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कराची। आतंकवादी हमले के दौरान श्रीलंका क्रिकेट टीम की बस के पीछे चल रही दूसरी बस में मारे गये ड्राइवर की दोनों बेटियों सादिया और सुमेरा ने गुहार लगाई है कि सरकार और क्रिकेट बोर्ड उन्हें पैसा देने के बजाय उनके मरहूम पिता जफर खान की शहादत की कद्र करे।
लाहौर में हुए आंतकी हमले में जफर खान को उस समय सीधे गोली मार दी गयी थी जब वे उनकी बस में बैठे मैच रैफरी और अम्पायरों के बचाव के लिये बस भगा कर ले जाने का प्रयास कर रहे थे।
खान के साथी ड्राइवर मेहर खलील की बस श्रीलंका टीम को लेकर उसके आगे आगे चल रही थी। खलील तो आंतकवादियों की गोलियों की बौछारों के बीच बस बचा कर ले जाने में कामयाब हो गया। खिलाडियों की जान बचाकर वह देश में एक राष्ट्रीय हीरों बन गया है।
सुमेरा और सादिया बहनों ने इस बात पर हैरान जताई कि उनके पिता की शहादत को कोई तवज्जो नहीं दी जा रही है।
खान की 18 साल की बेटी सुमेरा ने कहा कि मेरे पिता ने भी उसी तरह अपनी जान पर खेल कर अपना फर्ज निभाया है लेकिन कोई भी उनके बारे में बात नहीं कर रहा है। सभी लोग दूसरे ड्राइवर ‘मेहर खलील' के बारे में बात कर रहे हैं या मारे गये पुलिस अधिकारियों की बात की जा रही है जबकि मेरे पिता ने देश सेवा में अपनी जान गंवाई है।