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22 Mar 2019 04:14:29 PM IST
Last Updated : 22 Mar 2019 04:20:29 PM IST

बैडमिंटन को बढ़ावा देने के लिए भारत की राह चला स्विट्जरलैंड

आईएएनएस
एंजलबर्ग (स्विट्जरलैंड)
बैडमिंटन को बढ़ावा देने के लिए भारत की राह चला स्विट्जरलैंड
स्विट्जरलैंड बैडमिंटन (संघ) के अध्यक्ष रॉबर्ट डीकॉक (फाइल फोटो)

स्विट्जरलैंड बैडमिंटन (संघ) के अध्यक्ष रॉबर्ट डीकॉक ने कहा है कि वह भारतीय मॉडल का अनुसरण करके अपने देश में इस खेल का विकास करना चाहते हैं।

रॉबर्ट डीकॉक के मुताबिक भारत सभी बाधाओं को पार करते हुए अब विश्वस्तरीय बैडमिंटन खिलाड़ी तैयार कर रहा है।

स्विट्जरलैंड को इस साल अगस्त में बीडब्ल्यूएफ विश्व बैडमिंटन चैम्पियनशिप के 25वें संस्करण की मेजबानी करनी है।

डीकॉक ने साक्षात्कार में कहा कि एक ऐसे देश में जहां फुटबाल, स्कीइंग, टेनिस और आइस हॉकी सबसे ज्यादा लोकप्रिय खेल बने हुए हैं, वहां अब आम नागरिक बैडमिंटन को लेकर अधिक जागरूक हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यदि अनुकूल माहौल बनाया जाए तो स्विट्जरलैंड भी विश्वस्तरीय खिलाड़ी तैयार कर सकता है।

डीकॉक ने कहा, "जब आप स्विट्जरलैंड की बात करते हैं तो आप पहाड़ों और बर्फ की भी बात करते हैं। हम एक अमीर देश हैं। हमारे बच्चे फुटबाल, स्कीइंग, टेनिस और आइस हॉकी जैसे खेलों में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन बैडमिंटन जैसा भी एक खेल है, जिसमें हम खुद को असहज पाते हैं। हमारे पास स्विस चैम्पियंस हैं लेकिन हमारे पास शीर्ष खिलाड़ी नहीं हैं।"

स्विट्जरलैंड में बैडमिंटन को अधिक लोकप्रिय बनाने के बारे में डीकॉक ने कहा, "स्विट्जरलैंड में बैडमिंटन को अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए हमें अन्य देशों के विकास मॉडल को देखने की जरूरत है और इस संबंध में भारत हमारे लिए सबसे पहले है। भारत ने सभी बाधाओं को पारकर इस खेल में एक नई ऊंचाई को हासिल किया है और अब वह सभी वर्गो में विश्व स्तरीय खिलाड़ी तैयार कर रहा है, इसलिए हम भारतीय मॉडल का अनुसरण करेंगे।"

खुद एक बैडमिंटन खिलाड़ी रह चुके डीकॉक यूरोपियन, डच और 26 स्विस खिताब जीत चुके हैं।

स्विस बैडमिंटन प्रमुख ने माना कि इस खेल को लोकप्रिय बनाना उनके लिए मुश्किल लग रहा था और अब वह इसे स्कूल स्तर के पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, "इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मैं सरकार के साथ संपर्क में हूं ताकि इसे स्कूल पाठ्यक्रम में जगह मिल सके।"

स्विट्जरलैंड में प्रतिभाशाली बैडमिंटन खिलाड़ी खोजने के बारे में उन्होंने कहा कि भारत के मुकाबले यहां पर प्रतिभाओं की तलाश करना मुश्किल है।

डीकॉक ने कहा, "हमारे पास मानव संसाधन सीमित हैं और हर कोई किसी न किसी काम में लगा हुआ है। हां, जहां तक बैडमिंटन की बात है तो फिल्हाल हमारा मुख्य लक्ष्य माता-पिता को अपने बच्चे को बैडमिंटन खिलाने के लिए राजी करना है और यह तभी संभव है जब उन्हें (माता-पिता) एहसास हो जाए कि इस खेल में अच्छे भविष्य के साथ-साथ अच्छा पैसा भी है।"

उन्होंने कहा, "हमारे पास एक मुश्किल रास्ता है लेकिन विश्व चैम्पियनशिप जैसे टूर्नामेंटों के आयोजनों से इस खेल को लेकर लोगों में जागरूकता आने की उम्मीद है। लेकिन फिर अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए हम भारतीय मॉडल को अपनाएंगे।"

डीकॉक वल्र्ड फेडरेशन ऑफ द स्पोटिर्ंग गुड्स इंडस्ट्री के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकरी (सीईओ) भी हैं। वह हाल में चार साहसिक खिलाड़ियों के बीच 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित माउंट टिटलीस पर खेले गए एक प्रदर्शन मैच के दौरान वहां मौजूद थे।

भारत के बी. साई प्रणीत और पारुपल्ली कश्यप तथा स्विट्जरलैंड की पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी केरीन सुटर एराटा तथा सबरिना जैक्वेट ने समु़द्र तल से 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित माउंट टिटलीस पर बने रबर के कोर्ट पर यह प्रदर्शनी मैच खेला।



अगस्त में होने वाली बीडब्ल्यूएफ विश्व चैम्पियनशिप को प्रोमोट करने के लिए स्विस बैडमिंटन ने स्विस टूरिज्म तथा टिटलीस केबल वेज, होटल्स व रेजार्ट्स के सहयोग से यह प्रदर्शनी मैच आयोजित किया था।

डीकॉक ने कहा कि स्विस बैडमिंटन के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से 12000 से अधिक खिलाड़ी पंजीकृत हैं और करीब 25000 एमेच्योर खिलाड़ी सप्ताहांत में देश के विभिन्न सेंटर्स में इस खेल का आनंद लेते हैं।

उन्होंने कहा, "हमारे पास खिलाड़ियों की अच्छी संख्या है, लेकिन इनमें से बहुत कम ही बैडमिंटन को एक करियर के रूप में आगे बढ़ाने के इच्छुक हैं क्योंकि इसमें पैसे की कमी है।

कोई भी माता-पिता अपने बच्चों को बैडमिंटन खेलने के लिए नहीं जाने नहीं देते। बैडमिंटन के बजाय वे उन्हें पढ़ाई के लिए भेजने और अच्छे पैसे कमाने को प्राथमिकता देते हैं।"

डीकॉक ने साथ कहा, "भारत में भी यही स्थिति थी। लेकिन अब मध्यम वर्ग अमीर हो रहा है। वे इस बात से अच्छी तरह से अवगत हैं कि बैडमिंटन जैसे खेल से भी उनके बच्चे लोकप्रियता हासिल कर सकते हैं, इसीलिए वे अपने बच्चों को बैडमिंटन खेलने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।"

 



 

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