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26 May 2013 06:58:16 AM IST
Last Updated : 26 May 2013 06:58:16 AM IST

देशी गाय की नस्ल में सुधार

देशी गाय की नस्ल में सुधार

बीकानेर (एसएनबी)। बीकानेर स्थित राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ वैटरनिटी एंड एनिमल रिसर्च ने देशी गाय की ऐसी कई नस्लों का विकास किया है जो अब विदेशी जर्सी गायों के बराबर दूध देती हैं। इस विश्वविद्यालय के उप कुलपति एके गहलोत का कहना है कि गाय की इन नई नस्लों के संवद्धन से निकट भविष्य में राज्य का दूध उत्पादन दोगुना हो सकता है। विश्वविद्यालय अपने बीकानेर, जैसलमेर तथा हनुमानगढ़ अनुसंधान केंदों पर राठी, थारपाकर, गीर तथा काकारेज गाय की नस्लों में सुधार कर रहा हैं। यह कार्य राष्टीय कृषि विकास परियोजना के अंतर्गत हो रहा है। गहलोत का कहना है कि नस्ल के सुधार के अभाव में देश में विदेशी गाय के आयात को बढ़ावा मिल रहा था, क्योंकि यह पतिदिन लगभग 25 लीटर तक दूध देती है। बीकानेर अनुसंधान केंद पर थार पारकर नस्ल की गाय की नस्ल में इतना सुधार हो गया है कि यह पतिदिन 24 से 25 लीटर दूध देने लगी है। राठी गाय की नस्ल में सुधार करने के बाद अब यह पतिदिन 25 लीटर से भी अधिक दूध देने लगी है। पहले यह अधिकतम 15 लीटर दूध पतिदिन देती थी।

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