Diabetes: कहीं रह ना जाए मां बनने की चाह अधूरी

Diabetes: कहीं रह ना जाए मां बनने की चाह अधूरी

गर्भावस्था में इंसुलिन का असंतुलित स्तर खतरनाक : डायबिटीज के ‘टाईप-1’ में इंसुलिन का स्तर कम हो जाता है और ‘टाइप-2’ में इंसुलिन रेजिस्टेंस हो जाता है व दोनों में ही इंसुलिन का इंजेक्शन लेना जरूरी होता है. इससे शरीर में ग्लूकोज का स्तर सामान्य बना रहता है. गर्भधारण करने के लिए इंसुलिन के एक न्यूनतम स्तर की आवश्यकता होती है और ‘टाइप-1’ डायबिटीज की स्थिति में इंसुलिन का उत्पादन करने वाली कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं. इस स्थिति में गर्भधारण करना मां और बच्चे दोनों के लिए खतरा हो सकता है. वहीं दूसरी ओर ‘टाइप-2’ डायबिटीज में शरीर रक्तधाराओं में ग्लूकोज के स्तर को सामान्य बनाए नहीं रख पाता, क्योंकि शरीर में पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का निर्माण नहीं हो पाता. इस स्थिति से निपटने के लिए आहार में परिवर्तन किया जा सकता है और नियमित रूप से व्यायाम का अभ्यास करने से भी इंसुलिन के स्तर को सामान्य बनाया जा सकता है. यही नहीं ‘इंसुलिन’ हर्मोन का एक प्रकार है और इसके असंतुलित होने से शरीर के अन्य हर्मोन्स जैसे एस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रन और टेस्टोस्टेरन का स्तर भी प्रभावित होता है. ऐसे में महिला में बांझपन की समस्या हो सकती है.

 
 
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