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चेहरे के साथ-साथ शरीर के सभी अंगों की सुंदरता मायने रखती है। ऐसे में पैरों की उपेक्षा लोगों में आपकी छवि को धूमिल भी कर सकती है। कई बार पैरों की उपेक्षा एड़ियों की बिवाई के रूप में सामने आती है। एड़ियों की बिवाई यानी एड़ियों का फटना दर्द देने के साथ-साथ व्यक्तित्व पर भी असर डालता है। जाड़े के दिनों में जब एड़ियों की त्वचा ज्यादा खुश्क और सूखी हो जाती है तो यह फटने लगती है। फटने के साथ-साथ यह मोटी और खुरदुरी भी हो जाती है। ऐसे में अगर वक्त रहते एड़ियों का ख्याल नहीं रखा जाए तो इनसे खून भी निकलने लगता है और चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है।
सर्दियों के मौसम में पैरों की त्वचा खुश्क हो जाती है और पसीना निकलना बंद हो जाता है। पसीना बंद होने से त्वचा मॉइश्चराइज नहीं हो पाती और एड़ियां फटने लगती हैं। ठंड में शरीर में खून की सप्लाई कम होना भी एड़ियां फटने का एक कारण माना जाता है।
एड़ियों की बिवाई का फटना एक सामान्य सौंदर्य समस्या हो सकती है लेकिन इससे गंभीर समस्या भी पैदा हो सकती है। यह समस्या तब सामने आती है जब एड़ियों के नीचे की बाहरी सतह की त्वचा कड़ी और सूखी हो जाती है। कभी-कभी तो बिवाई इतनी गहरी हो जाती है कि उसमें दर्द होने लगता है और खून निकलने लगता है।
एड़ियों की बिवाई किसी को भी प्रभावित कर सकती है, लेकिन यह ज्यादातर सूखी हवा में रहने, मोटापे से, लगातार खाली पैर चलने, एड़ियों की तरफ से खुले चप्पल, जूते या सैंडिल पहनने या फिर पसीने की निष्क्रिय ग्रंथियों की वजह से होता है।
अगर बिवाई का जल्द इलाज न करवाया जाए तो यह बेहद खतरनाक भी हो सकती है। एड़ियां अगर गहराई तक फट जाएं तो वह संक्रमित भी हो सकती है। मधुमेह के मरीजों में भी एड़ियों का फटना एक बड़ी परेशानी माना जाता है।
एड़ियों को फटने से बचाने के लिए पैरों को नियमित रूप से नमीयुक्त बनाना चाहिए। पैरों को गुनगुने पानी से धोएं और एड़ियों को साफ रखे। मोजे और जूते पहनकर रखें। विटामिन ‘ए’ और ‘ई’ का सेवन करें। जितना हो सके हरी सब्जियां खाएं। दिन में दो बार क्रीम लगाएं।
इन एहतियात के बाद भी अगर एड़िया फट जाएं तो तुरंत विशेषज्ञों की सलाह लें, जिससे फटी एड़ियां जल्द ठीक हो सकें।