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01 Mar 2009 12:43:57 PM IST
Last Updated : 30 Nov -0001 12:00:00 AM IST

फेयरी क्वीन की सवारी बनी पर्यटकों के आकर्ष

नयी दिल्ली। वैश्विक आर्थिक संकट और मंदी के दौर के बावजूद भारत में पर्यटकों के आने पर प्रभाव पड़ता नहीं दिखाई दे रहा है और पर्यटक दिल्ली-अजमेर मार्ग पर विश्व के सबसे पुराने इंजन से सवारी का जमकर लुत्फ उठा रहे जहां विरासत ट्रेन पूरी क्षमता से भरी रहती है। गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड ने भी कल स्वीकार किया कि ट्रेन 60 यात्रियों की पूरी क्षमता से चल रही है। रेलवे के अधिकारी ने नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर बताया कि 154 वर्ष पुराने ट्रेन से यात्रा करने वाले यात्रियों में 30 विदेशी शामिल हैं। अधिकारी ने बताया कि यात्री अब ट्रेन टिकट की बुकिंग रेलवे वेबसाइट पर इंटरनेट के जरिये भी कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि फेयरी क्वीन सबसे पहले 1855 में ईस्ट इंडिया रेलवे द्वारा चलाई गई थी और विरासत ट्रेन का यह इंजन विश्व का सबसे पुराना चालू इंजन है। उल्लेखनीय है कि 13 जनवरी 1998 को गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड ने इसे सबसे पुराने कार्यरत इंजन का दर्जा प्रदान किया था। अधिकारी ने बताया कि रेलवे फेयरी क्वीन से यात्रा के लिए दो दिनों का समग्र पैकेज पेश कर रही है जिसमें खाने ठहरने तथा अन्य सुविधाओं के अलावा सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल है। फेयरी क्वीन से यात्रा के लिए दोनों ओर का प्रति व्यक्ति खर्च 8 600 रुपया है जबकि एक तरफ का खर्च 6 000 रुपया है। अधिकारी ने बताया कि ट्रेन में राजस्थान के इतिहास संस्कृति तथा विरासत को दिखाया गया है। 60 सीटों वाले एसी कोच में यात्रियों के लिए स्वादिष्ट राजस्थानी व्यंजन परोसा जाता है। इस ट्रेन से यात्रा के दौरान अलवर और सरिस्का वन्य जीव अभयारण्य महत्वपूर्ण पड़ाव आते हैं। पूर्ववर्ती ईस्ट इंडियन रेलवे के समय यह ट्रेन हावड़ा और रानीगंज स्टेशनों के बीच चलती थी और 1895 में इसे फेयरी क्वीन का नाम दिया गया। वर्ष 1908 में इसकी सेवा रोक दी गई थी। अधिकारी ने बताया कि फेयरी क्वीन को वर्ष 1997 में एक बार फिर से शुरू किया गया और इसी वर्ष इसने पहली वाणिज्यिक यात्रा शुरू की।


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