पूर्वी उत्तर प्रदेश में बीजेपी को बढ़त दिला पाएंगे अमरमणि त्रिपाठी ?

Last Updated 28 Aug 2023 04:05:44 PM IST

आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में कुछ न कुछ बदलाव देखने को मिल रहे हैं। कुछ न कुछ ऐसी घटनाएं हो रही हैं जिन्हें राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। कवियित्री मधुमिता शुक्ला हत्या कांड के आरोपी पूर्व विधायक अमरमणि त्रिपाठी का जेल से बाहर आना भी किसी न किसी राजनीति का हिस्सा माना जा रहा है।


Amarmani Tripathi

जबकि मायावती के स्टैंड को लेकर अभी भी दुविधा की स्थिति बनी हुई है। फिलहाल सबसे ज्यादा  चर्चा अमरमणि त्रिपाठी को लेकर हो रही है। यह सबको पता है कि, जिस पार्टी या जिस गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में बढ़िया प्रदर्शन कर दिया उसके लिए दिल्ली की सत्ता पर काबिज होना ज्यादा आसान हो जाता है। आज उत्तर प्रदेश में सबकी जुबान पर एक ही सवाल है कि अमरमणि  त्रिपाठी का जेल से बाहर आना किसके लिए फायदेमंद साबित होने वाला है। जबकि सबको शायद यह भी पता है कि उत्तर प्रदेश सरकार की रहमो करम से ही अमरमणि जेल से बाहर आएं हैं। उत्तर प्रदेश में हालाँकि बहुद हद तक बीजेपी ने जातीय समीकरणों को तोड़ने में सफलता अर्जित कर ली है। कभी यादव और मुस्लिम समीकरण के आधार पर उत्तर प्रदेश में सत्ता पर काबिज होती रहने वाली समाजवादी पार्टी का वह समीकरण भी आज बिखर चुका है।

दलित वोटरों के बलबूते यु पी की सत्ता पर कई बार काबिज हो चुकीं मायावती का दलित वोटर भी अब पूरी तरह से उनके साथ नहीं है। पिछले कुछ चुनावों को देखें तो दलित वोटरों के बीच बीजेपी ने सेंध लगा ली है। कुल मिलाकर लोकसभा 2014,यूपी विधानसभा 2017, 2022 और लोकसभा 2019 के चुनाव में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की सभी जातियों के बीच अपनी पकड़ बना ली थी। जहाँ तक मुस्लिम वोटरों की बात है तो मुस्लिम वोटर सपा और बसपा के बीच झूलता रहा। दोनों पार्टियां, यानि सपा और बसपा ने मुस्लिम वोटरों को अपने-अपने पाले में करने की  भरपूर कोशिश की, लेकिन मुस्लिम वोटर किसी के साथ भी एकमुश्त होकर नहीं जा पाया, जिसका फायदा बीजेपी को हुआ।

निसंदेह उत्तर प्रदेश में आज भाजपा सभी पार्टियों पर भारी है, बावजूद इसके भाजपा को ऐसा लगता है कि इस बार का चुनाव पहले के चुनावों से कठिन होने जा रहा है। कांग्रेस की सक्रियता से बीजेपी को संदेह है कि ब्राह्मण वोटर कांग्रेस के साथ जा सकता है। कुछ साल पहले जब कानपूर के विकास दुबे का एनकाउंटर हुआ था तब उत्तर प्रदेश के ब्राह्मण नाराज हो  गए थे। उनकी नाराजगी को दूर करने के लिए उत्तर प्रदेश के बड़े- बड़े ब्राह्मण चेहरों को लगाया गया था। हालाँकि ब्राह्मणों  की नाराजगी लगभग दूर हो गई थी, लेकिन आज भी कुछ ब्राह्मण नेता अन्य पार्टियों के साथ खड़े हैं।

बीजेपी ने शायद यही सोचकर अमरमणि त्रिपाठी को जेल से बाहर निकालकर यह सन्देश देने की कोशिश की है कि बीजेपी पूरी तरह से ब्राह्मणों के साथ है। अमरमणि त्रिपाठी का गोरखपुर के आस पास के जिलों में अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है। वैसे भी पूरब में बीजेपी के पास कोई बड़ा ब्राह्मण चेहरा नहीं है। माना जा रहा है कि अमरमणि के सहारे बीजेपी उत्तर प्रदेश के पूरब के जिलों में और अच्छा प्रदर्शन करने की कोशिशों में लग गई है। हालांकि इण्डिया गठबंधन के सभी दलों की अपने-अपने राज्यों में स्थिति भले ही अच्छी हों, लेकिन उत्तर प्रदेश में इण्डिया गठबंधन की कमान किसके हाथों में होगी अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। इण्डिया गठबंधन की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए बीजेपी पहले से ही ऐसी व्यवस्था करना चाहती है ताकि वो उत्तर प्रदेश में कुछ खास न कर पाए। फ़िलहाल बात अमरमणि त्रिपाठी की है।

जेल से बाहर आने के बाद भले ही उन्होंने और उनके बेटे अमनमणि त्रिपाठी ने कोई खुलासा न किया हो लेकिन यह तय माना जा रहा है कि वो बीजेपी के साथ ही जायेंगे। अमरमणि त्रिपाठी उत्तर प्रदेश की सभी पार्टियां ,मसलन कांग्रेस ,भाजपा ,बसपा और सपा के साथ रह चुके हैं। वो चार बार विधयक रह चुके हैं। एक बार वो जेल में रहते हुए चुनाव जीत गए थे। उत्तर प्रदेश की एक होनहार कवियित्री मधुमिता शुक्ला की हत्या के आरोप में उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी। मधुमिता शुक्ला की हत्या उनके लखनऊ आवास के अंदर गोली मरकर कर दी गई थी। उस हत्या में उनकी पत्नी भी आरोपी थीं। वो पिछले 20 सल से जेल में बंद थे। जेल से निकलने के बाद उनकी अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है, लेकिन यह तय है कि वो भाजपा के साथ ही जायेंगे, लेकिन यह देखना बड़ा दिलचस्प होगा कि वो भाजपा के लिए कितने फायदेमंद साबित होंगे।

 

शंकर जी विश्वकर्मा
नई दिल्ली


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