इस मतदान में विधानसभा के एक पूर्व अध्यक्ष, चार मंत्रियों, 19 पूर्व मंत्रियों और बेटो की वजह से चार बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है.
प्रथम चरण में फैजाबाद, बस्ती और देवीपाटन मंडलों की 55 सीटों के लिए मतदान होगा. इस चरण में परिसीमन के कारण 11 पुरानी सीटों का अस्तित्व समाप्त हो गया है जबकि 15 सीटे नई हैं. पिछले विधानसभा के चुनाव में 19 सीटें बसपा के पास थी जबकि सपा और कांग्रेस के पास क्रमश: 12 और दो तथा भाजपा के पास एक सीट थी.
केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के पुत्र राकेश वर्मा कांग्रेस के टिकट पर बाराबंकी जिले की दरियाबाद सीट से चुनाव लड़ रहे हैं जबकि बस्ती सदर से कांग्रेस सांसद जगदम्बिका पाल के पुत्र अभिषेक पाल चुनाव मैदान में है. अकबरपुर से सांसद राकेश पाण्डेय के पुत्र रितेश पाण्डेय जलालपुर से प्रत्याशी हैं.
आजमगढ़ से भाजपा सांसद रमाकान्त यादव के पुत्र अरूण यादव अम्बेडकरनगर जिले की जलालपुर सीट से प्रत्याशी है. तकनीकी दृष्टि से तो प्रत्याशी इन नेताओं के पुत्र हैं लेकिन साख बेनी प्रसाद वर्मा, रमाकान्त और जगदम्बिका पाल की दांव पर लगी है.
प्रथम चरण में कम से कम चार बाहुबली चुनाव मैंदान में हैं. इनमें फैजाबाद जिले की गोसाईगंज सीट से चुनाव लड़ रहे अभय सिंह और इन्द्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू खासतौर पर चर्चा में हैं. इन दोनों की वजह से गोसाईगंज सीट अतिसंवेदनशील मानी जा रही है.
विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय के साथ ही चार मंत्रियों लालजी वर्मा (कटेहरी), राम प्रसाद चौधरी (कप्तानगंज), संग्राम सिंह (बाराबंकी), रामहेत भारती (हरगांव) (सु) के क्षेत्र में पहले चरण में ही मतदान होना है.
इसी चरण में दद्दन मिश्रा के क्षेत्र भिन्गा में भी चुनाव है जिन्हे मुख्यमंत्री ने चुनाव की घोषणा के बाद बर्खास्त कर टिकट भी काट दिया था. उन्हें मजबूरन भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में कूदना पड़ा.
शोहरतगढ़ से पति-पत्नी के एक दूसरे के आमने-सामने होने की वजह से इस चरण की रोचकता बढ़ गयी है. साधना चौधरी अपने पति रवीन्द्र चौधरी के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं. रवीन्द्र चौधरी का कहना है कि इन दोनों का तलाक काफी पहले हो गया था.
पहले चरण में सीतापुर जिले की बेहटा, मछरेहटा, बाराबंकी जिले की सिद्धौर, फैजाबाद जिले की सोहावल, अम्बेडकरनगर की जहांगीरगंज (सु), बहराइच जिले की चर्दा (सु), इकौना. गोण्डा जिले की डिक्सिर, सिद्धार्थनगर की नौगढ़ और बस्ती जिले की रामनगर तथा नगर पूर्व सीटें समाप्त होकर इतिहास का विषय बन गयी हैं.
इनके स्थान पर सीतापुर जिले में महोली, सेवता, बाराबंकी जिले में जैदपुर (सु), फैजाबाद जिले की गोसाईगंज, अम्बेडकरनगर जिले की आलापुर (सु), बहराइच की बलहा (सु), मटेरा पयागपुर, श्रावस्ती जिले की श्रावस्ती, गोण्डा जिले की तरबगंज तथा गौरा सिद्धार्थनगर की कपिलवस्तु़, बस्ती जिले की रूधौली और महादेवा नई सीटें बनी हैं.
इस चरण में सर्वाधिक संवेदनशील गोसाईगंज सीट है क्योंकि उस क्षेत्र से लखनऊ के बहुचर्चित जेलर आरके तिवारी हत्याकांड में मुख्य आरोपी अभय सिंह सपा टिकट पर चुनाव मैदान में हैं. इस समय वह एक अन्य मामले में हमीरपुर जेल में बन्द हैं. उनके खिलाफ अपराधिक छवि के इन्द्र प्रताप तिवारी खब्बू बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. इन दोनों के ऊपर कई संगीन मामले दर्ज हैं.
इसी सीट पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी का घर जलाने के आरोपी विधायक जीतेन्द्र सिंह बब्लू के भाई प्रमोद सिंह की पत्नी माधुरी सिंह पीस पार्टी से उम्मीदवार हैं. प्रमोद का भी इस क्षेत्र में काफी दबदबा है. इसी सीट पर फैजाबाद से तीन बार सांसद और मिल्कीपुर सीट से पांच बार विधायक रह चुके मित्रसेन यादव सपा के टिकट पर चुनाव लड रहे हैं.
मित्रसेन यादव को हाल ही में एक स्थानीय अदालत ने गबन के आरोप में दो वर्ष की सजा सुनायी थी हालांकि जिला न्यायाधीश ने इस सजा को फिलहाल स्थगित कर दिया है. श्री यादव को 70 के दशक में आजीवन कारावास की सजा हुई थी. हत्या के आरोप में मिली सजा को राष्ट्रपति ने क्षमा कर दिया था.
बहुचर्चित सांसद रमाकांत यादव के पुत्र के जलालपुर से प्रत्याशी होने के कारण यह सीट भी संवेदनशील हो गई है. बीकापुर सीट से जितेन्द्र सिंह बबलू पीस पार्टी से उम्मीदवार हैं. पिछला चुनाव वह बसपा से जीते थे. वह रीता बहुगुणा जोशी का घर जलाने के आरोपी हैं. इसलिए आयोग की इस सीट पर भी खास नजर है. इस चरण में सीतापुर की सेवता से चुनाव लड़ रही रंजना वाजपेयी भी महत्वपूर्ण उम्मीदवारों में शामिल हैं. रंजना राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रह चुकी हैं.
पूर्व मंत्रियों में अम्मार रिजवी, अरविन्द सिंह गोप, राकेश कुमार वर्मा, अवधेश प्रसाद, अनिल तिवारी, मुन्ना सिंह चौहान, लल्लू सिंह, सीताराम निषाद, डा. मसूद अहमद, डा. वकार अहमद शाह, दद्दन मिश्रा, अनुमंत सिंह, रमापति शास्त्री, विनोद कुमार सिंह पंडित, योगेन्द्र प्रताप सिंह, श्रीराम चौहान, राजकिशोर सिंह, और रामकरन आर्य की किस्मत दांव पर लगी है. महत्वपूर्ण उम्मीदवारों में भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हरीश द्विवेदी भी हैं जो बस्ती सदर से चुनाव लड़ रहे हैं.
पहले चरण में आलापुर (सु) से चुनाव लड़ रहे बसपा के जोनल कोआर्डिनेटर त्रिभुवन दत्त बाहुबली हरीशंकर तिवारी के पुत्र विनय शंकर त्रिपाठी की उम्मीदवारी भी सुर्खियों में है. यूं तो अयोध्या सदैव सुर्खियों में रहती है लेकिन इस बार इस सीट को किन्नर बिन्दू ने रोचक बना दिया है. वह जिधर से निकलता है उसके साथ देश के कोने-कोने से आये किन्नरों की टोली खासतौर पर आकषर्ण का केन्द्र बनी हुई है.
डुमरियागंज से मलिक तौफीक अहमद पिछला चुनाव बसपा के टिकट पर जीते थे. उनकी मृत्यु के बाद उपचुनाव में उनकी पत्नी तौफीक खातून जीती लेकिन इस चुनाव में पत्नी के बजाय उनकी बेटी सैयदा खातून बसपा प्रत्याशी हैं. अपनी-अपनी पार्टी के प्रत्याशियों को जिताने के लिये अब तक पूर्व प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी, राहुल गांधी, नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह, उमा भारती, कल्याण सिंह, मुलायम सिंह यादव, मायावती, सतीश चन्द्र मिश्र, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, अखिलेश यादव, शिवपाल सिंह यादव, हेमामालिनी, कलराज मिश्र, शत्रुघ्न सिन्हा, दिग्विजय सिंह, राज बब्बर, नगमा, किरीट सोमैया, प्रमोद तिवारी और रीता बहुगुणा चुनाव प्रचार कर चुके हैं.
प्रचार के केन्द्र में स्थानीय मुद्दों के अलावा मुख्यरूप से मंहगाई भ्रष्टाचार विकास और घोटाले रहे. इन्हें लेकर नेताओं ने एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाए. मूर्तियां और पार्क भी चर्चा के विषय रहे. प्रथम चरण में जिन सीटों पर मतदान होगा उनमें महोली, सीतापुर, हरगांव (सु), लहरपुर, बिसवां, सेवता, महमूदाबाद, सिधौली (सु), मिश्रिख (सु), कुर्सी, रामनगर, बाराबंकी, जैदपुर (सु) दरियाबाद, रूदौली, हैदरगढ (सु), मिल्कीपुर (स).
बीकापुर, अयोध्या, गोसाईगंज, कटेहरी, टांडा, आलापुर (सु), जलालपुर, अकबरपुर, बलहा (सु), नानपारा, मटेरा, महसी, बहराइच, पयागपुर, कैसरगंज, भिनगा, श्रावस्ती, तुलसीपुर, गैसरी, उतरौला, बलरामपुर (सु), मेहनौन, गोंडा, कटरा बाजार, कर्नलगंज, तरबगंज, मनकापुर (सु) गौरा, सोहरतगढ़, कपिलवस्तु (सु), बांसी, इटवा, डुमरियागंज, हरैया, कप्तानगंज, रू धौली, बस्ती सदर और महादेवा (सु) सीटें शामिल हैं.