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02 Jun 2020 12:20:44 AM IST
Last Updated : 02 Jun 2020 12:30:55 AM IST

बीस लाख करोड़ में सबके लिए कुछ न कुछ : अनुराग ठाकुर

बीस लाख करोड़ में सबके लिए कुछ न कुछ : अनुराग ठाकुर
सहारा न्यूज नेटवर्क के मुख्य कार्यकारी अधिकारी व एडिटर इन चीफ़ उपेन्द्र राय एवं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर

केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर से सहारा न्यूज नेटवर्क के मुख्य कार्यकारी अधिकारी व एडिटर इन चीफ उपेन्द्र राय की खास बातचीत।

नई सोच के साथ देश को आगे बढ़ाने के बुलंद इरादे के साथ हम तीन माह पहले अपना बजट लाए थे, लेकिन कोरोना से अचानक परिस्थितियां बदलीं, तो हम डटकर इसका सामना करने में जुट गए। नतीजतन जनसंख्या बहुत ज्यादा होने के बावजूद कई देशों के मुकाबले हमारे यहां संक्रमण और उससे होने वाली मृत्यु दर काफी कम है। अर्थव्यवस्था और उद्योग को पटरी पर लाने के लिए हमने 20 लाख 97 हजार करोड़ का पैकेज दिया। इसके जरिए हमने उद्योगों के साथ ही गरीबों, मजदूरों, ग्रामीणों, व्यवसाइयों, किसानों, वृद्धों व विधवाओं- सभी को बड़ी राहत दी है। यह बातें केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने कहीं। उनसे सहारा न्यूज नेटवर्क के मुख्य कार्यकारी अधिकारी व एडिटर इन चीफ़ उपेन्द्र राय ने खास बातचीत की। प्रस्तुत है विस्तृत बातचीत-:

प्रधानमंत्री ने पांच ट्रिलियन डालर इकोनॉमी का लक्ष्य तय किया था, लेकिन अचानक आई कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया के साथ भारत की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया है। विकास दर को लेकर भी तमाम तरह के प्रतिकूल अनुमान लगाए जा रहे हैं? आपको क्या लगता है.किस तरह हम आगे बढ़ेंगे?
देश और पूरी दुनिया ने इन परिस्थितियों के बारे में नहीं सोचा था। हम 3 महीने पहले जब देश को अपना बजट दे रहे थे तो नई सोच के साथ देश को आगे बढ़ाने का इरादा था लेकिन पिछले दो-तीन महीनों में अच्छे और बुरे दोनों तरह के अनुभव रहे हैं। अच्छे अनुभव में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मार्च में लग रहा था कि हालात बहुत ज्यादा खराब हो सकते हैं। कुल संक्रमण के मामले में सबसे ऊपर 15 देशों के आंकड़े देखे जाएं तो अन्य देशों के मुकाबले भारत की जनसंख्या बहुत ज्यादा है पर संक्रमण और उससे होने वाली मृत्यु दर काफी कम है। हमने इन परिस्थितियों का सामना किया है और आने वाले समय में भी बेहतर तरीके से सामने आएंगे। इसी के लिए 20 लाख 97 हजार करोड़ का पैकेज भी हमने दिया है, जिससे अलग-अलग क्षेत्रों में सुधार लाने की कोशिशें रहेंगी। सबसे पहले हमें अपनी अर्थव्यवस्था और उद्योग को पटरी पर लाना है इसीलिए हम अलग-अलग सेक्टर के लिए अलग-अलग पैकेज के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

सरकार ने 20 लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज देकर अर्थव्यवस्था को गति देने का प्रयास किया है लेकिन विपक्ष का कहना है कि इस पैकेज से कुछ नहीं होगा, इसमें राहत कम और कर्ज ज्यादा है? क्या कहेंगे आप?
20.5 लाख जनधन खाता धारकों के खातों में 21 हजार करोड़ रु पए डाले गए। 9 करोड़ किसानों के खातों में 18 हजार करोड़ डाले गए हैं। 2 करोड़  82 लाख वृद्धों, विधवाओं व विकलांगों के खातों में ढाई सौ करोड़ रु पए दिए गए हैं। सात करोड़ ग्रामीणों को उज्ज्वला योजना के तहत अपने गैस सिलेंडर रिफिल कराने के लिए 9 हजार करोड़ रु पए दिए गए हैं। ईपीएफ में सरकार ने व्यवसाई और मजदूरों का हिस्सा अपनी ही तरफ से दिया है। तीन लाख करोड़ रु पए उन व्यवसायियों को 100 फ़ीसद सरकार की गारंटी पर दिया जा रहा है, जो 25 करोड़ से ज्यादा का व्यवसाय करते हैं, वह भी बहुत मामूली 7.5 की ब्याज दर पर। व्यापारी को इसके लिए घर जमीन गिरवी रखने की कोई जरूरत नहीं है।

विपक्ष मजदूरों और गरीबों के बैंक अकाउंट में 10 हजार रु पए तत्काल डालने की मांग कर रहा है और फिर हर महीने  7500 रु पए गरीबों के बैंक खातों में डालने की मांग कर रहा है, इस  मांग को लेकर आप क्या कहना चाहेंगे?
चुनाव के समय भी इस तरह की बात जनता के सामने रखी गई थी। जनता ने इसे सिरे से खारिज कर दिया था। अमेरिका जैसे तमाम बड़े देशों के अर्थशास्त्री भी इस मॉडल को खारिज कर चुके हैं। हमारी सरकार का मकसद लोगों को आत्मनिर्भर भी बनाना है और जिन्हें अन्न और धन की आवश्यकता है उन तक इसे पहुंचाना भी है। केंद्र सरकार लोगों के साथ-साथ राज्यों को भी आत्मनिर्भर बनाना चाहती है। हमने राज्य सरकारों के लिए विशेष पैकेज की मदद की है और अपने तमाम घाटों के बावजूद 92 लाख 70 हजार करोड़ रु पए पिछले 3 महीने में राज्यों को दिए। इनके साथ साथ ही हमने बिजली के लिए कुछ नियम, वन नेशन, वन राशन जैसी योजनाओं को भी रखा है ताकि एक ही राशन कार्ड पर गरीबों को कहीं भी भोजन मिल पाए। राज्यों की भी कुछ जिम्मेदारी है कि वह इन योजनाओं में सहयोग करें।

कंपनीज एक्ट में कुछ बातें जो अपराध के दायरे में आती थीं, उन्हें हटाया गया है और इसे सरलीकृत किया गया है। इसके बारे में जरा सरल भाषा में बताएं?
यह बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न है। हमने कई ऐसे अपराधों को जिन्हें क्षमा योग्य माना जाता था, उन्हें अपराधों की सूची से ही हटा दिया है। इसके साथ ही दिवालिया होने की लिमिट को अब एक करोड़ तक कर दिया गया है। एनपीए में जाने वाली कंपनियों को डिफ़ॉल्ट से हटा दिया गया है।

आत्मनिर्भर भारत अभियान के मुख्य बिंदू क्या हैं, किन क्षेत्रों में फोकस होगा और उसके लिए किस तरह की प्लानिंग है?
प्रधानमंत्री मोदी जी ने इसके पांच स्तंभ तो बताए ही हैं लेकिन यदि मैं अपनी समझ से बात कहूं तो हमें भारत को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना है और अपनी ग्लोबल सप्लाई चेन को मजबूत करना है। आज भी हमारा आयात बहुत ज्यादा है। हमें अपने आयात को कम करके निर्यात की क्षमता को बढ़ाना है और इसी तरह हम आत्मनिर्भर बन पाएंगे। चाहे कपड़े हो, मोबाइल हो या इलेक्ट्रिक आइटम सभी आज भी बहुत बड़ी तादाद में आयात होते हैं। तेल और गैस के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स के आयात को देखते हुए मोदी जी ने शुरु आत से ही इस बात पर जोर दिया था कि हम इसमें आत्मनिर्भर बने। आज हमारा देश मोबाइल बनाने के मामले में दूसरे नंबर पर आ चुका है। इसी तरह हथियारों को बड़ी तादाद में आयात करते हैं। हमें हथियारों के मामले में भी स्वयं को आत्मनिर्भर बनाना है। किसानों को भी आत्मनिर्भर बनाना है ताकि वह अपने सामान को बेहतर तरीके से ज्यादा से ज्यादा निर्यात कर सकें। कई ऐसी प्रोडक्शन यूनिट, जो सरकारी हैं, उन्हें प्राइवेटाइज करके उनकी उत्पादन क्षमता को बढ़ाने पर काम किया जाएगा। हम अलग-अलग सेक्टर्स के हिसाब से आयात कम करने पर काम कर रहे हैं। उदाहरण के लिए कोयला क्षेत्र को भी हम सभी के लिए खोलने पर विचार कर रहे हैं, जिससे यह सिर्फ  बिजली और इस्त्री वालों के इस्तेमाल के लिए ना मिले, जब हम ऐसा करेंगे तो कई लोग इस काम में दिलचस्पी दिखाएंगे। हाल के दिनों में चीनी सामान और ऐप का इस्तेमाल न करने को लेकर एक जागरूकता लोगों में देखने को मिल रही है। इसे आगे बढ़ाने की जरूरत है ताकि हम चीन को सबक सिखा सकें। युद्ध के जरिए नहीं, बल्कि उसे आर्थिक तौर पर कमजोर करके।

लॉकडाउन के बाद अब हम अर्थव्यवस्था खोलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, ज्यादातर बाजार खुलने जा रहे हैं और हवाई जहाज-ट्रेन जैसे परिवहन शुरू हो गए हैं। आपको क्या लगता है कि अब अर्थव्यवस्था को कितनी गति मिलेगी और कब तक स्थिति सामान्य होने  के आसार है?
लॉकडाउन को खोलने के बाद से केस बढ़े हैं लेकिन हमें यह भी याद रखना होगा कि रिकवरी रेट भी बहुत तेजी से बेहतर हुआ है। टीवी चैनलों से मैं गुजारिश करना चाहता हूं कि वह डराने का काम ही ना करें जागरूक करने का भी काम करें। सिर्फ  यह आंकड़े ना बताएं कि कितने लोग संक्रमित हो रहे हैं, यह भी बताएं कि कितने लोग ठीक होते जा रहे हैं। लोगों के लिए भी जरूरी है कि वह एहतियात बरतें। निश्चित दूरी बनाए रखें, मास्क, सैनिटाइजर का इस्तेमाल करते रहें लेकिन साथ ही साथ हमें लोगों के मन से भय को भी निकालना होगा।

एक तरफ आत्मनिर्भरता की ओर कदम है तो दूसरी ओर विदेशी निवेश को बढ़ाने की बात। भारत विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए किस तरह की रणनीति पर काम कर रहा है?
घरेलू कंपनियों की क्षमता को बढ़ाकर हम विदेशी निवेश को आकर्षित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए हथियारों का निर्माण करने के मामले में हमें खुद को आत्मनिर्भर करना होगा और यहां निर्यात क्षमता को विकसित करना होगा। ऐसे ही कई क्षेत्र हैं, जहां पर हम अपनी क्षमता को बढ़ा सकते हैं। कृषि के क्षेत्र में भी हम हिंदुस्तानी कंपनियों को प्रोत्साहित कर सकते हैं, इससे ज्यादा फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स लगेंगी और हमारे यहां रोजगार के साथ-साथ निर्यात करने की क्षमता का भी विकास होगा। उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश में फिरोजाबाद है, जहां ग्लास का काम होता है, कश्मीर का केसर, हिमाचल का सेब, आंध्रप्रदेश के चिली, बिहार का मखाना जैसी कई चीजें हैं, जिनको स्थानीय स्तर पर हम विकसित कर सकते हैं। मैं यह भी बताना चाहूंगा कि एक्टिव फार्मास्यूटिकल इनग्रेडिएंट्स यानी एपीआई के मामले में भी हम स्वयं को आत्मनिर्भर बनाने में लगे हुए हैं। इसके प्लांट लगाने को हम प्रोत्साहित कर रहे हैं। अभी हमें इसका बड़ा हिस्सा चाइना से आयात करना पड़ता है। हमारी कोशिश है कि हम इस निर्भरता को धीरे-धीरे कम करें।

कश्मीर का मुद्दा हो या राम मंदिर का मुद्दा हो। मोदी सरकार ने कई कठोर निर्णय लिए हैं। इन फैसलों का विदेशी निवेश पर कितना असर पड़ा है? हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनसे कितने मजबूत बने।
आंकड़ें सारी बातों को बयां कर देते हैं। 13 फ़ीसद पूंजी निवेश बढ़ा है, जो अपने आप में बताता है कि लोगों का हम पर विश्वास बढ़ा है। वह जानते हैं कि अब भारत में एक मजबूत सरकार है और यहां हमेशा से मेन पावर तो रही ही है। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों ने हमें जी-7 में शामिल करने के लिए पहल की है। भारत को अब दुनिया की महान शक्तियों में शामिल किया जा रहा है। मोदी जी के नेतृत्व में हम एक मजबूत भारत को देख पा रहे हैं। लोगों ने भी एक साथ मोदी जी को वोट देकर यह बता दिया है कि उनका भरोसा इस सरकार पर और उसके नेतृत्व पर है।

वित्त मंत्रालय ने तमाम राहत देने का ऐलान किया है.आपकी नजर में वो कौन सी प्रमुख राहत हैं, जिनसे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और उद्योग जगत सामान्य हो सकेगा?
लोगों को बहुत ज्यादा नहीं चाहिए। अगर आप उनके काम को आसान बनाते हैं तो भी वह राहत महसूस करते हैं। व्यापारियों को राहत देने के लिए 3 लाख 70 हजार करोड़ का पैकेज दिया है। कृषि के लिए एक लाख करोड़ रु पए का पैकेज, मछुआरों की स्थिति को बेहतर करने के लिए 20 हजार करोड़ का पैकेज दिया गया है। इसी तरह, मधुमक्खी पालन के लिए 500 करोड़ रु पए का पैकेज दिया गया है। डेयरी उद्योग के लिए पंद्रह हजार करोड़ का पैकेज दिया गया है। हमारे आधारभूत ढांचे को बेहतर बनाने के लिए 103 लाख करोड़ रु पए का पैकेज दिया गया, जिससे रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इसी तरह हम हर सेक्टर के लिए काम कर रहे हैं। जल शक्ति मंत्रालय के जरिए हम हर घर में पानी पहुंचाने में भी लगे हुए हैं। निवेश बढ़ाने के लिए हम सार्वजनिक उपक्रमों, जो  स्ट्रैटजिक सेक्टर में नहीं आते हैं, के निजीकरण पर भी काम कर रहे हैं। वहीं,  एमएसएमई सेक्टर को अब पांच गुना ज्यादा काम करने का मौका मिलेगा। उनका आकार और व्यापार बढ़ पाएगा।

बड़ी तादाद में मजदूर अपने घरों को लौट गए हैं और अब औद्योगिक गतिविधियां शुरू हो रही हैं। सरकार को क्या लगता है? क्या ये मजदूर फिर से काम पर लौटेंगे या फिर जो मजदूर जहां हैं, उन्हें वहीं रोजगार के अवसर मिल जाएंगे?
मजदूरों के हालात तो खराब हुए। राज्यों की भी इसमें काफी जिम्मेदारी है। बहुत सी कमियां रहीं, जिन पर ध्यान देना चाहिए था। केंद्र ने रेलवे का इंतजाम किया। रास्तों में जाने वाले मजदूरों के लिए भोजन पानी की व्यवस्था की। वहीं, एक लाख करोड़ रु पए हमने मनरेगा के बजट में डाले ताकि इन मजदूरों को राहत मिल सके। 300 करोड़ रु पए गांव में जाने के बाद उनके रोजगार की व्यवस्था के लिए भी रखे गए हैं। बहुत से शहरों में अब कंस्ट्रक्शन का काम शुरू हो चुका है और 20 से 25 फ़ीसद ऐसे मजदूर भी हैं, जिन्होंने वापस आने का आवेदन भी दिया है। इससे रियल एस्टेट और अन्य क्षेत्रों में मजदूरों को दोबारा रोजगार मिलेगा। मजदूर अगर बहुत समय तक नहीं होते हैं तो इंडस्ट्रीज आर्टििफशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन की तरफ बढ़ने लगती हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 20 लाख करोड़ के पैकेज से गांवों में रोजगार, स्वरोजगार और लघु उद्योगों से जुड़ी विशाल संभावनाएं खुल गई हैं। इस बारे में दर्शकों/पाठकों को आप क्या बताना चाहेंगे? आम लोगों तक कैसे पहुंचेगा ये लाभ?
सरकारी बैंकों के माध्यम से हम लाभार्थियों को लाभ पहुंचाएंगे। सबसे पहले तीन लाख करोड़ रु पए उन व्यवसायियों के लिए जिन्होंने निवेदन किए हैं। 10-10 हजार रु पए रेहड़ी और ठेले वालों को दिए जाएंगे। उनका पंजीकरण म्युनिसिपल कॉरपोरेशंस के जरिए करवाया जाएगा। इसी तरह, किसानों को भी पैसे पहुंचाने का काम किया जाएगा।

पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में कहा कि  अगर हमारे गांव, कस्बे, जिले, राज्य, आत्मनिर्भर होते, तो मौजूदा समय में अनेक समस्याओं ने वो रूप नहीं लिया होता, जिस रूप में वो आज हमारे सामने हैं। आप इसके लिए किसको जिम्मेदार मानते हैं?
राज्यों को पंचायती राज का इस्तेमाल करते हुए एक डायरेक्टरी बनानी चाहिए। कितने लोग बाहर जाकर काम करते हैं और उनके पास क्या क्या हुनर हैं। इसका बाकायदा पंजीयन किया जाना चाहिए और इस तरह की डायरेक्टरी को ऑनलाइन किया जाना चाहिए ताकि कौन आता है और कौन बाहर जाता है, के बारे में जानकारी हो। उनके नंबर भी वहां पर होने चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर ठेकेदार इन्हें कॉल कर सकें और स्थानीय स्तर पर भी इन्हें काम मिल पाए।

मजदूरों की घर वापसी के बाद राज्यों में कहीं श्रमिकों की स्किल मैपिंग का काम हो रहा है तो कहीं माइग्रेशन कमीशन बनाने की बात हो रही है। क्या राष्ट्रीय स्तर पर भी ऐसी किसी नीति या नियम तैयार करने का कोई प्रस्ताव है?
विदेशों से वापस आने वालों की एयरपोर्ट पर जानकारी लिखी गई और उनकी स्किल के अनुरूप जानकारियों को लिखा गया। ताकि यहां भी उनके लिए रोजगार को देखा जा सके। राज्यों को भी अपने स्तर पर इसी तरह की डायरेक्टरी पर काम करना चाहिए और उसका एक नेशनल ग्रिड बनाकर हम स्किल मैपिंग के काम को आगे बढ़ा सकते हैं।

प्रधानमंत्री को पूरा भरोसा है कि आत्मनिर्भर भारत अभियान, इस दशक में देश को नई ऊंचाई पर लेकर जाएगा, उनके इस आत्मविश्वास के पीछे जरूर कोई ठोस वजह होगी? इस बारे में आपकी क्या राय है?
हमने संकट को अवसर में बदला है। मोदी जी इस बात के लिए जाने जाते हैं। जिस वक्त वह पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, तब गुजरात को भूकंप की आपदा से उबारने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कुछ उसी तरह से उन्होंने इस आपदा में भी नेतृत्व किया है। हम जो काम पहले नहीं कर रहे थे, मसलन एन 95 मास्क का निर्माण हो या पीपीई किट का निर्माण हो। यह पहले हमारे यहां नहीं बनती थी, लेकिन अब हम बड़ी तादाद में इनका निर्माण कर रहे हैं और निर्यात भी करने की स्थिति में आने वाले हैं। इसी तरह, चाहे योग विज्ञान हो, हमने हर क्षेत्र में काफी काम किया है। स्टार्टअप्स के मामले में हम दुनिया के टॉप 5 देशों में आते हैं। आज भारत को दुनिया की महान शक्तियों के बीच में रखा जा रहा है। यह सपने को साकार करने जैसा है। जो मोदी जी की नेतृत्व क्षमता से ही संभव हो पाया।

कोरोना एक ऐसी आपदा है, जिसका पूरी दुनिया के पास कोई इलाज नहीं है। सरकारों को अचानक से आई इस चुनौती से लड़ने का अनुभव भी नहीं था, शायद इसलिए कई राज्यों में स्थितियां सहज नहीं हो पा रही हैं। सबसे ज्यादा बुरी स्थिति महाराष्ट्र की है। मुंबई शहर बेहाल है। क्या कहेंगे आप?
कानून व्यवस्था राज्य का विषय होती है। निश्चित तौर पर मुंबई और महाराष्ट्र के जो हालात हैं। उनमें राज्य सरकार को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। हमारा जो भी सहयोग चाहिए, वह हम राज्य सरकार को देंगे। मुंबई आर्थिक राजधानी है और ऐसे में वहां के हालात खराब होने का असर सिर्फ  महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहता, पूरे देश पर इसका असर पड़ता है। हमसे महाराष्ट्र सरकार की जो भी अपेक्षा होगी, उसे हम पूरा करने की कोशिश करेंगे। जिस तरह पश्चिम बंगाल में राजनीतिक मनमुटाव के बावजूद 15000 करोड़ का पैकेज हमने दिया है, वह मुसीबत के समय देश के साथ खड़े होने को दिखाता है।

प्रधानमंत्री ने आपदा को अवसर में बदलने की बात कही। गांवों से लेकर शहरों तक और छोटे व्यापारियों से लेकर स्टार्टअप तक, हमें अवसरों की पहचान कर आगे बढ़ना है।  क्या लगता आपको? सबको अवसर उपलब्ध हो जाएंगे?
पीएम ने ये करके भी दिखाया है। जैसा मैंनेआपको बताया भुज के भूकंप के बाद सब कुछ मिट्टी में मिल गया था। उसके बाद मोदी जी ने मुख्यमंत्री रहते हुए, एक बार फिर जिंदगी को अपने पैरों पर खड़ा किया। शुरु आत में ताली, थाली और दीए जलाने का जिन लोगों ने मजाक उड़ाया, वो अब देख रहे हैं कि किस तरह पूरी दुनिया में लोग कोरोना वॉरियर्स का हौसला बढ़ाने के लिए यही तरीका अपना रहे हैं। यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि कैसे सभी लोग एक सूत्र में बंधे हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी के अंदर नेतृत्व क्षमता है कि वह सब को एक सूत्र में बांधे रखते हैं।


 
 

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