नयी दिल्ली। देश में आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी का मुद्दा अंतत: उच्चतम न्यायालय पहुंच गया है।
गृहणियों के संगठन हाऊसमेकर्स फ्रंट ने एक जनहित याचिका दायर कर केंद्र सरकार को कांडला पोर्ट में पड़ी आयातित चीनी के प्रसंस्करण और वितरण के लिए उसे चीनी मिलों तक पहुंचाने की तत्काल व्यवस्था करने का निर्देश देने की मांग की है।
फ्रंट की अध्यझ रितु पुरी के जरिये दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि केंद्र सरकार में मुद्रास्फीति पर नियंत्रण की राजनीतिक और प्रशासकीय इच्छाशक्ति का अभाव है।
एडवोकेट ऑन रिकार्ड डीके गर्ग के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि चीनी की कीमत 50 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है जबकि दालों, सब्जियों, खाद्यान्नों एवं अन्य आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। याचिकाकर्ताओं ने कीमतों में बढोतरी के लिए ऑनलाइन एवं वायदा कारोबार को भी जिम्मेदार ठहराया है।