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नयी दिल्ली। कांग्रेस कार्यसमिति की अगले महीने के पहले सप्ताह में होने वाली बैठक के पहले अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) में बहुप्रतीक्षित फेरबदल हो सकता है।
इस फेरबदल से एआईसीसी सचिवालय में कुछ नये चेहरे आने की संभावना है क्योंकि पार्टी के अनेक पदाधिकारी केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल हैं और पार्टी तथा सरकार दोनों की जिम्मेदारी संभालने के कारण पार्टी के कामों में अपना ध्यान केन्द्रित करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं।
ऐसे मंत्री जो पार्टी संगठन में महासचिव भी है मनमोहन सरकार में शामिल होने के बाद पार्टी मुख्यालय के अपने कार्यालय में कभी-कभार ही आते हैं। पार्टी संगठन में उच्च स्तर पर फिलहाल करीब आधा दर्जन पद रिक्त है। सूत्रों ने संकेत दिया है कि फेरबदल कांग्रेस कार्य समिति की बैठक के पहले हो सकता है।
सूत्रों ने कहा कि फेरबदल इसलिए टलता रहा है क्योंकि रिक्त पदों को भरने और एक व्यक्ति एक पद के फार्मूले पर अमल करने की तत्काल आवश्यकता नहीं थी क्योंकि बिहार में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव को छोड़कर निकट भविष्य में कोई चुनाव भी नहीं है।
संप्रग सरकार के दूसरे कार्यकाल में पार्टी के चार महासचिवों को केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में जगह दी गई। गुलाम नवी आजाद, मुकुल वासनिक, पृथ्वीराज चव्हाण और वी. नारायणस्वामी को कैबिनेट में शामिल किया गया। आजाद पार्टी में तमिलनाडु और उड़ीसा मामलों के प्रभारी है जबकि वासनिक दिल्ली और राजस्थान के प्रभारी है। चव्हाण हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के प्रभारी महासचिव है।
कानून मंत्री एम. वीरप्पा माइली आंध्रप्रदेश के और रक्षा मंत्री एके एंटनी महाराष्ट्र के प्रभारी है। कांग्रेस के जो दो नेता पार्टी और सरकार दोनों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं उनमें सीपी जोशी और प्रणव मुखर्जी शामिल हैं। केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जोशी राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष है जबकि मुखर्जी पश्चिम बंगाल के प्रदेश अध्यक्ष है।