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24 Feb 2012 05:28:28 AM IST
Last Updated : 24 Feb 2012 05:28:28 AM IST

जुगत वोट बैंक में सेंधमारी की

एन के मिश्र
लेखक
पलिया सीट
पलिया सीट के लिए जुगत वोट बैंक में सेंधमारी की

 

सभी दल के नेता वोट बैंक के लिए सेंधमारी कर रहे हैं, ऐसे में पलिया विधानसभा में किस दल का परचम लहरायेगा, अभी कह पाना मुश्किल है.

पलियाकलां-खीरी. तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी वीएम सिंह, लोकदल प्रत्याशी निरवेन्द्र कुमार मुन्ना तथा पीस पार्टी के प्रत्याशी जनार्दन निषाद ने पलिया विधानसभा क्षेत्र से अन्तिम दौर में नामांकन दाखिल कर दिग्गजों की सारी गणित गड़बड़ कर दी है. कई दिग्गज प्रत्याशी जो अभी तक अपने को चुनावी दौर में आगे मान रहे थे, इन प्रत्याशियों के नामांकन के बाद खुद को सहज स्थिति में महसूस नहीं कर रहे हैं.

किसी को भी अपनी स्थिति का आकलन कर पाना मुश्किल हो गया है. उस पर भी मतदाता है कि रुझान खुलकर देने को राजी नहीं है. इस तरह ऊंट किस करवट बैठेगा, कह पाना मुश्किल है.

पलिया सीट नये परिसीमन के आधार पर सृजित नया विधानसभा क्षेत्र है. जिसमें पलिया, बिजुआ तथा बांकेगंज ब्लाकों का क्षेत्र आता है. ये वह ब्लाक हैं जहां कमोबेश हर बिरादरी के मतदाता निवास करते हैं. सपा प्रत्याशी  कृष्ण गोपाल पटेल को लें तो निघासन से मौजूदा विधायक हैं जिसका काफी हिस्सा पलिया विधानसभा क्षेत्र में है. उन्हें कुर्मी यादव मुसलमान, वैश्य व पिछड़ी जातियों का समर्थन मिलता रहा है.

हालांकि मुस्लिम वोट के कुछ कांग्रेस व बसपा में चले जाने से पकड़ हल्की हो गयी है. उधर सिख मतदाता भारी संख्या में उनके साथ था जो वीएम सिंह के आ जाने से कुछ कम होता दिख रहा है. थारू क्षेत्र में भी पटेल की पकड़ कुछ कमजोर पड़ी है फिर भी वे लड़ाई में माने जा रहे हैं.

कांग्रेस प्रत्याशी डा. विनोद तिवारी बाहरी थे लेकिन उन्होंने क्षेत्र में सबसे पहले आकर दस्तक दी. पुराने कांग्रेसियों व अंसतुष्टों को जोड़ा और धीरे-धीरे स्थिति मजबूत कर इस स्थिति में आ पहुंचे कि उन्हें लड़ाई में माना जाने लगा.

राहुल के मिशन और पुराने कर्ज माफी ने उन्हें भी धरातल दिया लेकिन बहुत पुराने कांग्रेसी क्षेत्रीय व तीन बार विधायक रह चुके निरवेन्द्र कुमार मुन्ना ने उन मतदाताओं पर पकड़ बनानी शुरू कर दी जो कांग्रेस के माने जा रहे थे.

तृणमूल प्रत्याशी सरदार वीएम सिंह ने भी कांग्रेस में सेंधमारी की है. फिर उन्हें महंगाई और बाहरी प्रत्याशी होने का दंश भी झेलना पड़ेगा. इस तरह कांग्रेस की स्थिति भी अच्छी नहीं है.

बसपा प्रत्याशी रोमी साहनी चुनावी अखाड़े में बिल्कुल नये हैं तथा सिंधी बिरादरी के हैं. जातिगत वोट तो कम किन्तु बसपा का वोट बैंक उनका माना जा रहा है. स्थिति अभी तक मजबूत भी थी लेकिन निरवेन्द्र कुमार मुन्ना और पीस पार्टी प्रत्याशी जनार्दन निषाद उनके घर में लम्बी सेंध लगा रहे हैं.

भाजपा के प्रत्याशी पूर्व मंत्री तथा इसी क्षेत्र से विधायक रह चुके पटेल रामकुमार वर्मा अपने पुराने कार्यकाल के विकास कार्यो के आधार पर वोट मांग रहे हैं. हालांकि काम करने के बाद क्षेत्र की जनता ने फौरन बाद उन्हें हरा दिया था. लेकिन उसके बाद कोई विकास कार्य नहीं हुआ इसलिए रामकुमार अपने द्वारा किये गये कार्यो को गिनाते हुए वोट देने की बात कर रहे हैं.

पिछले चुनाव में बड़ी संख्या में बड़े सिख फार्मर सिंधी व पंजाबी मतदाता उनके साथ थे. इस बार वीएम सिंह के आ जाने से बड़े सिख फार्मरों ने वीएम सिंह की ओर रुख कर लिया तो रोमी साहनी के आ जाने से सिंधी व पंजाबी बसपा की ओर जाता दिखायी देने लगा है. ऐसे में रामकुमार वर्मा के पास भी पुराने विकास कार्यो के अलावा कोई ठोस आधार नहीं है.

अलबत्ता क्षेत्रीय होने के आधार पर मुन्ना अपने को मजबूत कह रहे हैं. बसपा के मुस्लिम वोट बैंक में आईएमसी प्रत्याशी मीरा सिंह भी सेंध लगा रही हैं. वीएम सिंह बिरादरी के आधार पर चुनाव मैदान में हैं. ऐसे में पलिया विधानसभा में किस दल का परचम लहरायेगा, अभी कह पाना मुश्किल है.

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