सहारा इंडिया परिवार ने 5 वर्ष की अवधि तक महिलाओं और पुरुषों की राष्ट्रीय और जूनियर हॉकी टीमों के फिर से प्रायोजक बनने की घोषणा की. प्रमुख व्यावसायिक संस्थान और भारत में खेलों के प्राइम प्रमोटर और संरक्षक सहारा इंडिया परिवार ने बुधवार को 5 वर्ष की अवधि तक महिलाओं और पुरुषों की राष्ट्रीय और जूनियर हॉकी टीमों के फिर से प्रायोजक बनने की घोषणा द्वारा भारतीय हॉकी को अपना समर्थन अभिव्यक्त किया. इसकी स्पांसर राशि भी सहारा द्वारा पिछली राशि से 170 प्रतिशत बढ़ाकर हॉकी टीम को देने की घोषणा की गई. सहारा इंडिया परिवार, राष्ट्रीय खेल को समर्थन देने के इरादे से वर्ष 2003 में बतौर टीम के प्रायोजक आगे आया. अपने इस सहयोग को पुन: से नवीनीकृत करके सहारा इंडिया परिवार ने राष्ट्रीय खेल के विकास के प्रति पूरे दिल से अपना सहयोग सुनिश्चित किया है. सहारा इंडिया परिवार का प्रायोजक बनने का यह कार्यक्रम खेलों को जमीनी स्तर पर प्रोत्साहित किए जाने का हिस्सा है. इसके अतिरिक्त सहारा इंडिया परिवार ने भारतीय मुक्केबाजी, कुश्ती, तीरंदाजी, शूटिंग, ट्रैक एंड फील्ड एवं टेनिस के 6 खेलों में कुल मिलाकर 95 खिलाड़ियों को समर्थन दिया है, जो कि पदक जीतने के सशक्त दावेदार हैं. इन्हें लंदन ओलंपिक 2012 के बाद तक अधिग्रहित किया गया है. इस अवसर पर सहारा इंडिया परिवार के प्रबंध कार्यकर्ता एवं चेयरमैन सहाराश्री सुब्रत रॉय सहारा ने कहा, ‘यह हमारा राष्ट्रीय खेल है और इससे जुड़कर हम खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं, साथ ही इस खेल के लिए अपना संरक्षण और समर्थन बनाए रखने की हमें अपार प्रसन्नता है. हम आने वाले वर्षो में हॉकी के खेल में और अधिक सम्मान व सफलता प्राप्त करेंगे और सहारा इंडिया परिवार खेलों के प्रत्येक स्तर पर विकास हेतु प्रतिबद्ध है.’ श्री नरेन्द्र बत्रा, जनरल सेक्रेटरी, हॉकी इंडिया ने कहा, ‘मुझे सहारा इंडिया परिवार और खासतौर से ‘सहाराश्री’ श्री सुब्रत रॉय सहारा को धन्यवाद ज्ञापित करने का सुअवसर मिला है, जो कि खेलों के सर्वाधिक बड़े संरक्षक हैं और हॉकी के खेल को समर्थन देने के लिए आगे आए हैं. मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह गठबंधन अवश्य ही सभी खिलाड़ियों को अपने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में और भी अधिक बेहतर ढंग से खेलने के लिए प्रोत्साहित करेगा.’ ज्ञातव्य है कि सहारा इंडिया परिवार भारतीय हॉकी टीम (सीनियर और जूनियर हॉकी टीम) का 2003 से अधिकृत प्रायोजक है. यह समर्थन भारतीय हॉकी टीम को उस समय दिया गया जब राष्ट्रीय खेल की स्थिति काफी संकटपूर्ण थी. भारतीय हॉकी टीम के प्रायोजक होने के अतिरिक्त सहारा इंडिया परिवार ने भारतीय हॉकी टीम को लखनऊ में चैंपियन्स ट्रॉफी 2003 के लिए उनके प्रशिक्षण शिविर हेतु मेजबानी की. संस्था ने पूरी भारतीय हॉकी टीम के बोर्डिग, लॉजिंग, प्रैक्टिस कैम्प्स और यात्रा का इंतजाम किया था. हॉकी वर्ल्ड कप तैयारी के सिलसिले में सहारा ने जर्मनी में रहने के दौरान सम्पूर्ण टीम के लिए ‘फिटनेस सत्र’ को भी आयोजित किया. उल्लेखनीय है कि सहारा इंडिया परिवार ने वर्ष 2004 में फेडरेशन इंटरनेशनल हॉकी (एफआईएच), विश्व की हॉकी की एपेक्स बॉडी के साथ हाथ मिलाया और 3 वर्षो तक फेडरेशन का चौथा ग्लोबल पार्टनर बना. सहारा इंडिया परिवार ने पूरी भारतीय हॉकी टीम, जिसमें सभी खिलाड़ी और पदाधिकारी थे, पहली बार एशिया कप 2003 जीतने पर सम्मानित किया. प्रत्येक सदस्य को एक रंगारंग कार्यक्रम में 1,51,000 रुपए का नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया. सहारा ने भारतीय हॉकी टीम के सभी खिलाड़ियों, कोच और असिस्टेंट कोच प्रत्येक को दो लाख रुपए बतौर सम्मान में दिए, साथ ही प्रत्येक का बीमा भी कराया, जब भारत ने वर्ष 2010 के वर्ल्ड कप मैच में पाकिस्तान को बुरी तरह से पराजित किया था. राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ियों के वास्तविक हितों के लिए सहारा इंडिया परिवार ने भारतीय हॉकी के खिलाड़ियों को बांटने हेतु एक करोड़ रुपए दिए, जिससे कि वह शान्तिपूर्वक और खुशी से देश के लिए वर्ष 2010 में अभ्यास करें और खेल सकें. यह दौर उस समय का था जब खिलाड़ी वर्ल्ड कप से पूर्व पुणे के शिविर में अपने पारिश्रमिक के लिए जूझ रहे थे.
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