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14 Jul 2020 10:35:58 AM IST
Last Updated : 14 Jul 2020 11:04:19 AM IST

वोकल फार लोकल के लिए कर्नाटक सरकार ने चलाया आंदोलन: वजूभाई

वोकल फार लोकल के लिए कर्नाटक सरकार ने चलाया आंदोलन: वजूभाई
कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई वाला के साथ सहारा न्यूज नेटवर्क के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं एडिटर इन चीफ उपेन्द्र राय।

कोरोना को लेकर उपजी ढेरों समस्याओं के बीच यदि कर्नाटक के लिए कोई बात थोड़ी राहत भरी है तो यह है कि यहां कई बड़े राज्यों के मुकाबले मृत्युदर लगभग आधी है।

इस महामारी से निपटने‚ उद्योगों और रोजगार को दोबारा पटरी पर लाने की चुनौती और पीएम मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'वोकल फार लोकल' अभियान को लेकर कर्नाटक सरकार की रणनीति पर राज्यपाल वजूभाई वाला से सहारा न्यूज नेटवर्क के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और एडिटर इन चीफ उपेन्द्र राय ने खास बातचीत की। प्रस्तुत है विस्तृत बातचीत–

कर्नाटक में किस तरह सरकार ने कोरोना संकट पर कंट्रोल कर रखा हैॽ उद्योग और कारोबार पर कितना असर पड़ा हैॽ

कर्नाटक पहले से ही औद्योगिक विकास का राज्य रहा है। उद्योग के अलावा यहां सूचना तकनीक का भी काफी विकास हुआ है। यहां किसी भी उद्योगपति को जमीन चाहिए तो उसे किसी भी तरह का अधिग्रहण करने की जरूरत नहीं होती है। सरकार के पास जो पहले से अधिग्रहीत जमीन है‚ उसे हम तुरंत दे देते हैं। यहां सूचना तकनीक के लिए बड़ी बड़ी बिल्डिंग हैं और 1 लाख स्क्वायर फुट का एक एक फ्लोर होता है। ऐसे में सूचना तकनीक में काम करने वालों को यहां जगह मिल जाती है। सरकार की ओर से भी जिन्हें जरूरत है‚ उन्हें इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित कर दिए जाते हैं। बिजली‚ पानी‚ ड्रेनेज सभी तरह की सुविधा मुहैया कराई जाती है।

सर पूरा देश जानता है कि कर्नाटक ने उद्योग और सूचना तकनीक के क्षेत्र में बहुत अच्छा काम किया है‚ लेकिन कोरोना के दौरान सरकार के राजस्व पर कितना असर पड़ा है और कितना नुकसान हुआ है। इस बारे में बताएंॽ

कोरोना के मामले में सरकार बहुत अच्छे से काम कर रही है। लोगों की मेडिकल जांच भी समय पर हो रही है। जो संक्रमित पाए जाते हैं‚ उन्हें तुरंत ही हॉस्पिटल में दाखिल किया जाता है। इलाज में कोई कोताही नहीं बरती जा रही है। आने वाले समय के लिए 10 हजार बेड की व्यवस्था भी की जा रही है। हमारे राज्य में कोरोना से मृत्यु दर भी बहुत कम है। राष्ट्रीय औसत तीन प्रतिशत है तो कर्नाटक में डेढ़ पर्संट से भी कम है। डाक्टर और नर्सिंग स्टाफ सब बहुत अच्छे हैं और पूरा सहयोग करते हैं।

लाकडाउन और अनलाक के बीच सरकारी गतिविधियां और औद्योगिक परिस्थितियां पहले जैसे हो पाई हैं या नहीं‚ क्योंकि कर्नाटक से भी मजदूरों का बहुत बड़े पैमाने पर पलायन हुआ है। अनलाक वन और अनलाक टू के बाद कामकाज पटरी पर लौट आया है या अभी भी लोग घर से ही काम कर रहे हैं। कैसी स्थिति हैॽ

यहां इंडस्ट्री शुरू हो गई है। हमारे पड़ोसी राज्य आंध्रप्रदेश‚ केरल और तमिलनाडु से मजदूर आकर काम कर रहे हैं। ट्रेडिंग भी चालू है। सरकारी दफ्तर एक तिहाई कर्मचारियों को बुलाकर खोल दिए गए हैं। जब सरकार कहती है कि लाकडाउन करने की जरूरत है तो हर संडे यहां लाकडाउन रहता है। पब्लिक भी पूरा सहयोग कर रही है। सरकार की ओर से भी उद्योग जगत‚ ट्रेडिंग करने वालों और पब्लिक को पूरा सपोर्ट मिल रहा है।

कारपोरेट और अंतरराष्ट्रीय परिस्थिति पर कोविड –19 का कितना असर हुआ है‚ क्योंकि कर्नाटक का व्यवसाय‚ खासकर सूचना तकनीक के क्षेत्र में‚ विदेशों में बहुत ज्यादा है। कर्नाटक में वोकल फार लोकल के लिए कितनी संभावना है। कर्नाटक सरकार इसके लिए किस दिशा में काम कर रही हैॽ

यहां लोकल के लिए सरकार ने आंदोलन भी कर दिया है। जहां तक आईटी का सवाल है तो यह एक तरह से एक्सपोर्ट कार्यक्रम है। हम यहां से विदेश में आईटी का निर्यात करते हैं। हालांकि आईटी सेक्टर भी काफी प्रभावित हुआ है‚ लेकिन अब शुरू हो गया है। विदेश में हम हार्डवेयर और साफ्टवेयर प्रोवाइड करते हैं। ये कार्यक्रम भी अच्छे से चल रहा है। यानी ट्रेडिंग‚ उद्योग व आईटी और अपने स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करना‚ जो प्रधानमंत्री ने कहा है‚ उसी के अनुसार कर्नाटक में काम चल रहा है। लोग भी उत्साहपूर्वक अपने माल का उपयोग करने के लिए आगे आ गए हैं‚ बिना किसी का विरोध करते हुए।
 
बेंगलुरु में साफ्टवेयर की कई बड़ी कंपनियां हैं। सुरक्षा उपकरण‚अति आधुनिक हेलीकाप्टर और एरोप्लेन भी यहां विकसित हो रहे हैं‚ इनका उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार क्या कर रही हैॽ कोरोना के संकट से निकलने के लिए सरकार किस तरह से अभियान चला रही हैॽ

देखिए यहां प्लेन और हेलीकाप्टर बनाने के लिए केन्द्र सरकार की जो फैक्टिरियां हैं‚ वो अच्छी तरह से काम कर रही हैं। कोरोना को हराने के लिए सरकार सभी तरह के काम कर रही है। आज तक हम कोरोना को मात देने में सफल हुए हैं और आगे भी सफल होंगे।

राज्य में भी आधुनिक रेलवे और एयरक्राफ्ट का प्रोडक्शन हो रहा है। क्या आपको लगता है कि प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत अभियान में कर्नाटक सबसे ज्यादा योगदान देगाॽ

केन्द्र सरकार ने अब तक जो भी कहा है‚ हमने उसमें पूरा सहयोग दिया है। देश में केन्द्र सरकार जो भी नीति तैयार करती है‚ उसमें कर्नाटक अव्वल रहता है। भविष्य में भी हम ऐसा करते रहेंगे।

आत्मनिर्भर भारत अभियान पर आपका क्या विचार है सर। आप सबसे लम्बे समय तक गुजरात में वित्त मंत्री रहे हैं‚ मेयर रहे हैं‚ स्पीकर रहे हैं। प्रधानमंत्री जी ने एक नया दर्शन दिया है आत्मनिर्भर भारत‚कर्नाटक इसमें कितना सहयोग देगाॽ

आत्मनिर्भर भारत के लिए हम कटिबद्ध हैं। ये विचार सबसे पहले परम पूज्य महात्मा गांधी ने दिया था। हमारे देश के लोग जो बनाते हैं‚ उन वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए। इनका उपयोग करने से हमारे देश के लोगों को रोजगार मिलेगा तो बेरोजगारी का भी तब निराकरण हो जाएगा। प्रधानमंत्री जी ने आत्मनिर्भरता की जो बात की है‚ उसको हम पूरी तरह से सहयोग देते रहेंगे। हम तो स्वयं इस विचार को मानने वाले हैं। हम अपने जीवन में देश की वस्तु का उपयोग करते हैं और सभी से करवाते भी हैं। हम अपने ग्रुप के लोगों को कहते हैं कि अपने देश की वस्तु का उपयोग करो। विदेशी वस्तु का मत करो इससे हमारे देश में लोगों को काम मिलेगा और देश बढ़ेगा। इसमें कर्नाटक सरकार और यहां के लोग भी सहयोग दे रहे हैं और भविष्य में भी देंगे।

कोरोना संकट के समय कर्नाटक सरकार शिक्षा‚ कृषि‚ रोजगार और किसानों के लिए किस तरह से काम करे‚ इस पर आपकी क्या राय है। आप राज्य के संवैधानिक प्रमुख हैं‚ आपने सरकार को क्या राय दी है कि कैसे काम करना चाहिएॽ

रोजगार के लिए तीन बात है। इसमें एक रोजगार सेल्फ एम्प्लाई सेक्टर होता है‚ जैसे सिलाई करने वाले‚ मिस्त्री का काम करने वाले लोहे का काम करने वाले छोटे छोटे सेक्टर‚ जिसे केन्द्र सरकार ने पूरी सहायता दी है। हम कर्नाटक के लोग इस सेक्टर का भरपूर उपयोग कर रहे हैं। दूसरी बात ट्रेडिंग की है। सेल्फ एम्प्लाइ सेक्टर और ट्रेडिंग दोनों आपस में मिलकर एक दूसरे की जरूरतें पूरी करें‚ इसके लिए हम ट्रेडिंग को भी बढ़ावा देने पर काम कर रहे हैं। तीसरा है इंडस्ट्री। अगर हम अपने देश में बने सामान का उपयोग करेंगे तो ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा। हमारे देश में मास प्रोडक्शन बाय मासेस ना कि मास प्रोडक्शन बाय मशीनरीज हो। ज्यादा लोग इसमें भागीदार होंगे तो सभी को रोजगार मिलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को वैश्विक स्तर पर बड़ी पहचान दिलाई है। हमारी धाक बनी है‚ लेकिन देश की अर्थव्यवस्था अभी उतना आगे नहीं बढ़ पाई है‚ इसको कैसे पटरी पर लाकर मजबूत बनाया जा सकता है। 5 ट्रिलियन इकोनॉमी को लेकर आपका क्या विजन है।

देश को चलाने के लिए हमारे हिन्दुस्तान में एक कहावत है‚ यथा राजा तथा प्रजा। जब राजा बलवान होगा तो प्रजा भी बलवान होगी। पूरी दुनिया को ये लगा कि हमारे देश के प्रधानमंत्री बहुत हिम्मतवाले हैं‚ जो ना कभी झुकते हैं और न ही किसी काम के लिए रुकते हैं। इसी सिद्धांत पर हमारे प्रधानमंत्री काम कर रहे हैं। इसी तरह‚ हमारे देशवासी भी ऐसे विचार के साथ काम करेंगे तो हमारा देश और मजबूती से आगे बढ़ेगा।

आपने सहकारिता आंदोलन से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। आज गुजरात ही नहीं देशभर में सहकारिता का मॉडल किसानों से दूर हो गया है। राजनीतिक दलों ने इस पर अपना कब्जा जमा लिया है। सहकारिता किसानों के हाथ में रहे‚ राजनीतिक नियंत्रण से इसे मुक्ति मिले‚ आप क्या सुझाव देंगेॽ

सहकारी क्षेत्र की जो संस्था होती है‚ वह डायरेक्टर‚ चेयरमैन पर आधारित रहती है। हमारे गुजरात में सहकारी क्षेत्र राजनीतिक आधार पर नहीं होती है। सहकारी क्षेत्र वाले राजनीति को चलाते हैं। सहकारी को राज्य सरकार की कोई जरूरत नहीं होती है। सहकारी क्षेत्र की छोटी–छोटी यूनिट भी आत्मनिर्भर होती है। यदि सहकारी क्षेत्र मजबूत होगा तो राज्य भी मजबूत होगा। अगर सरकार अपनी आमदनी सहकारी क्षेत्र को देने लगे तो वह आत्मनिर्भर नहीं होगा। सहकारी सिद्धांत के अनुसार खुद के दम पर आगे बढ़ना है। दूसरों की भी सहायता करें‚ यही सिद्धांत है और इसी को अपनाकर आगे चलने की जरूरत है।

गुजरात में श्रम‚ वित्त‚ आवास‚ परिवहन‚ राजस्व और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों के आप मंत्री रहे हैं। इस दौरान सबसे पसंदीदा मंत्रालय आपको कौन सा लगा और क्या–क्या महत्वपूर्ण योजना लागू कीॽ

हम सबसे ज्यादा वित्त मंत्रालय में रहे। सहकारी क्षेत्र‚ ऊर्जा‚ राजस्व‚ हाउसिंग सभी में हम रहे। हम जिसमें भी रहे‚ वहां नई बात की। हम जब ऊर्जा विभाग में थे तो मोदी जी मुख्यमंत्री थे। उन्होंने एक प्रण लिया था कि हम प्रत्येक गांव में प्रत्येक घर को बिजली देंगे। हमने फिर अभियान चलाकर हर गांव‚ हर घर को 24 घंटे बिजली मुहैया कराई। हमने रेवेन्यू विभाग में भी काफी सुधार किया। मैं वित्त मंत्री काफी समय तक रहा और 18 बार बजट पेश किया। इस दौरान हमने एक रुपए का भी टैक्स नहीं लगाया और न बढ़ाया। बिना टैक्स का हमारा बजट था और हमारी सरकार बिना टैक्स वाले बजट से अच्छी तरह से चलती थी।

आपने कहा कि हमने कोई टैक्स नहीं लगाया जबकि राज्य सरकार की आमदनी तो सेल्स टैक्स और अन्य तमाम टैक्स से होती है। आपके कहने का क्या अभिप्राय है?

दिन पर दिन जो कीमत में बढ़ोतरी होती है‚ उस बढ़ी हुई कीमत पर सरकार को भी उतना बढ़ा हुआ टैक्स मिलेगा। आज जिस चीज की कीमत 100 रुपए है‚ तीन साल बाद जब 150 रुपए कीमत होती है तो उसमें उतना बढ़ा टैक्स मिलेगा। हमारा जो प्रशासनिक खर्च था‚ हमने काफी कम कर दिया था। हमारी आमदनी बढी और हमारा खर्च भी कम हुआ। इसी कारण हमारा राज्य आत्मनिर्भर बना। हमने 12 साल में रिजर्व बैंक से कभी ओडी नहीं लिया। अपने बैलेंस से हम राज्य सरकार चलाते थे।

कहा जाता है कि गुजरात के विकास मॉडल की परिकल्पना आपकी ही थी‚ जिसे सर्वांगीण विकास की ओर मोदी जी के नेतृत्व में आप ले जा पाए।

मोदी जी ने गुजरात मॉडल पर बहुत काम किया है। उन्होंने उससे भी ज्यादा पूरे भारत में काम किया है। मैं कहूंगा गुजरात जिस तरह पूरे भारत में अच्छा राज्य बना‚ उसी तरह भारत भी पूरे विश्व में अच्छा बनकर रहेगा। मोदी जी पांच घंटे से ज्यादा नहीं सोते। 24 घंटे में 18–19 घंटे तक काम ही करते रहते हैं। मैं आपको उदाहरण दूंगा‚ अफसर की मीटिंग सुबह सात बजे नरेंद्र भाई के यहां शुरू हो जाती थी जब वह मुख्यमंत्री थे तब वह मीटिंग अलग–अलग अफसर से रात 9 बजे तक करते थे और हमेशा वह राज्य के लिए ही चिंतन करते थे।

आपने प्रधानमंत्री के साथ काम किया है। उनको बहुत करीब से देखा है। आपने अपनी सीट भी छोड़ी थी। आपने मोदी जी की प्रशासनिक खूबियों के बारे में बताया। व्यक्तिगत खूबियां उनकी कैसी हैं।

हमारी भारतीय संस्कृति में यही बात है कि जो राजा होता है‚ वह सभी लोगों का सभी तरह का ख्याल रखता है। उसके मन में दया होनी चाहिए‚ करुणा होनी चाहिए और हमारे नरेंद्र भाई के मन में दया भी है और करुणा भी। जो दुष्ट लोग हैं‚ उनको शिक्षा देना भी वह अच्छी तरह से जानते हैं।

आपके जीवनकाल में ही गुजरात की राजनीति बहुत बदल गई है। राज्य में जातीय गुट राजनीति में हावी होते चले गए‚ इसके पीछे क्या कारण रहे?

देखिए विरुद्ध पक्ष वालों की सभी योजनाओं को खत्म करना शासन पक्ष वाले का काम होता है। हम शासन अच्छी तरह से करें‚ आज भी उसी पर गुजरात में काम हो रहा है। नरेंद्र भाई और अमित शाह भाई ने स्लोगन दिया है कि अब इस देश में कांग्रेस की जरूरत नहीं है और उसको नष्ट कर देना चाहिए। वही हिसाब गुजरात में किया गया। जो कांग्रेस में अच्छे लोग थे‚ वह त्यागपत्र देकर बीजेपी में आ गए हैं। बीजेपी वाले उन्हें स्वीकार करते हैं। गुजरात से नरेंद्र भाई चले गए‚ उसके बाद भी दो बार चुनाव में जीत कर बीजेपी का शासन चल रहा है तो उसका एक ही कारण है अच्छे लोगों का उपयोग करना‚ चाहे वह विपक्ष के हों या निर्दलीय। गुजरात में न तो जातिवाद की बात है न ही माइनॉरिटी या मेजोरिटी की।

आपने अमित शाह का नाम लिया‚ गृह मंत्री के रूप में उन्होंने धारा 370 खत्म करने का साहसिक निर्णय लिया है। अमित शाह जी इतने दृढ़ प्रतिज्ञ कैसे हैं। वह सरदार पटेल को अपना आदर्श मानते हैं। काम भी उनकी तरह करते हैं। उनकी बचपन में निर्णय लेने की जो प्रतिज्ञा थी वह कैसी थी‚ उनके बारे में बताएं।

चाहे अमित भाई हों या हमारे गुजरात के मुख्यमंत्री विजय भाई रूपाणी। हम सब जब बाल्यावस्था से आरएसएस में जाया करते थे। तब हमारे मन में एक ही भावना थी कि इस राष्ट्र को सुंदर बनाना है। यह हमारी मातृभूमि है और मातृभूमि के लिए काम करते रहो। किसी से डरना नहीं‚ किसी को डराना नहीं और किसी की चापलूसी मत करना। चाहे नरेंद्र भाई हों या अमित भाई‚ सभी राष्ट्र के प्रति समर्पित हैं। आरएसएस का संस्कार हम सभी में है।

आपने अटल बिहारी वाजपेयी को अपना आइडियल माना है। क्या नई पीढ़ी के नेता अटल जी की राजनीति को आइडियल मान रहे हैंॽ

अटल बिहारी वाजपेयी जी में भी अपनी मातृभूमि की रक्षा करने की भावना थी। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी राष्ट्र को समर्पित कर दी। आज नरेंद्र भाई ने अपनी जिंदगी राष्ट्र को समर्पित कर दी है और वह हमारे लिए प्रेरणा स्रोत हैं। अटल जी ने कभी किसी की चापलूसी नहीं की। जिसने अच्छा काम किया‚ उसकी तारीफ की। जब बांग्लादेश स्वतंत्र हुआ‚ तब इंदिरा गांधी इस देश की प्रधानमंत्री थीं। अटल बिहारी वाजपेयी जी ने संसद में कहा था कि इंदिरा गांधी हिम्मत वाली हैं। नेहरू जी भी वाजपेयी जी पर विश्वास रखकर विदेश में उन्हें किसी भी बात की चर्चा करने के लिए भेजते थे।

आपके सपनों का भारत कैसा हो‚ उसके लिए आपके क्या विचार हैं?

मेरे सपनों का भारत सारे विश्व में भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाए। हम कभी राज्य की सीमा बढ़ाने की बात नहीं करेंगे। हम अपनी विचारधारा बढ़ाने की बात करेंगे। सारे विश्व को वसुधैव कुटुम्बकम‚ सारा विश्व हमारा परिवार है। सारे विश्व को हमने कहा कि सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत॥ सभी सुखी होवें‚ सभी रोगमुक्त रहें इसी सिद्धांत के साथ भारत की संस्कृति सारे विश्व में बताना चाहते हैं।


 

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