उत्तराखंड में बादल फटने और भूस्खलन के कारण पांच लोगों की मौत, 11 लापता
उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में शुक्रवार तड़के मूसलाधार बारिश से बादल फटने, बाढ़ आने और भूस्खलन की घटनाओं से मची तबाही में एक दंपति समेत छह लोगों की मौत हो गयी तथा 11 अन्य लापता हो गए जबकि कई अन्य लोगों के लापता होने की आशंका है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
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अधिकारियों ने बताया कि चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी और बागेश्वर जिलों में प्राकृतिक आपदा का सबसे अधिक कहर बरपा, जहां कई मकान और मवेशी मलबे में दब गए, कृषि भूमि बर्बाद हो गयी, अनेक वाहन बह गए तथा संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए।
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बागेश्वर जिले के कपकोट के पौसारी गांव में तड़के तीन बजे अतिवृष्टि के कारण पहाड़ी से मलबा आने से पांच-छह मकान क्षतिग्रस्त हो गए जिसके कारण दो महिलाओं की मौत हो गयी तथा तीन अन्य व्यक्ति लापता हो गए।
इस हादसे में मृतक महिलाओं की पहचान बसंती देवी जोशी तथा बचुली देवी के रूप में हुई है। लापता व्यक्तियों में बसंती देवी के पति रमेश चंद्र जोशी, गिरीश तथा पूरण जोशी शामिल हैं। घटना में बसंती देवी का पुत्र पवन घायल हुआ है।
एक अन्य घटना में चमोली जिले की थराली तहसील के देवाल क्षेत्र के मोपाटा गांव में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन की चपेट में आने से एक दंपति की मौत हो गयी जबकि एक अन्य दंपति घायल हो गया।
चमोली के जिलाधिकारी डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि मोपाटा में एक मकान और गोशाला भूस्खलन की चपेट में आ गए जिससे उसमें रह रहे तारा सिंह और उनकी पत्नी कमला देवी की मृत्यु हो गयी। उन्होंने बताया कि मलबे में दबे विक्रम सिंह और उनकी पत्नी को बाहर निकाल लिया गया लेकिन उन्हें चोटे आयी हैं।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार गोशाला में बंधे करीब 25 मवेशी भी मलबे में लापता हो गए।
अधिकारियों ने बताया कि रुद्रप्रयाग जिले के बसुकेदार तथा जखोली क्षेत्रों के छह गांवों में लगातार बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं ने भारी नुकसान पहुंचाया है।
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि जखोली में एक मकान ढहने से एक महिला की मृत्यु हो गयी। उन्होंने कहा कि जिले में तीन जगहों पर बादल फटे।
प्राधिकरण के अनुसार रुद्रप्रयाग जिले के आधा दर्जन गांवों-तालजामण, छेनागाड़, बड़ेथ, स्यूरं, किमाणा तथा अरखुंड में तड़के पौने चार बजे अतिवृष्टि से बरसाती नालों में भारी मात्रा में पानी और मलबा आने से कुछ मकान और गोशाला क्षतिग्रस्त हो गए।
जखोली में जान गंवाने वाली महिला की पहचान सरिता देवी के रूप में हुई है जबकि छेनागाड़ में चार श्रमिकों समेत आठ अन्य लापता हो गए।
प्राधिकरण के अनुसार, छेनागाड़ डुंगर गांव तथा जौला बड़ेथ गांवों में भी कुछ लोगों के लापता होने की सूचना है।
स्यूंर गांव में कुछ मकानों के क्षतिग्रस्त होने एवं वाहन के बह जाने, तालजामण में कुछ भवनों में दरारें पड़ने या धंसने, किमाणा में खेतों तथा सड़क पर बड़े-बड़े बोल्डर व मलबा आने, अरखुंड में एक तालाब एवं मुर्गी पालन केंद्र बहने की जानकारी मिली है।
बरसाती नालों में बाढ़ आने से 30 से 40 परिवार फंस गए थे और अब तक वहां से 200 व्यक्तियों को निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है।
सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह से बचावकर्मी फंसे हुए लोगों को सावधानी से रस्सियों का उपयोग करके वर्षा से उफनाई जलधाराओं को पार करने में मदद कर रहे हैं।
टिहरी जिले के बालगंगा क्षेत्र के गेंवाली गांव में भी अतिवृष्टि से काफी नुकसान हुआ। हालांकि, इसमें कोई जनहानि नहीं हुई।
प्राधिकरण के अनुसार, शुक्रवार तड़के तीन बजे अतिवृष्टि के दौरान गेंवाली बरसाती नाले में आयी बाढ़ के मलबे से निजी संपत्तियों को क्षति पहुंची। इसके अनुसार, गेंवाली गांव में दो मंदिर, दो छानियां और एक गोशाला, कृषि भूमि और गांव के संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए। मलबे में दो मवेशी भी दब गए जबकि एक पैदल पुलिया भी टूट गयी।
प्राधिकरण ने बताया कि प्रभावित स्थानों पर राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा प्रतिवादन बल, पुलिस तथा राजस्व विभाग की टीमों द्वारा लापता लोगों की खोजबीन, बचाव एवं राहत कार्य युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों से बातचीत कर बचाव एवं राहत कार्यों को त्वरित गति से कराने के निर्देश दिए तथा कहा कि प्रभावित लोगों को तुरंत बिना किसी देरी के सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।
धामी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपदा प्रबंधन की एक उच्च स्तरीय बैठक में स्पष्ट किया कि मानसून सीजन तक शासन और प्रशासन अलर्ट मोड पर रहे और जिलाधिकारियों द्वारा आपदा राहत कार्यों के लिए जो भी आवश्यक संसाधन और सुविधाएं अपेक्षित हों, तुरंत उपलब्ध करायी जाएं।
धामी ने अधिकारियों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि प्रभावित परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुसार शीघ्र मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।
लगातार बरिश से अलकनंदा और उसकी सहायक नदियों तथा मंदाकिनी नदी का जल स्तर लगातार बढ़ रहा है। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर धारीदेवी और रुद्रप्रयाग के बीच अलकनंदा नदी का पानी सड़क पर बहने लगा जिसके कारण उस पर वाहनों का आवागमन रोकना पड़ा।
पौड़ी की जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर मिनी गोवा बीच के पास सड़क पर पानी भरने के बाद वाहनों की आवाजाही रोक दी गयी और यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोक लिया गया। हालांकि, करीब दो घंटे बाद नदी का जलस्तर सामान्य होने के बाद मार्ग को खोल दिया गया।
भदौरिया ने बताया कि नदी का जलस्तर बढ़ने पर एहतियातन धारी देवी क्षेत्र की दुकानों तथा नदी के किनारे स्थित छह स्कूलों को तुरंत बंद करवा दिया गया।
नदियों के उफान पर होने के मद्देनजर पुलिस द्वारा नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क किया जा रहा है।
बारिश के कारण बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग भूस्खलन के कारण कई जगह बाधित है जिसे खोलने का प्रयास किया जा रहा है। यात्रियों से सड़क की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा पर निकलने तथा पुलिस और प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी नवीनतम सूचनाओं पर ध्यान देने का अनुरोध किया गया है।
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में उत्तराखंड के बागेश्वर, चमोली, देहरादून और रुद्रप्रयाग जिलों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का 'रेड अलर्ट' तथा चंपावत, हरिद्वार, पिथौरागढ़, उधमसिंह नगर और उत्तरकाशी जिलों के लिए बारिश का 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है।
इस मानसून सीजन में प्राकृतिक आपदाओं ने उत्तराखंड पर बहुत कहर बरपाया है। चमोली के थराली में 23 अगस्त को टूनरीगाड़ बरसाती नाले में अतिवृष्टि से आयी बाढ़ के मलबे से भारी नुकसान हुआ था जिसमें एक युवती की मृत्यु हो गयी थी और एक अन्य व्यक्ति लापता हो गया था। कई मकानों, दुकानों सहित तहसील कार्यालय में भी मलबा भर गया जबकि उपजिलाधिकारी का आवास भी क्षतिग्रस्त हो गया था।
इससे पहले, पांच अगस्त को उत्तरकाशी जिले के धराली में खीरगाड़ बरसाती नाले में आयी भीषण बाढ़ से बहुत तबाही हुई थी। इस आपदा में एक व्यक्ति की मृत्यु हो गयी थी जबकि 68 अन्य लापता हो गए थे।
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