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गुवाहाटी। भारतीय रेल ने देश के अति वांछित आतंकी, परेश बरुआ को तीन दशकों तक कार्यालय में अनुपस्थित रहने पर अंतत: नौकरी से बर्खास्त कर दिया है।
प्रतिबंधित युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के स्वयंभू कमांडर इन चीफ, परेश बरुआ को पूर्वी असम के तिनसुकिया प्रखण्ड में उत्तर पूर्व सीमावर्ती रेलवे में वर्ष 1978 में एक पोर्टर के रूप में नियुक्त किया गया था।
लेकिन जनवरी 1980 से ही बरुआ अपने काम पर नहीं गया है। गुवाहाटी से पूर्व लगभग 500 किलोमीटर दूर स्थित तिनसुकिया जिले के एक गांव जरैगांव का निवासी बरुआ आज एक हिंसक व्यक्ति के रूप में कुख्यात है और उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी हो चुका है और इंटरपोल को उसकी तलाश है। असम पुलिस के अनुसार पकड़े जाने पर उसे अधिकतम मौत की सजा हो सकती है।
बरुआ को नौकरी से निकाले जाने की औपचारिक अधिसूचना गुरुवार को जारी की गई। तिनसुकिया रेलवे स्टेशन के सूचना पट्ट पर इससे संबंधित एक आदेश चस्पा कर दिया गया है।
ज्ञात हो कि पिछले वर्ष पहली दिसंबर को खबर दी गई थी कि बरुआ अभी भी रेलवे का एक पंजीकृत कर्मचारी है। उस खबर के बाद रेल मंत्रालय हरकत में आया और उसे बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, सबसे पहले सुनवाई के लिए दो तारीखें तय की गईं और उसके दो सप्ताह बाद जब कोई उस पद पर दावा करने के लिए नहीं आया, तो सरकारी प्रक्रिया के अनुसार बरुआ को बर्खास्त कर दिया गया।
वर्ष 1978 में खेल कोटे के तहत उसे 370 रुपये प्रति माह के वेतन पर पोर्टर की नौकरी प्रदान की गई थी। वह फुटबाल का खिलाड़ी था। उस समय उसकी उम्र 21 वर्ष थी।
उसके बाद बरुआ ने अप्रैल 1979 में अरविंद राजखोवा सहित पांच अन्य के साथ मिल कर उल्फा का गठन किया। राजखोवा फिलहाल गुवाहाटी की एक जेल में है।