सहारा इंडिया परिवार ने भारतीय क्रिकेट टीम की स्पॉन्सरशिप छोड़ दी है और आईपीएल-5 से भी नाता तोड़ लिया है. आईपीएल-5 के लिए आज ही लगभग 140 राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की बोली लगने वाली थी. बंगलौर में इसके लिए तैयारी चल ही रही है. इसी बीच सहारा इंडिया ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई को तगड़ा झटका देते हुए अनुरोध किया है कि पुणे वॉरियर्स की उनकी टीम भी किसी और को दे दी जाए. ग़ौरतलब है कि सहारा इंडिया परिवार ने वर्ष 2010 में पुणे वॉरियर्स की फ्रेंजाइजी 1702 करोड़ रूपए में खरीदी थी. लेकिन सबसे बड़ा फ़ैसला भारतीय क्रिकेट टीम के प्रायोजक से हटना है. सहारा इंडिया परिवार वर्ष 2001 से लगातार टीम इंडिया का आधिकारिक प्रायोजक रहा है. वर्ष 2010 में सहारा इंडिया परिवार ने आख़िरी बार तीन साल के लिए 400 करोड़ रूपए की बोली लगाकर क्रिकेट टीम की स्पॉन्सरशिप ली थी. 'युवराज परिवार के सदस्य' सहारा इंडिया परिवार बुरे दौर में भारतीय क्रिकेट का साथ देता रहा है लेकिन इस भावनात्मक लगाव को भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने समझने में ग़लती कर दी. सहारा इंडिया परिवार लगातार 12 वर्षों तक भारतीय क्रिकेट टीम का प्रायोजक रहा है. सहारा इंडिया ने भारतीय क्रिकेट का प्रायोजन तब शुरु किया जब वर्ष 2001 में विश्व कप से पहले विल्स को भारी विरोध के बाद टीम इंडिया के प्रायोजक से हटना पड़ा. सहारा इंडिया ने स्पष्ट कहा है कि पुणे वॉरियर्स से जुड़े युवराज सिंह बुड़े दौर से गुजर रहे हैं. अभी खेल से ज्यादा उनकी सेहत जरूरी है. हमारा फर्ज है कि हम उनका खयाल रखें. इसलिए हमने उनकी पूरी फीस चुकाने का फैसला किया है. हमने बीसीसीआई से गुजारिश की थी कि हमें युवराज का विकल्प दिया जाए.
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