नयी दिल्ली। किसी समय में भाजपा के सबसे बड़े मैनेजर बनने और आमचुनावों में हार के बाद विलेन कहलाए जाने के बाद नए नीतिन गडकरी अध्यक्ष को अपने दांव-पेचों में उलझाने में अरुण जेटली कामयाब हो गये हैं।
जेटली का यह नया रुप भाजपा के अंदर लिए गए कुछ अहम फैंसलों में उनके योगदान के बाद सामने आया। राजस्थान में वसुंधरा की बगावत को जेटली ने ही शांत किया,इस फॉर्मूले के साथ की महारानी दिल्ली आएंगी और प्रदेश में कमान उनकी पसंद का व्यक्ति संभालेगा। वहीं विद्युत दरों पर पंजाब भाजपा और अकालियों के बीच मचे घमासान को खत्म करने में भी जेटली की अहम भूमिका रही थी।
गडकरी पर जेटली का जादू इतना चला कि झारखंड में भाजपा कोटे के मंत्रियों को कुर्सी बांटने में जेटली की राय को ध्यान में रखा गया।
गौरतलब है कि लोससभा चुनाव में करारी हार के बाद जेटली के सितारे गर्दिश में चले गए थे। भाजपा के बड़े दिग्गजों ने जेटली की खबर ली थी। साथ ही संघ की नजर में भी ब्लैक लिस्ट हो गए,लेकिन संघ की पसंद के गडकरी ही दिल्ली में उन्हें सबसे भरोसेमंद मानकर चल रहे हैं।