दिल्ली पुलिस ने सलेम के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत लगे आरोपों को वापस लेने सम्बंधी एक याचिका दायर की थी.
वर्ष 2005 में सलेम का प्रत्यर्पण पुर्तगाल से हुआ था. दिल्ली के एक व्यापारी अशोक गुप्ता को फोन पर धमकाकर उससे पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के आरोप में उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था.
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता हरेन रावल ने न्यायमूर्ति वी.के. शाली से कहा कि यदि मकोका के तहत सलेम पर लगे आरोप वापस नहीं लिए गए तो इससे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचेगा.
ज्ञात हो कि छह वर्ष पूर्व पुर्तगाल से सलेम के प्रत्यर्पण के समय भारत ने उस देश को आश्वस्त किया था कि वह सलेम को मृत्युदंड नहीं देगा या कानून की किसी भी ऐसी धारा के तहत उस पर ऐसे आरोप तय नहीं किए जाएंगे जिससे उसे 25 साल से अधिक कैद की सजा हो.
रावल ने कहा, "ऐसे में हम अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी साख खो देंगे और यह मामला दिखाने के लिए एक ऐसा उदाहरण बन जाएगा कि यह देश अपना वादा पूरा नहीं करता."
पुर्तगाल के सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में भारत की अपील खारिज कर दी और यह कहते हुए सलेम का प्रत्यर्पण रद्द कर दिया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दोनों देशों के बीच हुई प्रत्यर्पण संधि का उल्लंघन किया है.
पुर्तगाल की अदालत ने भारतीय जांच एजेंसियों को उन शर्तो के उल्लंघन का आरोपी माना जिसके आधार पर सलेम को वर्ष 2005 में भारत ले जाने की अनुमति दी गई थी. भारतीय एजेंसी 1993 में मुम्बई में विस्फोटों सहित आठ मामलों में सुनवाई के दौरान मौजूदगी के लिए सलेम को भारत लेकर आई थी.