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मंगलवार, 22 मई, 2012 |
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07 Feb 2012 09:24:02 AM IST
Last Updated : 07 Feb 2012 09:40:58 AM IST

मतदाताओं के मेले में महिला मतों को लेकर मारामारी

शिव त्रिपाठी
एसएनबी संवाददाता
महिला मतदाताओं को लुभाने की कोशिश
महिला मतदाताओं को लुभाने की कोशिश में जुटे हैं प्रत्याशी.

 

पार्टियों ने भले ही महिलाओं की दावेदारी को गंभीरता से न लिया हो लेकिन वे इस चुनाव में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभा रही हैं.

जीवन के हर क्षेत्र में कामयाबी के नये कीर्तिमान गढ़ रहीं महिलाएं वोट डालने में तो पुरुषों से आगे रहती ही हैं, चुनाव प्रचार में भी खासी भूमिका अदा कर रही हैं. दरअसल, मतों के इस मेले में महिला मतदाता अबकी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी. उनमें जागरूकता तो बढ़ी ही है, इस बार उनकी तादाद भी अच्छी खासी बढ़ गयी है. सो, उन्हें रिझाने के लिए पार्टियां और उनके प्रत्याशी मुफीद तरकीब ईजाद करने में लगे हैं.

महिला मतदाताओं को रुख अपनी ओर करने के लिए महिलाओं को ही मोर्चे पर लगाया जा रहा है. कई उम्मीदवारों की पत्नियां और बेटियां-भाभियां ‘चूल्हा-चौका’ को कुछ दिनों के लिए दरकिनार कर वोट मांगने के लिए दर-दर दस्तक दे रही हैं. सहेलियों-समर्थकों को लेकर सुबह निकलती हैं तो देर रात ही घर की वापसी होती है.

वैसे बड़ी पार्टियों ने महिलाओं को टिकट देने के मामले में कंजूसी बरती है. कांग्रेस और बसपा ने केवल एक-एक, जबकि भाजपा और सपा ने दो-दो महिलाओं को प्रत्याशी बनाया है. कांग्रेस ने बारा (सुरक्षित) सीट पर मंजू संत को प्रत्याशी बनाया है और बसपा ने इलाहाबाद पश्चिमी में विधायक श्रीमती पूजा पाल को फिर मैदान में उतारा है.

भाजपा ने सोरांव (सुरक्षित) विधानसभा क्षेत्र में श्रीमती निर्मला पासवान को और करछना में पूर्व उप महापौर श्रीमती अनामिका चौधरी सियासी समर में आजमाया है. उधर सपा ने कोरांव (सुरक्षित) सीट पर श्रीमती दीपांशु कोल को और प्रतापपुर में पूर्व विधायक श्रीमती विजमा यादव को मोर्चे पर लगाया है.

इनमें श्रीमती पूजा पाल पति विधायक राजू पाल की हत्या के बाद इलाहाबाद पश्चिमी से दो बार चुनाव लड़ चुकी हैं. पहली बार शिकस्त और दूसरी बार जीत मिली. इस क्षेत्र में इस बार अन्य पार्टियों से कई महिलाएं टिकट की दावेदार रहीं लेकिन उन पर न जाने क्यों नहीं भरोसा किया गया.

ऐसे में श्रीमती कुसुमलता आर्य ने भाजपा छोड़कर जद-यू का दामन थामा और उसी के टिकट पर भाग्य आजमा रही हैं. यहां से श्रीमती पूनम संत भी तृणमूल कांग्रेस की प्रत्याशी की हैसियत से मतदाताओं के सामने हैं.

प्रतापपुर से सपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहीं श्रीमती विजमा यादव के लिए यह चौथा चुनाव है. झूंसी विधानसभा क्षेत्र से वह दो बार जीत हासिल कर चुकी हैं.

कोरांव से सपा प्रत्याशी श्रीमती दीपांशु कोल और बारा से कांग्रेस उम्मीदवार श्रीमती मंजू संत पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ रही हैं. भाजपा प्रत्याशी के रूप में करछना से अनामिका चौधरी और सोरांव से श्रीमती निर्मला पासवान भी पहली बार विधानसभा चुनाव मैदान में उतरी हैं.

बहरहाल, टिकट के मामले में पार्टियों ने भले ही महिलाओं की दावेदारी को गंभीरता से लिया हो, लेकिन उनके वोट पर उनकी पैनी नजर है. इलाहाबाद की सभी विधानसभा सीटों पर इस साल महिला मतदाताओं की तादाद में खासा इजाफा हुआ है. इस मामले में शहर उत्तरी अव्वल है.

2007 के मुकाबले इस साल इस विधानसभा क्षेत्र में 46 हजार 767 महिला मतदाता बढ़ी हैं. जाहिर है कि इनमें ज्यादातर नयी उम्र और नयी सोच की होंगी सो उनका फैसला अहम ही होगा. वैसे भी यह क्षेत्र बुद्धिजीवियों और पढ़े-लिखे लोगों का माना जाता है.

शहर उत्तरी में पिछले विधानसभा चुनाव में महिला वोटरों की संख्या एक लाख पांच हजार 334  थी जो इस बार बढ़कर एक लाख 52 हजार 101 हो गयी है. उधर, शहर दक्षिणी में 43926 ऐसी नयी महिला मतदाता होंगी जो पहली बार अपने वोट का इस्तेमाल करेंगी. इस विधानसभा क्षेत्र में 2007 में कुल 96996 महिला वोटर थीं और अब इनकी संख्या बढ़कर एक लाख 40 हजार 922 हो गयी है.

शहर पश्चिमी में भी 40 हजार से ज्यादा महिला मतदाताओं की तादाद बढ़ गयी है. पिछले चुनाव में महिला वोटरों की संख्या यहां एक लाख 10 हजार 784 थी. अब यह तादाद बढ़कर एक लाख 50 हजार 983 हो गयी है. इस तरह देखा जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले शहर में महिला मतदाताओं की तादाद में ज्यादा इजाफा हुआ है.

शहर से सटे फाफामऊ विधानसभा क्षेत्र में महिला वोटरों की संख्या 28060 बढ़ी है, जबकि सोरांव में यह तादाद 28837 है. फाफामऊ में 2007 में कुल एक लाख आठ हजार 402 महिला मतदाता थीं, अब उनकी संख्या एक लाख 36 हजार 462 हो गयी है. सोरांव में इस बार एक लाख 42 हजार 214 महिलाओं को वोट डालने का अधिकार होगा.

पिछले विधानसभा चुनाव में यह संख्या एक लाख 13 हजार 337 ही थी. परिसीमन के बाद अस्तित्व में आये फूलपुर विधानसभा सीट पर इस बार एक लाख 36 हजार 186 महिलाएं वोट डाल सकेंगी. पिछले चुनाव में यहां महिला मतदाताओं की संख्या केवल एक लाख दो हजार 722 थी. पहले इस विधानसभा क्षेत्र को झूंसी के नाम से जाना जाता था.


गंगापार के ही प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र में इस मर्तवे एक लाख 39 हजार 363 महिलाओं को वोट डालने का मौका मिला है. वैसे वहां केवल 23 हजार 919 महिला वोटर नयी होंगी. पिछले चुनाव में प्रतापपुर में महिला वोटरों की तादाद एक लाख 55 हजार 444 रही. प्रतापपुर के मुकाबले हंडिया में महिला वोटरों की संख्या ज्यादा बढ़ी है.

हंडिया में इस बार 29 हजार 42 महिलाओं को पहली बार वोट डालने का मौका मिलेगा. नये परिसीमन के तहत भदोही जिले के कुछ हिस्से को जोड़कर बने इस विधानसभा क्षेत्र में इस चुनाव में कुल एक लाख 40 हजार से ज्यादा महिलाएं वोट डाल सकेंगी. पिछले चुनाव में यहां महिला मतदाताओं की कुल गिनती एक लाख 11 हजार 29 थी.

उधर यमुनापार के चार विधानसभा क्षेत्रों में कोरांव नया विधानसभा क्षेत्र है. यह सीट सुरक्षित है. इसे बारा, करछना और करछना के हिस्सों को जोड़कर बनाया गया है. यहां केवल 23 हजार तीन सौ ऐसी महिलाएं होंगी जो अपने वोट का इस्तेमाल पहली बार कर सकेंगी. यहां कुल महिला मतदादाओं की संख्या एक लाख 34 हजार 24 है. उधर मेजा के वोटरों में 28 हजार 738 महिलाओं की तादाद बढ़ी है. यहां कुल वोटरों की संख्या इस बार एक लाख 23 हजार 661 है. पिछले चुनाव में यह संख्या 94 हजार 923 ही थी.

करछना में 33 हजार 862 महिला वोटर बढ़ गये हैं. यमुनापार के ही बारा विधानसभा इलाके के वोटरों में भी 30 हजार 208 महिलाएं बढ़ चुकी हैं. इस सुरक्षित सीट पर इस बार एक लाख 31 हजार 25 महिलाओं को वोट देने का अधिकार मिला है. पिछले चुनाव में यह संख्या एक लाख 817 थी.

कुल मिलाकर इस विधानसभा चुनाव में महिला वोटरों की तादाद में कुल चार लाख आठ हजार 322 का इजाफा हुआ है. पिछले चुनाव में 12 लाख 70 हजार 714 महिलाओं को वोट डालने का अधिकार था और इस बार यह संख्या बढ़कर 16 लाख 40 हजार 24 हो चुकी है. 

कैबिनेट मंत्री और इलाहाबाद दक्षिणी से बसपा प्रत्याशी नंदगोपाल गुप्ता ‘नंदी’ की पत्नी श्रीमती अभिलाषा गुप्ता हर रोज महिलाओं की टोली लेकर घर-घर पहुंच रही हैं. श्रीमती गुप्ता अपने पति पर हुए हमले का भी जिक्र करती हैं.

इसी क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे महापौर चौधरी जितेन्द्र नाथ सिंह की पत्नी श्रीमती विनीता सिंह भी पति की जीत के लिए दिन-रात एक किये हुए हैं. उधर, इलाहाबाद उत्तरी में भाजपा प्रत्याशी उदयभान करवरिया की पत्नी श्रीमती नीलम क रवरिया ने जोर लगा रखा है तो कांग्रेस प्रत्याशी विधायक अनुग्रह नारायण सिंह की पत्नी श्रीमती गीता सिंह भी पूरी मुस्तैदी से जनसम्पर्क अभियान में डटी हैं.

इलाहाबाद पश्चिमी में कांग्रेस प्रत्याशी रवि प्रकाश की पत्नी श्रीमती रीता भारतीय और भाजपा प्रत्याशी रामजी केसरवानी की पत्नी श्रीमती रेनू केसरवानी ने भी खासा दम लगा रखा है.  


 

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