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- बिग बी की सांसों में लंबा इतिहास मिलेगा

कभी एक जमाना था, जब कोई भी आदमी एक्टर बनने मुंबई आता था तो वह दिलीप कुमार की तरह होना चाहता था. फिर एक समय वह भी आया जब लोग अमिताभ बच्चन बनने की कोशिश में लग गए. यह सिलसिला आज भी जारी है. शायद इसलिए कि बच्चन साहब ने जिस-जिस तरह के किरदार सिनेमा में निभाए, वैसी कोशिश और किसी ने नहीं की. ‘आनंद‘ हो या ‘जंजीर‘, ‘शोले‘ हो या ‘दीवार‘, ‘चीनी कम‘, ‘नि:शब्द‘ हो या ‘पा‘ या फिर ‘भूतनाथ‘ - उन्होंने कभी खुद को दोहराने की कोशिश नहीं की.
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