नयी दिल्ली। किसानों को मान्यताप्राप्त गोदामों में रखे गये उनके उत्पादों के एवज में बड़े स्तर पर बैंकों से ऋण प्राप्त करने में मदद के लिये भंडारगृह नियामक प्राधिकार का जल्द ही गठन किये जाने की संभावना है। खाद्य मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा इस प्राधिकार का जल्द ही गठन किया जायेगा और यह प्रक्रिया जारी है। सूत्रों ने बताया कि कैबिनेट सचिव की अगुवाई में एक समिति प्राधिकार के अध्यक्ष और सदस्यों को चुनेगी। उन्होंने बताया कि इस समिति का अध्यक्ष सचिव के रैंक का होगा।
कुछ निजी क्षेत्र के भंडारगृह कंपनियों के प्रयासों के तहत किसानों को बैंकों से ऋण मिल रहे हैं यद्यपि यह उनके उत्पादों की तुलना में मामूली स्तर का है। एनबीएचसी और एनसीएमएसएल जैसी भंडारगृह कंपनियों ने बैंकों के साथ गठजोड़ किया है तथा वे किसानों को भंडारगृह की रसीद प्रदान कर रहे हैं ताकि वे ऋण प्राप्त कर सकें। वेयरहाउस (विकास एवं विनियमन) कानून के तहत भंडारगृह की रसीद को विनिमययोग्य परिपत्र बना दिया गया जिसे वर्ष 2007 में पारित किया गया ताकि किसानों को अपनी उपज के एवज में बैंकों से ऋण लेने में मदद मिल सके। तथापि कानूनी दिक्कतों के कारण केन्द्र सरकार द्वारा अभी भी इस कानून की अधिसूचना जारी की जानी बाकी है क्योंकि उसे नियामक प्राधिकार के साथ ही भंडारगृहों को पंजीकृत कराना होगा। टिप्पणियां (0 भेज दिया):
|
||||||||||||||||||||||||||||||||