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29 Feb 2012 04:31:54 AM IST
Last Updated : 29 Feb 2012 04:31:54 AM IST

खेतों में लहलहाएगी ‘बिस्कुट’ की फसल

बिस्कुट बनाने के लिए गेहूं की नई फसल (फाइल फोटो)
बिस्कुट बनाने के लिए गेहूं की नई प्रजाति विकसित

 

भारत में पहली बार खासतौर से बिस्कुट बनाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने ‘पूसा बेकर’ नामक गेहूं की नई प्रजाति विकसित की है.

रविशंकर तिवारी/एसएनबी
देश में पहली बार खासतौर से बिस्कुट बनाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) के कृषि वैज्ञानिकों ने ‘पूसा बेकर’ नामक गेहूं की नई प्रजाति विकसित की है. ब्रिटानिया, सनफेस्ट (आटीसी) व पारले-जी जैसी नामचीन बिस्कुट निर्माता कंपनियों से मिलकर ठेके के जरिए (कांट्रैक्ट फार्मिग) गेहूं की इस किस्म की खेती को बढ़ावा देने के लिए कवायद की जा रही है. बिस्कुट के लिए विकसित ‘पूसा बेकर’ यूरोपीय देशों द्वारा तय मानक के अनुरूप है.

पूसा के कृषि वैज्ञानिकों ने मैक्सिको प्रजाति की गेहूं को क्रास कर ‘पूसा बेकर’ नामक गेहूं की नई किस्म विकसित की है. आठ साल तक प्रयोगशाला से लेकर जमीन तक परीक्षण किए जाने के बाद ‘पूसा बेकर’ को रिलीज कर दिया गया है. बिस्कुट के लिए स्वादिष्ट व गुणवत्तापूर्ण गेंहूं की नई किस्म की खेती खासतौर से पहाड़ी क्षेत्र जैसे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड व पश्चिम बंगाल के किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी.

इसकी बुआई कर लगभग 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार की जा सकती है. नवम्बर अंत से दिसम्बर मध्य तक बुआई कर 110 दिन के भीतर यानि अप्रैल में कटाई की जा सकती है. लागत व उत्पादन के हिसाब से किसानों को अच्छी कीमत मिलने की संभावना है.

पूसा के निदेशक डॉ. एचएस गुप्ता का मानना है कि खाद्य संकट अब समस्या नहीं है. गुणवत्तापूर्ण खेती समय की मांग है, जिसे पूरा करने के लिए कृषि वैज्ञानिक नई-नई प्रजातियां विकसित कर रहे हैं. बिस्कुट निर्माता कंपनियों से कंट्रैक्ट फार्मिग के जरिए ‘पूसा बेकर’ की खेती को बढ़ावा देने की बातचीत चल रही है.

संस्थान ने परीक्षण के लिए बिस्कुट निर्माता कंपनियों को गेहूं की नई प्रजाति ‘पूसा बेकर’ दिया है. निश्चित तौर पर ‘पूसा बेकर’ से तैयार बिस्कुट स्वादिष्ट व लाजवाब होगा और लोग पसंद करेंगे. गेहूं की इस नई किस्म की ब्रांडिंग के लिए भी योजना बनाई जा रही है. लगातार आठ साल तक अथक प्रयास के बाद पूसा बेकर नामक गेंहूं की नई किस्म विकसित करने वाले कृषि वैज्ञानिक डॉ. संजय ने बताया कि देश में गेहूं की कठोरता सूचकांक औसत 70 है.

यूरोपिय देशों ने बिस्कुट बनाने के लिए गेहूं की कठोरता सूचकांक 40 तय किया है, जबकि पूसा बेकर की कठोरता सूचकांक 32 है. लिहाजा ‘पूसा बेकर’ बिस्कुट के लिए सबसे बेहतर किस्म साबित होगी. उन्होंने बताया कि आटा गुंथने के बाद स्प्रेड फैक्टर (लसलसा या नमी) सामान्य गेहूं में औसत 7 है. यूरोपीय मापदंड के अनुसार स्प्रेड फैक्टर 9 से ऊपर होना चाहिए. ऐसे में पूसा बेकर का स्प्रेड फैक्टर तय मानक से बेहतर 11 है.

‘पूसा बेकर’ में प्रोटीन की मात्रा 11 फीसद है. देश में तैयार बिस्कुट में तमाम तरह के रसायन का इस्तेमाल कर स्वादिष्ट बनाया जाता है जबकि पूसा बेकर से तैयार बिस्कुट में बहुत कुछ मिलाने की जरूरत नहीं होगी. मधुमेह पीड़ित लोगों के लिए पूसा बेकर से तैयार बिस्कुट कतई नुकसानदेह साबित नहीं होगा. रोटी के लिए पूसा बेकर को बहुत पसंद नहीं किया जा सकेगा.

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