कोलकाता। यहां दिवालिया मामलों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर कोलकाता उच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप करते हुए दिवालिया मामलों के पंजीयक (आरओआई) से कहा है कि वह अगले आदेश तक दिवालिया घोषित करने संबंध कोई आवेदन स्वीकार नहीं करे।
न्यायाधीश संजीव बनर्जी ने कोटक महिंद्रा बैंक की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। आरओआई का कार्यालय उच्च न्यायालय में ही है। आरओआई व आधिकारिक रूप से ऐसे मामले दर्ज करने वाले अधिकारी को निर्देश दिया है कि वह अगले आदेश तक दिवालिये का कोई आवेदन स्वीकार नहीं करें।
कोटक ने अदालत में दस्तावेज दाखिल करते हुए कहा कि पिछले तीन साल में।,000 से अधिक व्यक्तियों को दिवालिया घोषित किया गया। जिसका मतलब है कि ये लोग बैंकों का ऋण नहीं चुकाएं और नही क्रेडिट कार्ड का बकाया चुकाएंगे।
विभिन्न बैंकों की आ॓र से हाजिर वकील परीतोष सिन्हा ने अदालत में एक अन्य मामला पेश करते हुए बताया कि राज्य में वकीलों तथा एजेंटों का एक गुट काम कर रहा है जो अदालती आदेशों के माध्यम से इस तरह के लोगों को राहत दिलाने का आश्वासन देता है। बैंकों ने इस कथित गुट की जांच करवाने का आग्रह किया है।