया।

विपक्ष के हंगामे के कारण आज भी प्रश्नकाल नहीं चल पाया। शून्यकाल में आज छह सदस्यों को विदाई दी गयी जिनका कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है।


छह सदस्यों को विदाई देने के तुरंत बाद विपक्षी सदस्यों ने नियम 267 के तहत दिए गए अपने 30 नोटिस उपसभापति हरिवंश द्वारा अस्वीकार किए जाने के विरोध में हंगामा शुरू कर दिया, जिसके चलते 12 बज कर तीस मिनट पर सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

सदन की बैठक शुरू होने पर उपसभापति हरिवंश ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। इसके बाद उन्होंने बताया कि उन्हें नियम 267 के तहत, नियत कामकाज स्थगित कर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए 30 नोटिस मिले हैं।

उपसभापति ने बताया कि सुखेंदु शेखर राय, रीताव्रता बनर्जी, मौसम नूर, जे सी चंद्र शेखर, मोहम्मद नदीमुल हक, रंजीत रंजन, जे बी माथेर हीशम, नीरज डांगी, संजय सिंह, महुआ मांझी, सैयद नासिर हुसैन, तिरुचि शिवा, जॉन ब्रिटास, सुष्मिता देव, मनोज कुमार झा, डॉ डी शिवादासन ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर चर्चा के लिए नोटिस दिए हैं।

हरिवंश ने बताया कि आईयूएमएल के पी वी अब्दुल वहाब ने राज्यसभा के सभापति के अचानक इस्तीफे के मुद्दे पर, इसी पार्टी के बी के हरीस बीरन ने केरल में मानव पशु संघर्ष के मुद्दे पर तथा आम आदमी पार्टी के संदीप पाठक ने साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के मुद्दे पर चर्चा के लिए नोटिस दिए हैं।

उपसभापति ने कहा कि पूर्व की व्यवस्था के आलोक में ये नोटिस उपयुक्त नहीं पाए गए और इन्हें अस्वीकार कर दिया गया। इस पर विपक्षी सदस्यों ने विरोध जताया। हालांकि, हरिवंश ने उन्हें समझाकर सदन को छह सेवानिवृत्त सदस्यों को विदाई देने की प्रक्रिया शांतिपूर्वक पूरी करने की अपील की। इस पर विपक्षी सदस्य शांत हो गए।

उपसभापति हरिवंश, सदन के नेता जे पी नड्डा और विभिन्न दलों के वरिष्ठ सदस्यों ने सेवानिवृत्त हो रहे सदस्यों के योगदान को लोकतांत्रिक परंपराओं को सशक्त करने की दिशा में सराहनीय बताया।

जिन सदस्यों को विदाई दी गई, उनमें एम मोहम्मद अब्दुल्ला (द्रमुक), एन चंद्रशेखरन (अन्नाद्रमुक), अन्बुमणि रामदास (पीएमके), एम षणमुगम (द्रमुक) और एम वाइको (एमडीएमके) शामिल हैं। अन्नाद्रमुक सदस्य पी विल्सन का कार्यकाल भी समाप्त हुआ है लेकिन वह उच्च सदन के लिए पुन:निर्वाचित हो गए हैं।

इन सदस्यों के लिए विदाई भाषण प्रश्नकाल के दौरान भी जारी रहा जो दोपहर 12 बजे शुरू होता है। जब लगभग 12.30 बजे विदायी भाषण समाप्त हुए, तब उपसभापति ने प्रश्नकाल शुरू करने को कहा। लेकिन विपक्षी सदस्यों ने अपने अपने मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया।

हरिवंश ने सदस्यों से शांत रहने की अपील करते हुए कहा कि कुछ देर पहले तक कार्यवाही अच्छे से चल रही थी। सदन में व्यवस्था बनते न देख उन्होंने 12 बज कर तीस मिनट पर बैठक को दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

इससे पहले राज्यसभा के लिए मनोनीत सदस्य उज्ज्वल देवराव निकम ने शपथ ली।

दोपहर दो बजे बैठक शुरू होने पर पीठासीन अध्यक्ष भुवनेश्वर कालिता ने समुद्र द्वारा मालवहन विधेयक, 2025 पर चर्चा शुरू करवायी। इस विधेयक को पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कल चर्चा एवं पारित करने के लिए उच्च सदन में रखा था।

विपक्ष के कई सदस्यों के हंगामे के बीच अन्नाद्रमुक के एम थंबी दुरै और तेलुगु देशम पार्टी के अयोध्या रामी रेड्डी ने चर्चा में भाग लिया। किंतु हंगामे और शोरगुल के कारण इन सदस्यों की बात नहीं समझी जा सकी।

रेड्डी जब चर्चा में भाग ले रहे थे तो विपक्ष के कई सदस्य उनके पास आकर नारेबाजी करने लगे। इस पर भाजपा के लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए इस नारेबाजी को बंद करवाने के लिए पीठासीन अध्यक्ष से कहा। इसके बाद कांग्रेस के उप नेता प्रमोद तिवारी ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष कुछ बोलना चाहते हैं और आसन की ओर से उन्हें इसकी अनुमति दी जानी चाहिए।

इस पर पीठासीन अध्यक्ष ने कहा कि चूंकि सदन में एक विधेयक पर चर्चा चल रही है, इसलिए वे केवल उससे जुड़़े व्यवस्था के प्रश्न पर विचार करेंगे। इसके बाद उन्होंने दोपहर करीब सवा दो बजे बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया।

गौरतलब है कि 21 जुलाई को शुरू हुए संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन से उच्च सदन में विपक्ष के हंगामे के कारण गतिरोध कायम है।
 

भाषा
नई दिल्ली


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