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19 Feb 2010 07:06:01 PM IST
Last Updated : 30 Nov -0001 12:00:00 AM IST

भाजपा ने लिया 2014 तक सत्ता में वापसी का संकल्प


बड़े नेताओं को गांव में करना होगा काम तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन संपन्न इंदौर। लगातार दो लोकसभा चुनाव में हार का सामना करने के बाद अपने वोट प्रतिशत में दस फीसदी की वृद्धि करने, 2014 तक सत्ता में वापसी और पार्टी नेतृत्व में पीढ़ीगत परिवर्तन पर औपचारिक मुहर लगाने के साथ ही भाजपा का तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन आज यहां संपन्न हो गया। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन गडकरी ने चेतावनी भरे अंदाज मे कहा है कि अब हवा-हवाई से काम नहीं चलेगा, नेता कितना भी बड़ा हो उसे गांव मे जाकर काम करना ही होगा। इंदौर में राष्ट्रीय अधिवेशन के अंतिम दिन राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रस्तावों को पारित किए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को दिल्ली के चक्कर काटने की जरूरत नहीं हैं। कार्यकर्ता हो या नेता उसे गांव में काम करना होगा। इतना ही नहीं किसी के कहने पर चुनाव में टिकट नहीं दिए जाएंगे। उन्होंने आगामी कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि अंत्योदय समिति और प्रशिक्षण योजना बनाई जाएगी। महंगाई के खिलाफ एक मार्च से हस्ताक्षर अभियान शुरू किया जाएगा। 21 अप्रैल को महंगाई को लेकर संसद पर प्रदर्शन होगा। नितिन गडकरी ने अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार राम मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी अयोध्या में भव्य मंदिर के निर्माण के प्रति दृढ़ है। साथ ही उन्होंने इसे मुसलमानों के साथ बातचीत के जरिए बनाने की पेशकश करते हुए कहा कि अगर मुसलमान सहृदयता दिखा कर विवादास्पद स्थल पर अपना दावा छोड़ दें तो आसपास जमीन उपलब्ध होने पर भव्य मस्जिद बनाने में भाजपा सहयोग करेगी। इस विषय पर अध्यक्ष बनने के बाद चुप्पी साधने वाले गडकरी ने कहा कि अगर वह आज भी इस पर नहीं बोलते तो मीडिया कहता कि भाजपा ने इस मुद्दे को छोड़ दिया है। इसके साथ ही भाजपा ने लगातार हार से निराश अपने कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के लिए महंगाई और जम्मू-कश्मीर को स्वायत्तता देने के कथित प्रयासों के खिलाफ इसी माह से देश भर में बड़े पैमाने पर जनांदोलन छेड़ने की घोषणा की। गडकरी और पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी दोनों ने चेतावनी दी कि अगर जम्मू कश्मीर को स्वायत्तता देने के नाम पर 1953 से पहले की 'एक देश, दो विधान, दो निशान, दो प्रधान' जैसी स्थिति लाने की कोशिश की गई तो देश भर में ऐसा राजनीतिक संघर्ष छेड़ा जाएगा जैसा पहले कभी नहीं हुआ। सरकार पर मुसलमानों को राजनीति में भी आरक्षण देने का षड्यंत्र रचने का आरोप लगाते हुए अधिवेशन में रंगनाथ मिश्र आयोग की रिपोर्ट का भी जिक्र किया गया। अधिवेशन में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि इस रिपोर्ट से अनुसूचित जाति और जनजातियों के मन में डर है कि अगर यह सिफारिश लागू हो गई तो उनका आरक्षण कम हो जाएगा। अधिवेशन में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि अन्य पिछड़ा वर्ग में मुसलमानों का आरक्षण 8.4 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी करने की सिफारिश और दलित मुसलमानों तथा इसाइयों को आरक्षण देने की सिफारिश भी एक बहुत बड़ी सोची समझी राजनीतिक साजिश है। प्रस्ताव में कहा गया कि अगर दलित ईसाइयों और मुसलमानों को आरक्षण मिल गया तथा अन्य पिछड़े वर्गो को मिले 27 फीसदी के आरक्षण में मुसलमानों का आरक्षण 8.4 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी किया गया तो इससे विधानसभाओं, संसद तथा अन्य निर्वाचित संस्थाओं में मुसलमानों को एक तरह से राजनीतिक आरक्षण मिल जाएगा।


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