
|
काठमांडू। नेपाल के एकमात्र राजाशाही समर्थक दल राष्ट्रीय प्रजातांत्रिक पार्टी-नेपाल (आरपीपी-नेपाल) ने राजसत्ता की बहाली की मांग को लेकर सोमवार को काठमांडू बंद का आह्वान किया है।
इसके नेता और काठमांडू के पूर्व महापौर राजाराम श्रेष्ठ ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि राष्ट्रहित के तीन मुद्दों पर सरकार जनमत संग्रह करवाए। ये मुद्दे हैं राजशाही, हिंदू राष्ट्र और संघवाद।‘
उल्लेखनीय है कि नेपाल में नए संविधान को लागू होने में 100 से भी कम दिन बचे हैं, जिससे यह तय हो जाएगा कि नेपाल एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनेगा या हिंदू राष्ट्र।
दो साल पहले नेपाल में संविधान सभा के चुनाव हुए थे, जिसके सदस्यों ने राजशाही को खत्म करके स्वायत्त राज्यों को मिलाकर राष्ट्र के गठन के पक्ष में मत दिया था। इससे पहले नेपाल के आखिरी राजा ज्ञानेंद्र को अपना पद छोड़ना पड़ा था।
राजशाही समर्थक दल ने संविधान सभा के निर्णय को मानने से इंकार करते हुए कहा कि इसका चुनाव नया संविधान बनाने के लिए हुआ है और यह राष्ट्रीय हितों वाले मुद्दों पर निर्णय नहीं कर सकती।
आरपीपी-नेपाल ने एक साल पहले एक हस्ताक्षर अभियान चलाया था, जिसमें 20 लाख लोगों ने इन्हीं तीनों मुद्दों पर जनमत संग्रह की मांग की थी।
श्रेष्ठ कहते हैं कि बड़ी पार्टियां भी जनमत संग्रह चाहती हैं, लेकिन वे दबाव में चुप हैं।
नेपाल के राज परिवार के खिलाफ 10 साल की लड़ाई लड़ने वाले माओवादियों का दल यहां सबसे बड़ा है और ये राजशाही और हिंदू राष्ट्र के घोर विरोधी हैं।
राजा ज्ञानेंद्र के शासन में गृह मंत्री रहे और आरपीपी-नेपाल के प्रमुख कमल थापा कहते हैं कि यदि नए संविधान को लागू करने से पहले जनमत संग्रह नहीं कराया गया, तो जनता इसे अस्वीकार कर देगी।
थापा ने कहा कि उनकी पार्टी की मांग अपदस्थ राजा ज्ञानेंद्र की वापसी नहीं बल्कि राजशाही की बहाली है।