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नयी दिल्ली। व्याख्याताओं के लिए नई पात्रता संबंधी मामले की चुनौती देने वाले नोटिस का जवाब नहीं देने पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
न्यायाधीश संजय किशन कौल और न्यायाधीश वीणा बीरबल की खंडपीठ ने यूजीसी पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया। खंडपीठ ने कहा कि अवसर दिए जाने पर भी यूजीसी ने हलफनामा दायर नहीं किया।
खंडपीठ ने कहा, ‘यह महत्वपूर्ण मसला था और यूजीसी ने जवाब देने में लापरवाही बरती।‘
न्यायालय ने यूजीसी को अंतिम मौका देते हुए 17 फरवरी तक जवाब देने के लिए कहा है। न्यायालय ने गुरुवार को अखिल भारतीय शोधकर्ता समन्वय समिति द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया। समिति की ओर से न्यायालय में वकील केसी मित्तल उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि नए नियम के अनुसार राष्ट्रीय पात्रता जांच परीक्षा (नेट) उत्तीर्ण करने वाले उम्मीदवार ही व्याख्याता पद के लिए योग्य माने जाएंगे। याचिकाकर्ता ने इसी नियम को चुनौती दी।
याचिकाकर्ता का कहना है कि एम फिल या पीचएडी धारी भी व्याख्याता पद के योग्य माने जाना चाहिए। यूजीसी द्वारा 2006 में लागू नियम में भी ऐसी बात कही गई थी।