वाराणसी में गंगा और वरुणा नदी के जलस्तर में फिर से वृद्धि होने की वजह से दोबारा बाढ़ ने दस्तक दे दी है।
 |
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, शुक्रवार को गंगा का जलस्तर अपने चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर को पार करते हुए 71.00 मीटर पर पहुंच गया है। वाराणसी में खतरे का निशान 71.262 मीटर पर है। इससे नागरिकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वाराणसी जिले के गंगा और वरुणा के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। गंगा के सारे घाट अभी भी जलमग्न है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के निचले घाट पानी में डूब जाने की वजह से शवदाह छतों और गलियों में किया जा रहा है। वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध ”गंगा आरती” सांकेतिक रूप से छत पर की जा रही है। रमना, सामने घाट, नगवा, कोनिया, हुकुलगंज आदि इलाकों में घरों में पानी घुस गया है।
नगवा के संगमपूरी निवासी रमेश सिंह ने कहा कि वह अपने मकान के दूसरे तल पर रह रहे हैं क्योंकि मकान की पहली मंजिल में पानी भरा हुआ है। उन्होंने बताया कि वह दो दिन से घर से बाहर नहीं निकले हैं। उन्होंने बताया कि आस-पास के रिश्तेदार और परिचित भोजन पहुंचा देते हैं तथा मच्छरों का प्रकोप काफी बढ़ गया है।
रमेश सिंह ने बताया कि बाढ़ का पानी दो दिन पहले दोबारा घरों में प्रवेश कर गया। उन्होंने बताया कि इससे पहले पानी भरने के बाद जब जलस्तर कम हुआ और हालात सामान्य हुए तब घरों की साफ सफाई लोगों ने कर ली थी लेकिन दोबारा पानी घरों में घुस गया। उन्होंने कहा कि मोहल्ले के बच्चों को पानी में से गुजर कर स्कूल जाना पड़ रहा है, क्योंकि गली में नाव चलाना भी संभव नहीं है।
रमना निवासी सम्पूर्णनानंद ने बताया कि बाढ़ खत्म होने के बाद किसानों ने अपने खेतोँ में सेम, बैगन इत्यादि के बीज लगाये थे, जो दोबारा पानी आने की वजह से खराब हो गए।
राजातलाब के उप जिलाधिकारी (एसडीएम) शांतनु कुमार सिंसवार ने बताया कि राजातालाब के कुछ क्षेत्रों में खेतोँ में पानी आ जाने से फसलों को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने बताया कि जगह जगह बाढ़ चौकियां सक्रिय हैं, परन्तु लोग वापस जा चुके हैं।
उन्होंने कहा ‘‘बाढ़ को लेकर सारी तैयारियां पूरी है। यदि लोग वापस बाढ़ चौकियों में आते हैं तो यहां पूरी तैयारियां है। बाढ़ चौकियों पर राहत सामग्री, दवाइयों सहित सभी जरुरत के समान उपलब्ध है तथा डॉक्टरों और नर्सों की टीम भी उपलब्ध है।’’
| | |
 |