एलजी को अधिक अधिकार देने के संशोधित अधिनियम पर केन्द्र से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के उप राज्यपाल को अधिक अधिकार देने वाले संशोधित अधिनियम की संवैधानिक वैधता की पड़ताल करने का फैसला किया। साथ ही, दिल्ली सरकार की याचिका पर केंद्र से जवाब भी मांगा।
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दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के मार्फत दायर अपनी याचिका में दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) अधिनियम, 2021 के चार संशोधित अनुभागों और 1993 के जीएनसीटीडी नियमावली के कामकाज संबंधी 13 नियमों को इस आधार पर रद्द करने का आग्रह किया है कि वे संविधान के मूल ढांचे के सिद्धांत, शक्तियों के पृथ्क्करण के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं क्योंकि उप राज्यपाल को कहीं अधिक शक्तियां दे दी गई हैं।
चीफ जस्टिस एनवी रमण और जस्टिस एएस बोपन्ना तथा हिमा कोहली की बेंच ने केंद्र के वकील को चार हफ्तों के अंदर अपना जवाब दाखिल करने को कहा।
अदालत ने यह भी कहा कि तीन न्यायाधीशों की एक बेंच इस विवादित मुद्दे पर एक अन्य याचिका पर छह अप्रैल को सुनवाई करेगी कि दिल्ली में प्रशासनिक शक्तियों का नियंत्रण किसके हाथ में रहना चाहिए। यह विवाद 2019 में कोर्ट के एक फैसले से उत्पन्न हुआ था।
उल्लेखनीय है कि 14 फरवरी 2019 को जस्टिस एके सीकरी और अशोक भूषण (दोनों अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं) ने चीफ जस्टिस से सिफारिश की थी कि इसके बटे हुए फैसले के मद्देनजर दिल्ली में शक्तियों के नियंत्रण के मुद्दे पर अंतिम फैसला करने के लिए तीन न्यायाधीशों की एक बेंच गठित की जाए।
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