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सोमवार, 21 मई, 2012 |
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17 Feb 2012 12:19:30 PM IST
Last Updated : 17 Feb 2012 12:41:59 PM IST

दिल्लीवाले कमाने-खाने में भी सबसे आगे

खाने की थाली (फाइल फोटो)
दिल्लीवाले कमाने-खाने में सबसे आगे

 

राजधानी दिल्ली के दिलवाले पैसा कमाने और खाने में देश में सबसे आगे हैं. अपनी कमाई का 36 प्रतिशत ये खान-पान पर खर्च कर देते हैं.

दिल्ली में सबसे अधिक प्रति व्यक्ति आय के अलावा सबसे अधिक मासिक प्रति व्यक्ति व्यय एमपीसीई है. इसके अलावा राजधानी के 15.31 प्रतिशत लोग इंटरनेट का प्रयोग करते हैं तथा 64.36 प्रतिशत परिवारों के पास अपने आवास हैं. यह खुलासा दिल्ली में परिवारों के उपभोक्ता व्यय पर जारी एक रिपोर्ट से हुआ है.

दिल्ली सरकार के अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय द्वारा परिवारों के उपभोक्ता व्यय पर तैयार की गई इस रिपोर्ट को बुधवार की शाम मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने जारी किया. यह रिपोर्ट जुलाई 2009 से जून 2010 के दौरान राष्ट्रीय प्रतिदर्शी सर्वेक्षण के दौरान कराए गए नमूनों के सर्वेक्षण पर आधारित है.

मुख्यमंत्री ने इस रिपोर्ट के आंकड़ों को दिल्ली की आर्थिक खुशहाली का प्रतीक बताया है. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट से कई ऐसे संकेत मिलते हैं जिनसे आर्थिक खुशहाली और व्यय की प्राथमिकताओं का पता चलता है. उन्होंने कहा कि दिल्ली औसत व्यय के मामलों में अन्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुकाबले बहुत बेहतर स्थिति में है.

राष्ट्रीय स्तर पर शहरी क्षेत्र में मासिक प्रति व्यक्ति व्यय एमपीसीई 1,984 रुपए है जबकि दिल्ली में यह 2,905 रुपए है जो कि देश में सबसे अधिक है. इसके बाद हिमाचल प्रदेश का स्थान है जहां यह आंकड़ा 2,654 रुपए है. अन्य उत्तरी शहरों के शहरी इलाकों में हरियाणा में 2,321 रुपए, राजस्थान में 1,663 रुपए, उत्तरप्रदेश 1,574 रुपए, पंजाब में 2,109 रुपए, उत्तराखंड में 1,745 रुपए, जम्मू कश्मीर 1,759 रुपए है.

रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट होता है कि दिल्ली में कुल परिवारों में से 51 प्रतिशत परिवारों की एमपीसीई 2,501 रुपए से अधिक है, 46 प्रतिशत 1,001 से 2,500 के बीच और महज तीन प्रतिशत का 1,000 रुपए से कम है. शहरी क्षेत्रों में एमपीसीई का लगभग 36 प्रतिशत भाग खानपान की वस्तुओं पर और शेष गैर खानपान की वस्तुओं पर लगता है.

खानपान की वस्तुओं में लगभग 10 प्रतिशत दूध और दुग्ध उत्पाद पर, सात प्रतिशत अनाज और दालों पर, दो प्रतिशत खाना पकाने के तेल पर, चार प्रतिशत सब्जियों पर और दो प्रतिशत फलों पर खर्च किया जाता है. जबकि गैर खानपान की वस्तुओं में आठ प्रतिशत ईधन पर, छह प्रतिशत कपड़ों और बिस्तर पर, नौ प्रतिशत शिक्षा पर, दो प्रतिशत चिकित्सा और सात प्रतिशत किराए पर खर्च होता है.

राष्ट्रीय स्तर पर शहरी क्षेत्र में एमपीसीई का 39 प्रतिशत खानपान की वस्तुओं पर और 61 प्रतिशत गैर खानपान की वस्तुओं पर लगता है. रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में कुल परिवारों के 90 प्रतिशत से अधिक खाना पकाने के लिए रसोई गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि 4.81 प्रतिशत मिट्टी के तेल पर और 1.62 प्रतिशत लकड़ी पर निर्भर हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली के कुल परिवारों में से 64 प्रतिशत अपने आवास में रह-रहे हैं और 31 प्रतिशत किराए के मकान में हैं. कुल परिवारों में से 5.61 लाख परिवार यानी 15.31 प्रतिशत के घर में इंटरनेट कनेक्शन है. 

रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में परिवारों का औसत आकार 4.5 व्यक्ति से कम है और प्रति परिवार बच्चों की औसत संख्या 1.17 बनती है. शहरी क्षेत्र में 97.29 प्रतिशत जनसंख्या रह-रही है. व्यवसाय के आधार पर परिवारों का वर्गीकरण करें तो पता चलता है कि 49 प्रतिशत नियमत वेतन और मजदूरी प्राप्त कर रहे हैं, 40 प्रतिशत का अपना रोजगार है, चार प्रतिशत कामगार श्रेणी में हैं और सात प्रतिशत का व्यवसाय अन्य व्यवसायिक श्रेणी में आता है.

रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में 90.12 प्रतिशत साक्षरता है. इनमें से 16 प्रतिशत ने प्राथमिक शिक्षा तक, 27 प्रतिशत ने मिडल और सैकण्डरी शिक्षा स्तर तक, 13 प्रतिशत ने हॉयर सैकण्डरी स्तर तक और 20 प्रतिशत ने स्नातक और स्नातकोत्तर तक शिक्षा प्राप्त की. रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में लगभग सात प्रतिशत परिवारों की मुखिया महिलाएं हैं.

महिलाओं की कुल जनसंख्या 75.64 लाख है जिनमें से 50 प्रतिशत इस समय विवाहित, छह प्रतिशत विधवा और 0.18 प्रतिशत तलाकशुदा या अलग रहने वाली महिलाएं हैं. इसके अलावा शहरी क्षेत्र में अनाज की प्रति व्यक्ति मासिक खपत 8.23 किलोग्राम है जबकि राष्ट्रीय स्तर का यह आंकड़ा 9.39 किलोग्राम है. शहरी दिल्ली में चावल की प्रति व्यक्ति खपत 1.45 किग्रा. है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 4.66 किग्रा. है.

दूध व दूध से बने उत्पादों पर सर्वाधिक खर्च करते हैं दिल्लीवासी
दिल्लीवासी खाद्य पदार्थों के मामले में दूध और दूध से बने उत्पादों पर सर्वाधिक खर्च करते हैं. वे हर महीने औसतन 1,014 रुपये खाद्य वस्तुओं पर खर्च करते हैं. इसमें से सर्वाधिक 277 रुपये दूध और दूध से बने उत्पादों पर खर्च किये जाते हैं. इसके बाद पेय पदार्थ तथा जलपान का स्थान है, जहां 198 रुपये खर्च किये जाते हैं वहीं अनाज पर वे 159 रुपये व्यय करते हैं. 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार गैर-खाद्य वस्तुओं पर प्रति व्यक्ति मासिक व्यय (एमपीसीई) 1796.57 रुपये है. इन वस्तुओं में टिकाऊ वस्तुएं, तंबाकू, ईधन, कपड़ा, मनोरंजन, उपभोक्ता एवं अन्य वस्तुएं आदि शामिल हैं.

शहरी क्षेत्र में रहने वाले दिल्लीवासियों का एमपीसीई 2010 में करीब 2,905 रुपये रहा जबकि ग्रामीण क्षेत्र में रहने वालों का मासिक व्यय 1,761 रुपये रहने का अनुमान है. औसत एमपीसीई 2,811 रुपये रहा.ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य वस्तुओं पर प्रति व्यक्ति मासिक व्यय 771 रुपये रहा जबकि शहरी इलाकों में यह 1036 रुपये था. औसतन प्रति व्यक्ति व्यय 1,014.48 रुपये रहा.  दिल्ली सरकार की घरेलू उपभोक्ता व्यय पर जारी पुस्तिका से यह बात सामने आयी है.


 

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