युवा मानते हैं कि हुक्के के तल में मौजूद पानी की वजह से धुआं फिल्टर होकर आता है, लेकिन यह सही नीं हैं. युवा यह मानते हैं कि सिगरेट और बीड़ी की तुलना में यह कम नुकसानदायक है लेकिन यह सिगरेट की तुलना में कैंसर के लिए दोगुना खतरनाक है.
उल्लेखनीय है कि दिल्ली में हुक्का पार्लरों के बढ़ते चलन ने इस काम को और आसान बना दिया है. दक्षिण दिल्ली, सेंटर दिल्ली, उत्तरी दिल्ली और साउथ वेस्ट दिल्ली के अलावा दिल्ली-एनसीआर रीजन में 100 से ज्यादे छोटे बड़े हुक्का पार्लर युवाओं के नशे की लत शांत कर रहे हैं.
भले ही हुक्के की गुड़गुड़ाहट धीरे-धीरे युवाओं को अपने चपेट में ले रही है और ये कैंसर के शिकार बन रहे हैं. इनमें लड़के और लड़कियां दोनों ही शामिल हैं, जो 100 रुपए से लेकर 1000 रुपए तक में नशे की लत शांत करने यहां आते हैं.
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के कैंसर रोग विभाग के डा. ललित कुमार ने बताया कि यह सिगरेट की तुलना में ज्यादा खतरनाक होता है. जबकि एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के चेयरमैन एवं कैंसर रोग विशेषज्ञ डा. एनके पांडेय का कहना है कि दिल्ली में ऐसे बार की संख्या लगातार बढ़ रही है. जिसकी चपेट में युवा पीढ़ी आ रही है. इस ओर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो दिल्ली युवाओं में कैंसर के मामलें राजधानी बन जाएगी.
पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट के सन तंत्रिका पण्राली विभाग के प्रमुख डा. राजकुमार ने कहा कि लोग मानते हैं कि हुक्के में सिर्फ 0.5 पर्सेट निकोटिन घुला होता है लेकिन सच्चाई यह है कि इसमें निकोटिन, टार और कॉर्बन मोनोऑक्साइ के हैवी एलीमेंट घुले होते हैं जो खतरनाक होते हैं. इससे कार्डियोवास्कुलर डिस्फंक्शन के साथ हाई बीपी और लंग कैंसर का खतरा 30 फीसद तक बढ़ जाता है.
इसलिए युवाओं में हुक्का बार के प्रति बढ़ते क्रेज पर अंकुश लगाना जरूरी है. इस मुतल्लिक प्रधान स्वास्थ्य सचिव अंशु प्रकाश ने कहा कि ऐसे हुक्का बार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
उल्लेखनीय है कि अब तक स्वास्थ्य विभाग को किसी प्रकार की शिकायत नहीं मिली है. फिर भी इसके लिए जल्द ही सीडीएमओं को निर्देश दिया जाएगा कि उनके जिले में खुले हुक्का बारों की सूची व वहां की हेल्थ हाइजीन के बारे में स्पष्ट करे. जिन्हें जरूरी हुआ तो बंद कराया जाएगा.