रेवती नक्षत्र, साध्य योग में मनेगी बसंत पंचमी

रेवती नक्षत्र, साध्य योग में मनेगी बसंत पंचमी

बसंत पंचमी का पर्व कल (10 फरवरी, रविवार) मनाया जाएगा। यह पर्व माघ शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है और इस दिन मां सरस्वती के पूजन का विशेष महत्व है। इस संबंध में महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पं. राकेश पाण्डेय ने बताया कि इस वर्ष बसंत पंचमी के दिन रविवार है, रेवती नक्षत्र व साध्य नामक योग मिल रहा है। इसकी वजह से इस बार की बसंत पंचमी सर्वमंगलकारी है। यह पर्व वास्तव में ऋतुराज बसंत के आगमन की सूचना देता है। इस दिन से ही होरी तथा धमार गीत प्रारंभ किए जाते हैं। गेंहूं तथा जौ की स्वर्णिम बालियां भगवान को अर्पित की जाती हैं। बसंत ऋतु कामोद्दीपक होती है। उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु की आज्ञा से प्रजापिता ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की। जब वे उस संसार में देखते थे तो चारों तरफ सुनसान दिखाई देता था। उदासी का वातावरण था। इसे दूर करने के लिए ब्रह्माजी ने अपने कमंडल से जल छिड़का। जलकणों के पड़ते ही वृक्ष से एक शक्ति उत्पन्न हुई जो दोनों हाथों से वीणा बजा रही थी। वे दोनों हाथों में क्रमश: पुस्तक तथा माला धारण किए थीं। पं. राजेश पाण्डेय ने बताया कि ब्रह्मा जी ने उस देवी से वीणा बजाकर संसार की मूकता और उदासी दूर करने को कहा। तब उस देवी ने वीणा के मधुर नाद से सब जीवों को वाणी प्रदान किया। इसलिए उन्हें सरस्वती कहा गया।

 
 
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