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13 Feb 2010 01:23:33 PM IST
Last Updated : 30 Nov -0001 12:00:00 AM IST

वेलेंटाइन डे: इकरार या इनकार का दिन


वेलेंटाइन डे। 14 फरवरी। दिन रविवार। दिल को संभाल कर रखें नहीं तो प्यार का इजहार और उसका इकरार या इनकार आपके दिल के लिए खतरा बन सकता है। क्योंकि वेलेंटाइन डे उर्फ ‘प्रेम दिवस’ है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि जरा सम्भल कर रहें। यह दिन दिल का सौदा और भावनाओं का आदान-प्रदान का है। जरा सम्भल कर करें वरना यह आपकी जिन्दगी और सेहत के लिए खतरनाक सिद्ध हो सकता है। उन्होंने कहा कि अक्सर युवक-युवतियां इस दिन वैलेंटाइन के प्रति ढेर सारी उम्मीदें और आकाक्षाएं पाल लेते हैं जब उनकी उम्मीदें पूरी नहीं होती हैं या उनकी उम्मीद के विपरीत कोई बात हो जाती है तो उनका दिल टूट जाता है ओर वे घोर निराशा, डिप्रेशन, में चले जाते हैं। कई बार इसकी परिणति आत्महत्या या दिल के दौरे के रूप में होती है। विशेषज्ञों के अनुसार प्यार एवं भावनाओं के इजहार के दौरान अक्सर दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं और घबराहट एवं तनाव का स्तर बढ जाता है। उसका असर दिल पर भी पड़ सकता है। इसलिये बेहतर यही है कि प्यार के इजहार के दौरान छोटी मोटी बातों को दिल पर नहीं लें। सुप्रसिद्ध चिकित्सा विशेषज्ञ एवं एशियन इंस्टीटूट ऑफ मेडिकल साइंसेंस (एआईएमए) के चेयरमैन डा. एन के पाण्डे बताते हैं कि युवक-युवतियां आजकल छोटी-छोटी बातों पर भी तनाव में आ जाती हैं। उनके अनुसार चिंता और घबराहट हृदय एवं रक्त संचार प्रणाली पर बुरा प्रभाव डाल सकती हैं। जैसे कि दिल की धमनियों में सिकुड़न, रक्त जमा होने की प्रवृत्ति बढ़ने, हृदय धड़कन की ताल में गड़बड़ी आदि। उद्वेलित भावानाओं और विचार काफी हद तक दिल के दौरे अथवा पैनिक अटैक के कारण बनते हैं। एआईएमएस के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डा. ऋषि गुप्ता का कहना है कि आमतौर पर भावनाओं में उतार चढ़ाव के कारण कोरोनेरी धमनियों में अवरोध पैदा होता है लेकिन अगर कोरोनेरी धमनियों से पहले से ही रूकावट हो तो समस्या बढ़ सकती है। यह पाया गया है कि लंबे समय तक तनाव में रहने पर धमनियों के अंदर की चिकनी सतह खुरदरी हो जाती है जिससे वहां पर कोलेस्ट्राल सरीखों तत्व जमा होने लगता है रक्त कण इकट्ठे होने लगते हैं खून जमना शुरू हो जाता है। एसोसियेशन आफ सर्जन्स आफ इंडिया के अध्यक्ष डा. एनके पांडे का कहना है कि अगर आपकी धड़कनें जल्दी तेज हो जाती है कभी कभी सीने में हल्का दर्द महसूस होता है आलस रहता है भूख प्यास मर जाती है बेवजह बेचैनी रहती है अनजाने डर से दिल हमेशा घबराया रहता है भीड़ में भी अकेलेपन का एहसास होता है रातों की नींद गायब हो गयी है किसी भी काम में मन न लगता है तो आपको तत्काल चिकित्सक से परामर्श करना चाहिये क्योंकि ये लक्षण दिल की बीमारियों के हो सकते हैं। हाल के अध्ययनों से पाया गया है कि प्यार में मिली नाकामयाबी किसी स्वस्थ्य महिला या पुरूष के दिल को तोड़ सकता है हालांकि दिल का दौरा पड़ने के बाद अवसाद में जाना अत्यंत सामान्य बात है लेकिन कोलंबिया विश्वविघालय के शोधकर्ताओं ने पाया है कि अवसाद भी दिल की बीमारियों का कारण बन सकता है। अध्ययनों में पाया गया है कि अवसाद से ग्रस्त महिलाओं को दिल का दौरा पडने से मौत होने का खतरा दोगुना होता है। इसके अलावा अवसाद दिल की अन्य बीमारियों के खतरे को भी बढ़ाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार अवसाद जितना तीव्र होगा दिल की बीमारियां होने की आशंका उतनी ही अधिक होगी। अवसाद मनोचिकित्सक डा.एन के जैन का कहना है कि प्यार से जुड़ी कुछ बातों को सोचते रहने या उनकी तरफ ध्यान लगाये रहने पर हमारे शरीर में जरूरत से अधिक कैटाकोलिमीन्स खून में मिल जाता है और वे कई प्रकार से हमारे दिल का प्रभावित करता है। ब्लडप्रेशर और हृदयगति भी बढ़ती है दिल चिड़चिड़ा होता है। हृदय का कार्य भार बढ़ जाता है और संकरी धमनियों में खून जम सकता है और दिल का दौरा पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। किशोरावस्था यानी प्यार भरी अनुभूतियों की उम्र लेकिन जल्दी घबरा जाना कमजोर दिल की निशानी है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग प्यार में अचानक असफलता हाथ लगने या सदमा लगने पर पैनिक अटैक के शिकार हो जाते हैं।


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