‘मातानुवन’ है ‘पर्यावरण’ बचाने का महाअभियान

PICS: ‘मातानुवन’ है पर्यावरण संरक्षण का महाअभियान

मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ जिले के आदिवासी यूं तो अनपढ़ या अल्पशिक्षित कहे जाते हैं लेकिन पर्यावरण के प्रति उनकी जागरूकता अनुकरणीय है. पर्यावरण के बढ़ते खतरों को लेकर देश-दुनिया में जहां सिर्फ कार्यशालाओं में चिंताएं प्रकट करने की मात्र रस्म अदायगी होती है. वहीं उसके उलट यहां आदिवासी अपने पर्यावरण को संरक्षित करने का महाअभियान चलाए हुए हैं. ‘मातानुवन’ (माता का जंगल) अभियान के जरिए ये आदिवासी ना सिर्फ अपने गांव के जंगल को बचा रहे हैं बल्कि यह संदेश भी दे रहे हैं कि पर्यावरण बचाना है तो पेड़ लगाना और उन्हें बचाना आवश्यक है. जानिए क्या है ‘मातानुवन’ और इसका उद्देश्य : आदिवासी समाज में ‘मातानुवन’ की परंपरा वर्षों से चली आ रही है. इस परंपरा के तहत वह बड़ी संख्या में पेड़ लगाते हैं. उनकी पूजा करते हैं और उनकी रक्षा करते हैं. लेकिन धीरे-धीरे इस परंपरा ने एक अभियान का रूप ले लिया है. इसका कारण है कि आमतौर पर आदिवासी जंगलों या ठेठ ग्रामीण इलाकों में रहता है. ईंधन से लेकर पशुपालन तक में उसे जंगलों की जरूरत होती है. इस तरह तेजी से जंगल कटने लगे.

 
 
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