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नयी दिल्ली। केन्द्र सरकार ने मार्च के लिए प्याज के न्यूनतम निर्यात मूल्य ‘एमईपी' को 320-325 डालर प्रति टन के औसत पर अपरिवर्तित रखा है जबकि व्यापारियों द्वारा यह अनुमान लगाया जा रहा था कि इसकी खेप में कटौती और घरेलू मूल्य दरों में वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए इसकी कीमत को बढ़ाया जा सकता है।
राष्ट्रीय कृषि सहकारिता विपणन महासंघ ‘नाफेड' के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमने फिलहाल मार्च के न्यूनतम निर्यात मूल्य को अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है क्योंकि कीमतें फरवरी के आरंभ में प्राप्त किये गये स्तर के लगभग बनी हुई हैं।
प्याज निर्यात के लिए नाफेड प्रमुख ऐजेंसी है। वह 12 अन्य ऐजेंसियों के साथ मिलकर हरेक माह न्यूनतम निर्यात मूल्य के बारे में फैसला करती है जिस दौरान घरेलू उपलब्धता और कीमतों को ध्यान में रखा जाता है।
उन्होंने बताया कि तथापि यह ऐजेंसी घरेलू मूल्य परिदृश्य पर नजर रखे हुए है तथा 15 मार्च को न्यूनतम निर्यात मूल्य की समीक्षा करेगी।
कीमतों के बढ़ते जाने के साथ ही नाफेड ने नवंबर 2008 से इस वर्ष जनवरी के दौरान न्यूनतम निर्यात मूल्य में चरणबद्ध तरीके से 150 डालर प्रति टन की भारी भरकम वृद्धि कर दी ताकि निर्यात हतोत्साहित हो वैसे बाद में फरवरी के लिए न्यूनतम निर्यात मूल्य 60 डालर कम कर दिया गया।
महाराष्ट्र के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र लासेगांव में प्याज की कीमतें 851 से। 180 रूपये प्रति क्विंटल के बीच हैं जो कीमत माह के आरंभ में 801 से। 140 रूपये प्रति क्विंटल के बीच थीं।
नाफेड के अधिकारी ने बताया कि देर खरीफ फसलों से बाजार पटने के बाद फरवरी के लिए न्यूनतम निर्यात मूल्य में कटौती की गई जिससे कीमतों पर दवाब में पर्याप्त कमी आई।
भारत ने इस वित्तवर्ष में दिसंबर तक करीब 12.1 लाख टन प्याज का निर्यात किया जो पिछले वित्तवर्ष की समान अवधि में 6 90 644 टन के लगभग था।