दो जोड़ी कपड़ों ने बना दिया था कसाब को आतंकवादी !

इसी गांव का रहने वाला था कसाब, दो जोड़ी कपड़ों ने बना दिया आतंकवादी !

अजमल आमिर कसाब..., जो महज दो जोड़ी नए कपड़ों की ख्वाहिश में उस राह पर निकल पड़ा, जिसमें उसने दरिंदगी की ऐसी कहानी लिखी, जो इतिहास के काले पन्नों में लिखी जाएगी. आतंकवादी अजमल कसाब को पुणे की यरवडा जेल में बुधवार सुबह कसाब को दी गई फांसी दे दी गई. कौन था ये कसाब, कहां से आया था, क्यों मारे बेगुनाह लोग..हम आपको बताते हैं पढ़िए. पाकिस्तान के ओकारा जिले में एक गरीब परिवार में जन्मे पाकिस्तानी आतंकवादी के पिता रेहढ़ी पटरी लगाते थे और भाई लाहौर में एक मजदूर था. ऐसे में दुनिया घूमने, पैसा कमाने और ऐशो आराम की जिंदगी बसर करने का सपना संजोने वाले अजमल ने ईद पर अपने पिता से महज दो जोड़ी नए कपड़ों की मांग पूरी नहीं होने पर एक नया रास्ता अख्तियार कर लिया. पाकिस्तान के 25 वर्षीय इस युवक ने गरीबी और बेचारगी की जिंदगी से तंग आकर वर्ष 2005 में अपने पिता का घर छोड़ दिया. छोटे-मोटे अपराध और चोरी चकारी से अपराध की दुनिया में कदम रखने वाला यह गुनहगार आतंकवादी संगठन लश्कर ए तोइबा के राजनीतिक इकाई जमात उद दावा में शामिल हो गया. अजमल से कसाब तक का सफर तय करने वाले इस आतंकवादी ने इसके बाद लश्कर ए तोइबा से भारत के खिलाफ नफरत और दहशतगर्दी का वह प्रशिक्षण हासिल किया, जिसने 26 नवंबर 2008 को 166 मासूम लोगों की जिंदगी को लील लिया और दुनियाभर में दहशत और आतंकवाद की एक खौफनाक कहानी लिख दी.

 
 
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