ध्यान

Last Updated 25 Aug 2020 01:18:10 AM IST

अध्यात्म कभी तनावपूर्ण नहीं होता, अध्यात्म कभी भी तनावपूर्ण नहीं होता, ऐसा नहीं हो सकता।


आचार्य रजनीश ओशो

आध्यात्मिक तनाव होता ही नहीं, तनाव केवल शारीरिक होता है और मानसिक होता है। शारीरिक तनाव उन्होंने पैदा किए हैं, जिन्होंने धर्म के नाम पर सदैव ही शरीर-विरोधी उपदेश दिए हैं। पश्चिम में ईसाइयत स्पष्ट तौर पर शरीर के प्रति प्रबल विरोधी रही है। इन्होंने तुम्हारे और तुम्हारे शरीर के बीच एक झूठा अंतर और दरार पैदा की है, फिर तुम्हारा पूरा रवैया ही तनाव पैदा करने वाला बनता है। तुम तनाव रहित होकर भोजन नहीं कर सकते,  निश्चिन्तता से सो नहीं सकते, शरीर का प्रत्येक कृत्य तनाव बन जाता है।

शरीर शत्रु है, पर तुम इसके बिना जी नहीं सकते। तुम्हें इसके साथ ही रहना है, तुम्हें अपने शत्रु के साथ ही रहना है, इसलिए निरंतर तनाव है; तुम कभी रिलैक्स नहीं हो सकते। शरीर तुम्हारा शत्रु नहीं है, न ही वह किसी तरह तुम्हारा विरोधी है, यह तुम्हारे प्रति उपेक्षा से भी भरा नहीं है। शरीर के होने में ही आनंद है और जिस क्षण तुम शरीर को एक उपहार की तरह समझते हो-परमात्मा का उपहार, तब तुम शरीर में वापस लौटकर आ जाते हो। तब तुम इससे प्रेम करने लगोगे, तुम उसे महसूस करोगे-और उसे महसूस करने का ढंग बड़ा ही सूक्ष्म होता है।

तुम तब तक किसी अन्य के शरीर को अनुभव नहीं कर सकते, जब तक तुमने अपने स्वयं के शरीर का अनुभव नहीं किया। तुम किसी अन्य के शरीर को प्रेम भी नहीं कर सकते, जब तक तुमने अपने शरीर को ही प्रेम नहीं किया, यह असंभव है। तुम तब तक किसी अन्य के शरीर का ध्यान नहीं रख सकते, जब तक तुमने अपने शरीर का ध्यान नहीं रखा-और कोई भी ध्यान नहीं रखता। तुम कह सकते हो कि तुम रखते हो, पर मैं दृढ़तापूर्वक कहता हूं; कोई भी ध्यान नहीं रखता। अगर तुम ध्यान रखते हुए दिखते भी हो, तब भी तुम वास्तव में ध्यान नहीं रखते।

तुम किसी अन्य कारण से ध्यान रखते हो-दूसरों की राय के कारण, किसी अन्य की आंखों में तुम अच्छे दिख सको इसलिए। तुम अपने शरीर का ध्यान स्वयं के लिए नहीं रखते। तुम अपने शरीर को प्रेम नहीं करते, यदि तुम इससे प्रेम नहीं कर सकते, तुम इसमें हो भी नहीं सकते। अपने शरीर को प्रेम करो और तब तुम ऐसा विश्रांत अनुभव करोगे जैसा तुमने पहले नहीं किया होगा। जहां प्रेम है, वहां विश्रांति है। अगर तुम किसी अन्य को प्रेम करते हो-अगर तुम्हारे और उसके बीच प्रेम है, तो प्रेम अपने साथ विश्रांति का संगीत लाता है।



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