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29 Aug 2013 04:53:47 PM IST
Last Updated : 29 Aug 2013 05:59:40 PM IST

भूमि अधिग्रहण विधेयक आधा-अधूरा: बीजेपी

भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह (फाइल फोटो)

विपक्ष ने लोकसभा में भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास विधेयक को आधा अधूरा करार दिया जबकि सत्ता पक्ष ने कांतिकारी बताया.

कृषि योग्य भूमि का अधिग्रहण किसानों की अनुमति के बिना नहीं किए जाने का प्रावधान करने की पुरजोर मांग करते हुए विपक्ष ने गुरुवार को लोकसभा में सरकार द्वारा पेश किए गए भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास विधेयक को आधा अधूरा करार दिया जबकि सत्ता पक्ष ने इस विधेयक को कांतिकारी बताया.

ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश द्वारा पेश किए गए ‘‘भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन विधेयक 2011’’ पर चर्चा की शुरूआत करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार जल्दबाजी में एक ऐसा विधेयक लेकर आयी है जो कई मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है. उन्होंने कहा कि इस विधेयक से भू स्वामियों की समस्याएं कम होने के बजाय बढ़ेंगी.

राजनाथ सिंह ने कहा कि हिंदुस्तान में भू स्वामियों के लिए भूमि, जमीन का एक टुकड़ा भर नहीं होती बल्कि इस जमीन से उनका भावनात्मक और सांस्कृतिक लगाव भी होता है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट कहती है कि हिंदुस्तान में साढ़े छह करोड़ किसान विस्थापित हुए हैं और इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह मुद्दा कितना महत्वपूर्ण है.

1894 के इस कानून में 1962, 1967 और 1984 में किए गए संशोधनों का जिक्र करते हुए भाजपा नेता ने कहा कि संप्रग सरकार के साढ़े नौ साल का कार्यकाल गुजर चुका है और सरकार इतनी देरी करके लायी भी तो एक आधा अधूरा विधेयक.

उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में विवाद का विषय रहा है लेकिन सरकार ने इस विधेयक में भी ‘‘लोक हित’’ की आड़ में इस क्षेत्र के लिए रास्ता निकाल लिया है.
 


 
 

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